6 अक्टूबर को झारखंड में चक्का जाम का ऐलान है। केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने यह प्रोग्राम बताया है। वजह साफ है। जाति जनगणना के फॉर्म में OBC का अलग कॉलम नहीं है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। SC और ST का कॉलम फॉर्म में है। OBC का नहीं। इसी नाराजगी पर 5, 6 और 7 अक्टूबर के प्रोग्राम रखे गए हैं।
यह 3 अक्टूबर 2026 तक की खबर है। यह संगठन का ऐलान है। पुलिस का ऑर्डर नहीं। स्कूल बंद होगा या नहीं, और सड़क सच में जाम होगी या नहीं, यह जिले का ऑर्डर और उसी दिन की स्थिति बताएगी। भीड़ का कोई सरकारी नंबर अभी नहीं है।
तीन दिन का प्रोग्राम
प्रभात खबर ने खूंटी का प्रोग्राम छापा। 5 अक्टूबर की शाम मशाल जुलूस और पुतला दहन रखा गया है। 6 अक्टूबर को दुकानें बंद रखने और चक्का जाम करने की बात है। 7 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर धरना है। ज्ञापन उपायुक्त के जरिए केंद्र को भेजने की बात है। दैनिक भास्कर ने गुमला से 6 अक्टूबर को बंद और जाम की खबर दी।
समिति ने पाँच जिलों का नाम लिया है। खूंटी, गुमला, रांची, सिमडेगा और लोहरदगा। यह पूरी झारखंड की बंद नहीं है। पाँच जिलों का ऐलान है। 3 अक्टूबर की शाम रांची में जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च का अलग प्रोग्राम था। वह इस धरने का रिजल्ट नहीं है। कितने लोग निकले, इसका नंबर सार्वजनिक नहीं है।

जाम क्यों हो रहा है
समिति की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक फॉर्म में ST, SC और अन्य का कॉलम है, पिछड़ा वर्ग का अलग कॉलम नहीं। लोग कह रहे हैं कि बिना कॉलम के उनकी गिनती साफ नहीं होगी। गिनती साफ नहीं हुई, तो नौकरी, कॉलेज और योजना का रिजर्वेशन भी नंबर पर नहीं खड़ा होगा।
कॉलम और रिजर्वेशन एक चीज नहीं है। रिजर्वेशन नौकरी और कॉलेज में दिया गया हिस्सा है। केंद्र में OBC का कोटा 27 परसेंट है। कई राज्यों का अपना परसेंट है। जनगणना वह काउंट है जिससे पता चले कि इस क्लास में कितने लोग हैं। जाम कोटा बढ़ाने का फैसला नहीं है। जाम काउंट साफ करने की माँग है।
कौन क्या बोल रहा है
24 सितंबर को झारखंड प्रदेश OBC समाज के लोगों ने राज्यपाल से मुलाकात की। हिन्दुस्तान ने यह खबर छापी। डॉ. सूरज मंडल ने कहा कि हर उपजाति की साफ गिनती हो, तभी सोशल और इकोनॉमिक प्लान असली आंकड़े पर बनेगा। ज्ञापन में पंचायत चुनाव में आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व और परिसीमन की बात भी थी।
21 सितंबर को हजारीबाग में राष्ट्रीय OBC मोर्चा ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को ज्ञापन दिया। प्रभात खबर ने लिखा। मोर्चा ने कहा कि कॉलम न होने से सोशल, इकोनॉमिक और पॉलिटिकल नुकसान हो रहा है। उन्होंने OBC आबादी करीब 70 परसेंट बताई। यह उनकी बात है। जनगणना का छपा नंबर नहीं। इसलिए इस लेख में 70 परसेंट को सरकारी आंकड़ा नहीं माना गया।
2011 वाली गड़बड़ फिर न हो
