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खूंटी OBC धरना 7 अक्टूबर कहाँ है

खूंटी OBC धरना 7 अक्टूबर कहाँ है

खूंटी में OBC धरना 7 अक्टूबर को रखा गया है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति का प्रोग्राम तीन दिन का है। 5 अक्टूबर की शाम मशाल जुलूस और पुतला दहन। 6 अक्टूबर को दुकान बंद और चक्का जाम। 7 अक्टूबर को उपायुक्त दफ्तर पर धरना और ज्ञापन। माँग जाति जनगणना के फॉर्म में OBC का अलग कॉलम है। धरना और जाम एक चीज नहीं।

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यह 3 अक्टूबर 2026 तक का ऐलान है। पुलिस का ऑर्डर नहीं। समय की घड़ी पब्लिक लेख में नहीं है। भीड़ का नंबर नहीं है।

धरना कहाँ है

समिति ने जगह उपायुक्त कार्यालय परिसर बताई है। प्रभात खबर ने खूंटी का तीन दिन का प्रोग्राम छापा। ज्ञापन उपायुक्त के जरिए केंद्र को भेजने की बात है। घड़ी, यानी सुबह 10 बजे या दोपहर 2 बजे, इन रिपोर्टों में नहीं लिखी। इसलिए «सुबह से दफ्तर बंद» मत लिखो। दफ्तर खुलेगा या नहीं, जिले का ऑर्डर बताएगा।

6 अक्टूबर का जाम सड़क और बाजार का ऐलान है। 7 का प्रोग्राम दफ्तर पर बैठने का है। बच्चे का स्कूल और मरीज का अस्पताल धरने का हिस्सा नहीं है। दोनों को जाम मत समझो। दैनिक भास्कर ने गुमला से 6 अक्टूबर को बंद और जाम की खबर दी। गुमला का जाम खूंटी का धरना नहीं है।

खूंटी धरना का डाटा पोस्टर। 5 मशाल, 6 जाम, 7 धरना।
7 अक्टूबर धरना है। समय की घड़ी पब्लिक नहीं।

पाँच जिले

समिति ने पाँच जिलों का नाम लिया है। खूंटी, गुमला, रांची, सिमडेगा और लोहरदगा। यह पूरी झारखंड की बंद नहीं है। बाकी जिलों का नाम इस ऐलान में नहीं है। 3 अक्टूबर की शाम रांची में जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च का अलग ऐलान था। वह 7 अक्टूबर का धरना नहीं। कितने लोग निकले, नंबर पब्लिक नहीं।

24 सितंबर को झारखंड प्रदेश OBC समाज के लोगों ने राज्यपाल से मुलाकात की। डॉ. सूरज मंडल ने हर उपजाति की साफ गिनती की बात कही। 21 सितंबर को हजारीबाग में राष्ट्रीय OBC मोर्चा ने आयोग को ज्ञापन दिया। उन्होंने आबादी करीब 70 परसेंट बताई। यह दावा है। जनगणना का नंबर नहीं। धरना उस दावे को टेबल नहीं बनाता।

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माँग कॉलम की है

फॉर्म में ST, SC और अन्य का कॉलम है। पिछड़ा वर्ग का अलग कॉलम नहीं। 2011 में जातियाँ हाथ से लिखी गईं, डाटा पढ़ा नहीं जा सका। माँग OBC नाम के कॉलम और ड्रॉपडाउन की है। कॉलम जुड़ने से केंद्र का 27 परसेंट अपने आप नहीं बढ़ेगा। धरना कोटा बढ़ाने का ऑर्डर नहीं है। ज्ञापन माँग है। डिपार्टमेंट का अपॉइंटमेंट लेटर नहीं।

यह 2 अक्टूबर वाला तालुका सत्याग्रह नहीं। वह वडेट्टीवार के कैलेंडर की डेट थी। यह 1 नवंबर का चलो दिल्ली भी नहीं। कमिटी अलग है। जगह अलग है।

उस दिन क्या समझें

7 अक्टूबर को खूंटी जाना है, तो उपायुक्त परिसर की बात है। सड़क जाम उसी दिन का ऐलान नहीं है। जाम 6 का है। स्कूल बंद है या नहीं, जिले के ऑर्डर से देखो। व्हाट्सऐप पर पूरे झारखंड की बंद लिखा हो, तो पाँच जिलों के नाम माँगो। नाम नहीं है, तो देश या राज्य बंद मत मानो।

इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। 6 अक्टूबर का जाम, अलग कॉलम, 2 अक्टूबर का सत्याग्रह और चलो दिल्ली।

जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। 5, 6 और 7 अक्टूबर। पाँच जिले। करीब 65 संगठन 13 सितंबर की दिल्ली मीटिंग में, वह देश वाला आधार है। खूंटी का समय नहीं। भीड़ का नंबर नहीं। 70 परसेंट दावा है।

रोल नंबर वाला अभ्यर्थी इस धरने से रिजल्ट न देखे। रिजल्ट अपने बोर्ड की साइट पर है। नाम OBC लिस्ट में है या नहीं, स्टेट लिस्ट से मिलाओ। ज्ञापन की फोटो कटऑफ नहीं है। फॉरवर्ड पर लाखों की भीड़ आए, तो आधिकारिक काउंट माँगो।

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तीन दिन अलग पढ़ो

5 अक्टूबर की शाम मशाल है। सड़क जाम उस शाम का ऐलान नहीं। 6 अक्टूबर दुकान बंद और जाम है। दफ्तर पर धरना उस दिन का ऐलान नहीं। 7 अक्टूबर धरना और ज्ञापन है। तीनों एक वीडियो में आ जाएँ, तो भी तीन प्रोग्राम हैं। कैप्शन में डेट देखो। डेट नहीं है, तो वीडियो किसी एक दिन का पक्का नहीं।

पाँच जिलों में एक जैसा प्रोग्राम होगा, यह भी पक्का नहीं। खूंटी का तीन दिन प्रभात खबर में है। गुमला में 6 का बंद और जाम भास्कर में है। रांची, सिमडेगा और लोहरदगा का नाम समिति ने लिया है। हर जिले की घड़ी अलग हो सकती है। एक जिले का पोस्टर पूरे राज्य पर मत चिपकाओ।

ज्ञापन केंद्र तक उपायुक्त के जरिए जाने की बात है। उपायुक्त का दफ्तर डाकघर नहीं है। पेपर लिया या नहीं, रसीद से पता चलेगा। रसीद नहीं है, तो ज्ञापन पहुँच गया मत मानो। कॉलम का नोटिस जनगणना दफ्तर जारी करता है। धरना वह नोटिस नहीं है।

मध्य प्रदेश की होल्ड भर्ती, बंगाल का सर्टिफिकेट और यूपी की शिक्षक भर्ती इस धरने से नहीं खुलती। रोल नंबर अपने पोर्टल पर है। नाम लिस्ट में है या नहीं, स्टेट OBC लिस्ट से देखो।

अस्पताल और स्कूल का रूट धरने से पहले जिले के नोटिस में देखो। नोटिस नहीं है, तो बंद मत मानो। एंबुलेंस का रास्ता जाम का हिस्सा नहीं बताया गया। 6 अक्टूबर की सड़क और 7 अक्टूबर का दफ्तर अलग नक्शा है।

70 परसेंट और 65 संगठन एक नंबर नहीं। 65 मीटिंग का करीब आंकड़ा है। 70 मोर्चे का दावा है। धरना दोनों को जनगणना नहीं बनाता। कागज संभालकर रखो। नया फॉर्म तहसील माँगे, तब बनवाना।

ग्रुप एडमिन का मैसेज पुलिस ऑर्डर नहीं होता। सीट का रेट आए तो पैसे मत भेजो। यह धरना टिकट नहीं बेचता। 1 नवंबर दिल्ली का प्लान अलग है। खूंटी का ज्ञापन दिल्ली कूच नहीं है।

यलो स्कार्फ रंग है, भीड़ का नंबर नहीं। वीडियो में जगह का नाम नहीं है, तो खूंटी मत मानो।

नाम पूछो।

एडवाइस:

सीधी बात यह है। 7 अक्टूबर को खूंटी में उपायुक्त दफ्तर पर धरना का ऐलान है। 5 को मशाल, 6 को जाम। माँग OBC कॉलम की है। यह पुलिस ऑर्डर नहीं। समय की घड़ी पब्लिक नहीं। स्कूल, अस्पताल और सड़क जिले के ऑर्डर से देखो। धरना अपॉइंटमेंट लेटर नहीं देगा। कागज फेंको मत। कॉलम जुड़ा, तभी मानो जब सरकारी नोटिस दिखे।

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🗓️ आज का इतिहास — 15 अक्टूबर

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Vivek Hardaha Written by: Writer, YouTuber and tool builder · Madhya Pradesh

Vivek has been online since 2012 and has worked since 2014 across YouTube, blogs and news platforms. He holds an M.Sc. in Computer Science and an M.A. in Sociology. On Vista Hub he writes practical, plain-language guides on tech, money, health, farming and festivals.

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