मांग और आरोप संगठनों या पत्रों के हैं। अदालत का फैसला अलग है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026।
जाति जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम इस आंदोलन की मुख्य मांग है। वडेट्टीवार ने कहा आबादी का आंकड़ा नहीं निकला तो प्रतिनिधित्व कठिन होगा। 13 सितंबर को दिल्ली में करीब 65 संगठनों की बैठक का हवाला है।
कॉलम का मतलब
अनुसूचित जाति और जनजाति गिने जाते हैं। संगठन कहते हैं ओबीसी का अलग खाना नहीं। अलग खाना आने से राज्य की ओबीसी सूची अपने आप नहीं बदलती। केंद्र की सूची और राज्य की सूची दो किताबें हैं। प्रमाणपत्र तहसील से बनता है, मार्च से नहीं।
कार्यक्रम
2 अक्टूबर तालुका। 25 अक्टूबर जिला। 1 नवंबर दिल्ली। झारखंड 5 से 7 अक्टूबर स्थानीय कड़ी है।
एडवाइस:
अपनी जाति राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में देखें। कॉलम की मांग और अपना प्रमाणपत्र दो काम हैं।
लोग क्या पूछ रहे हैं
कॉलम क्यों?
आबादी गिनने के लिए, संगठन का कहना है।
फैसला आया?
3 अक्टूबर तक नई अधिसूचना इस लेख में नहीं।
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