जाति जनगणना में OBC का अलग कॉलम इसलिए माँगा जा रहा है क्योंकि फॉर्म में SC और ST का कॉलम है, OBC का नहीं। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। लोग कह रहे हैं कि बिना अलग कॉलम के उनकी गिनती साफ नहीं होगी। गिनती साफ नहीं हुई, तो नौकरी और कॉलेज का रिजर्वेशन भी उलझा रहेगा।
यह 3 अक्टूबर 2026 की स्थिति है। डेट और बयान अखबारों में छपे हैं। सरकार का ऐसा नया पेपर, जिसमें OBC कॉलम जोड़ दिया गया हो, इन रिपोर्टों में नहीं दिखा।
कॉलम माँग है क्या
जनगणना का फॉर्म हर घर जाता है। उस पर SC का कॉलम है। ST का कॉलम है। OBC वाले कह रहे हैं कि उनका नाम अलग कॉलम में नहीं आता। 2011 में सोशल और इकोनॉमिक जनगणना के साथ जातियाँ लिखी गई थीं। नाम इतने अलग तरीके से लिखे गए कि डाटा पढ़ा नहीं जा सका। फॉरवर्ड प्रेस ने 20 सितंबर 2026 की दिल्ली मीटिंग पर यही लिखा।
इस बार माँग खाली जगह की नहीं है। माँग OBC नाम के कॉलम की है, और ड्रॉपडाउन की है। ड्रॉपडाउन का मतलब है लिस्ट खुले, और गिनती करने वाला सेंट्रल लिस्ट या स्टेट लिस्ट से जाति चुने। खुद न लिखे। भंडारा में 2 अक्टूबर के सत्याग्रह में OBC संघर्ष समिति और सकल OBC महामोर्चा ने यही कहा। लोकमत ने यह प्रोग्राम छापा।

रिजर्वेशन से कैसे जुड़ता है
कॉलम और रिजर्वेशन एक चीज नहीं है। रिजर्वेशन नौकरी और कॉलेज में दिया गया हिस्सा है। केंद्र में OBC का कोटा 27 परसेंट है। कई राज्यों का अपना परसेंट है। जनगणना वह काउंट है जिससे पता चले कि इस क्लास में कितने लोग हैं।
विजय वडेट्टीवार ने नागपुर में कहा कि आबादी का आंकड़ा नहीं आया, तो सीट और रिजर्वेशन का सवाल और उलझ जाएगा। वे कांग्रेस के MLA हैं, विदर्भ से। 13 सितंबर को दिल्ली में करीब 65 OBC संगठनों की मीटिंग हुई थी। उसी के बाद कैलेंडर बना। उन्होंने स्कॉलरशिप समय पर देने की बात भी कही, और कहा कि जो OBC रिजर्वेशन अभी है, वह घटे नहीं।
कौन क्या बोल रहा है
19 सितंबर को वडेट्टीवार ने विदर्भ के 11 जिलों के वर्कर्स से कहा कि अलग कॉलम साफ माँग है। आगे का प्लान भी बताया। 2 अक्टूबर को तालुका सत्याग्रह। 25 अक्टूबर को जिला मार्च। 1 नवंबर को चलो दिल्ली। 1 नवंबर का पूरा फॉर्म जॉइंट मीटिंग में तय होना है। नेशनल हेराल्ड और टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह सीक्वेंस छापा।
20 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में OBC महासभा की मीटिंग हुई। लोग यलो कैप और यलो स्कार्फ में थे। छत्तीसगढ़ यूनिट के प्रेसिडेंट राधेश्याम साहू ने कहा कि जातियाँ अलग हैं, पर कानून में पहचान एक है। एडवोकेट धर्मेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगला पार्लियामेंट सेशन आने से पहले कॉलम नहीं जुड़ा, तो जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट होगा। ये बयान हैं। कोर्ट का फैसला नहीं।
2011 और 2027