2011 में सोशल और इकोनॉमिक जनगणना के साथ जातियाँ हाथ से लिखी गई थीं। नाम अलग-अलग तरीके से लिखे गए, डाटा पढ़ा नहीं जा सका। इसलिए इस बार माँग सिर्फ खाली जगह की नहीं है। माँग OBC नाम के कॉलम की है, और ड्रॉपडाउन की है। ड्रॉपडाउन का मतलब लिस्ट खुले, गिनती करने वाला सेंट्रल लिस्ट या स्टेट लिस्ट से जाति चुने। खुद न लिखे।
मान लो एक गाँव में यादव, कुर्मी और लोहार फैमिली हैं। सब OBC लिस्ट में हो सकते हैं। नाम हाथ से लिखा गया तो एक जगह कुर्मी, दूसरी जगह किसान। बाद में दोनों एक नंबर नहीं बनते। ड्रॉपडाउन से नाम एक जगह जुड़ते हैं। तभी जिला कह सकता है कि OBC में इतने लोग हैं।
यह वोटर लिस्ट वाला आंदोलन नहीं
6 अक्टूबर का जाम जनगणना के कॉलम पर है। वोटर लिस्ट या SIR वाली खबर से इसे मत मिलाओ। मध्य प्रदेश की 27 परसेंट होल्ड भर्ती भी दूसरी खबर है। वहाँ अपॉइंटमेंट लेटर डिपार्टमेंट के ऑर्डर पर आता है। महाराष्ट्र का कुणबी सर्टिफिकेट अलग है। 1 नवंबर का चलो दिल्ली देश वाला प्लान है। झारखंड का जाम उसका लोकल हिस्सा है।
इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। अलग कॉलम की माँग, आज का आंदोलन, 2 अक्टूबर का सत्याग्रह और 1 नवंबर चलो दिल्ली।
जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। पाँच जिले। तीन डेट, 5, 6 और 7 अक्टूबर। केंद्र में 27 परसेंट। 70 परसेंट मोर्चा का दावा है, जनगणना का आंकड़ा नहीं। भीड़ का नंबर नहीं है।
उस दिन सड़क पर क्या समझें
चक्का जाम का मतलब संगठन यह लगा रहे हैं कि सड़क पर गाड़ी रोकी जाए, ताकि कॉलम की माँग दिखे। दुकान बंद का मतलब बाजार बंद करने का ऐलान है। दोनों बातें प्रेस विज्ञप्ति में हैं। इसका ये मतलब नहीं कि सुबह 6 बजे से हर चौराहा बंद हो जाएगा। खूंटी में प्रोग्राम तय है। गुमला में बंद और जाम की खबर है। रांची, सिमडेगा और लोहरदगा का नाम समिति ने लिया है। बाकी जिलों का नाम इस ऐलान में नहीं है।
रिपोर्टों में 2027 की जनगणना की गिनती ठंडे पहाड़ी राज्यों से शुरू होने की बात है। फॉर्म पर OBC कॉलम जुड़ गया या नहीं, यह 3 अक्टूबर की इन खबरों में तय नहीं है। तय बात माँग की है। जाम उसी माँग को सड़क पर लाने का तरीका है।
एक लाइन और। सेंट्रल लिस्ट और स्टेट लिस्ट अलग हो सकती है। कोई जाति झारखंड में OBC हो, दूसरे स्टेट में न हो। इसलिए ड्रॉपडाउन में दोनों लिस्ट की बात हो रही है। सिर्फ सेंट्रल लिस्ट से जिले की गिनती पूरी नहीं होती।
एडवाइस:
सीधी बात यह है। 6 अक्टूबर को खूंटी, गुमला, रांची, सिमडेगा और लोहरदगा में चक्का जाम और दुकान बंद का ऐलान है, क्योंकि जनगणना फॉर्म में OBC का अलग कॉलम नहीं है। 5 को मशाल, 7 को धरना। यह पुलिस का ऑर्डर नहीं है। स्कूल, बस या सड़क बंद है या नहीं, अपने जिले के ऑर्डर से देखो। व्हाट्सऐप पर पूरे झारखंड की बंद या लाखों की भीड़ लिखा हो, तो उसे सरकारी पेपर न मानो। यह जाम रोल नंबर पर अपॉइंटमेंट लेटर नहीं देगा। नाम OBC लिस्ट में है या नहीं, स्टेट की लिस्ट से मिलाओ।