संपादकीय चित्रण है, घटना की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026 सुबह की।
सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की 14 आपत्तियाँ 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल से सार्वजनिक भाषा बनीं। दो निर्वाचन आयुक्तों ने दस महीने में कम से कम 14 बार फाइल पर लिखा कि फैसले उनकी जानकारी के बिना हुए। एक दिन में चार आपत्तियों का जिक्र है। यह इस्तीफा नहीं है। यह आंतरिक असहमति का दावा है, जिसे अखबार ने दस्तावेज कहकर छापा। आयोग का जवाब था कि ड्राफ्ट चरण के सवाल आम प्रशासनिक प्रक्रिया हैं।
तीन की मेज
चुनाव आयोग तीन सदस्यों का है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, और आयुक्त संधू व जोशी। कानून कहता है प्रक्रिया और काम का बंटवारा सर्वसम्मति से तय होता है। रिपोर्ट कहती है राष्ट्रीय SIR तीनों की निगरानी में था, फिर भी कई आदेश बिना जानकारी के निकले। 9 सितंबर 2026 को चार महीने बाद पहली बैठक हुई, ऐसा अखबार ने लिखा। संधू और जोशी ने सार्वजनिक बयान नहीं दिया था जब रिपोर्ट छपी।
फॉर्म 6 वाला बिंदु
नए वोटर के फॉर्म 6 में सवाल जोड़ दिया गया कि आवेदक या उसके माता-पिता या दादा-दादी पिछली SIR की सूची में हैं या नहीं। बिना जवाब फॉर्म आगे नहीं बढ़ता था। मई में जोशी ने फाइल पर चेतावनी लिखी कि नियम संशोधन के बिना फॉर्म ऐसे नहीं बदल सकता। संधू सहमत थे। बदलाव फिर भी हुआ। जुलाई में अखबार ने बदलाव छापा। 13 अगस्त को संधू ने लिखा कि यह अनधिकृत और गैरकानूनी है और तुरंत हटे। सोमवार सुबह तक सवाल फॉर्म पर था, रिपोर्ट के मुताबिक। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 28 कहती है चुनावी फॉर्म के नियम केंद्र सरकार बदलती है।
डेटाबेस और अपील
आपत्तियां नए पंजीकरण, नाम काटने, नाम बहाल करने, अपील और इलेक्टोरल रोल सॉफ्टवेयर तक गईं। जोशी ने वोटर डेटाबेस के धीमे केंद्रीकरण पर चिंता लिखी और ऑडिट मांगा कि बदलाव सिर्फ अधिकृत अधिकारी करें। ECINet का नाम इन्हीं बहसों में आया। आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। विपक्ष कहता है यही कागज वोट चोरी का आंतरिक सबूत है। अदालत ने इस रिपोर्ट पर अब तक कोई फैसला नहीं सुनाया है।
बड़ा आंकड़ा यहां है: 13 करोड़ नाम। व्यक्ति की फाइल यहां: ज्ञानेश कुमार कौन हैं।
इस्तीफा क्यों नहीं
असहमति और इस्तीफा अलग हैं। दो आयुक्तों ने फाइल पर आपत्ति दर्ज की, कुर्सी नहीं छोड़ी। विपक्ष दोनों से सार्वजनिक बयान मांग रहा है। 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में नारा CEC के खिलाफ था, संधू-जोशी के खिलाफ नहीं। 3 अक्टूबर तक किसी आयुक्त का त्यागपत्र नहीं आया।
एडवाइस:
14 आपत्तियों को अदालती सजा न पढ़ें। एक्सप्रेस की रिपोर्ट आरोप और फाइल नोट का दावा है। आयोग ने प्रक्रिया बताई है, बिंदु-दर-बिंदु इनकार हर पंक्ति पर नहीं आया। नाम कटा हो तो फॉर्म 6 भरें, फाइल नोट का इंतजार न करें।
और पढ़ें: वोट चोरी, नाम कैसे जोड़ें।
टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी
15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।
सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की 14 आपत्तियाँ, फाइल में क्या है पर दोनों पक्ष
इंडियन एक्सप्रेस ने 23 सितंबर 2026 को 14 आपत्तियां छापीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
फॉर्म 6 पर पिछली SIR वाली पंक्ति को संधू ने अनधिकृत कहा। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
9 सितंबर को चार महीने बाद पहली बैठक का जिक्र है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
दोनों आयुक्तों ने त्यागपत्र नहीं दिया। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आगे कौन सा सर्च फूटेगा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।
पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।