2011 वाली गिनती इसलिए बार-बार आती है क्योंकि जाति के नाम हाथ से लिखे गए। एक घर पर कुर्मी, दूसरे पर कुर्मी यादव, तीसरे पर किसान। बाद में तीनों एक नंबर नहीं बने। ड्रॉपडाउन से चुनने पर नाम एक जगह जुड़ते हैं। तभी स्टेट कह सकता है कि OBC में इतने लोग हैं। उसी नंबर पर नौकरी का परसेंट और कॉलेज की सीट की बात खड़ी होती है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि 2027 की जनगणना की गिनती ठंडे पहाड़ी राज्यों से शुरू हो चुकी है। फॉर्म अभी खुला है या OBC कॉलम जुड़ गया, यह 3 अक्टूबर की इन खबरों में तय नहीं है। तय बात माँग की है।
यह भर्ती वाले पत्र की खबर नहीं
अलग कॉलम की सड़क जनगणना पर है। मध्य प्रदेश में 27 परसेंट और होल्ड भर्ती दूसरी खबर है। वहाँ अपॉइंटमेंट लेटर डिपार्टमेंट के ऑर्डर पर आता है। महाराष्ट्र में कुणबी सर्टिफिकेट और मराठा रिजर्वेशन का झगड़ा अलग है। यूपी की टीचर भर्ती अलग है। बंगाल का सर्टिफिकेट केस भी अलग है। कॉलम जुड़ने से रोल नंबर पर लेटर नहीं निकलता।
इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। आज का आंदोलन, वडेट्टीवार क्या बोल रहे हैं, 1 नवंबर चलो दिल्ली और 2 अक्टूबर का सत्याग्रह।
जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। केंद्र में 27 परसेंट। दिल्ली की मीटिंग में करीब 65 संगठन। नागपुर में विदर्भ के 11 जिले। डेट 13 सितंबर, 2 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर। OBC की आबादी का एक परसेंट इन रिपोर्टों में नहीं था, इसलिए वह नंबर यहाँ नहीं है।
सड़क पर आगे क्या है
कॉलम की माँग सिर्फ एक मीटिंग में नहीं अटकी। 3 अक्टूबर को गढ़वा में शाम 4 बजे टाउन हॉल से मार्च का प्रोग्राम प्रभात खबर ने लिखा। रंका मोड़ पर नोटिफिकेशन का पुतला जलाने की बात थी। झारखंड में 6 अक्टूबर को चक्का जाम का ऐलान भी है। स्कूल बंद होगा या नहीं, यह जिले का ऑर्डर बताएगा। 25 अक्टूबर को जिला मार्च की बात है। 1 नवंबर को दिल्ली। देश भर की भीड़ का एक नंबर किसी रिपोर्ट में नहीं था। व्हाट्सऐप पर लाखों लिखा हो, तो उसे सरकारी काउंट न मानो।
3 अक्टूबर को गढ़वा वाले प्रोग्राम की माँग वही थी। फॉर्म में अलग OBC कॉलम जुड़े, और आंकड़ा छपे। भंडारा वाले 2 अक्टूबर के सत्याग्रह में ड्रॉपडाउन अलग से जोड़ा गया। दोनों जगह मुद्दा एक है। फॉर्म पर OBC का नाम साफ आए।
एक और बात साफ रखो। सेंट्रल लिस्ट और स्टेट लिस्ट अलग हो सकती है। कोई जाति एक स्टेट में OBC हो, दूसरे में न हो। इसलिए ड्रॉपडाउन में दोनों लिस्ट की बात हो रही है। सिर्फ सेंट्रल लिस्ट से स्टेट की गिनती पूरी नहीं होती।
एडवाइस:
सीधी बात यह है। लोग जनगणना के फॉर्म में OBC का अलग कॉलम माँग रहे हैं, और ड्रॉपडाउन भी, ताकि जाति का नाम हाथ से न लिखा जाए। SC और ST का कॉलम पहले से है। यह माँग कोटा बढ़ाने का फैसला नहीं है। यह काउंट साफ करने की माँग है। काउंट साफ होगा, तभी नौकरी और कॉलेज के रिजर्वेशन की बात नंबर पर खड़ी होगी। व्हाट्सऐप पर «कॉलम जुड़ गया» लिखा हो, तो उसे सरकारी पेपर न मानो। नाम लिस्ट में है या नहीं, स्टेट की OBC लिस्ट से मिलाओ। यह मार्च अपॉइंटमेंट लेटर नहीं देगा।