ज्ञानेश कुमार कौन हैं? सैलरी, कार्यकाल और 26वें CEC की फाइल

ज्ञानेश कुमार कौन हैं? सैलरी, कार्यकाल और 26वें CEC की फाइल

संपादकीय चित्रण है, 2 अक्टूबर की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। यह कानूनी सलाह नहीं है।

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ज्ञानेश कुमार कौन हैं, यह सवाल 2 अक्टूबर 2026 के बाद अचानक पाठ्यक्रम बन गया। शिवाजी पार्क और जंतर-मंतर पर नारा उनका नाम लेकर लगा। सर्च करने वाला व्यक्ति इस्तीफे की मांग से पहले यह जानना चाहता है कि यह आदमी किस बैच का है, कब मुख्य निर्वाचन आयुक्त बना, सैलरी क्या है और कुर्सी कब तक है।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार

सार्वजनिक करियर प्रोफाइल के मुताबिक वे 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं, केरल काडर। पढ़ाई सिविल इंजीनियरिंग की बताई जाती है, आईआईटी कानपुर। केरल में अर्नाकुलम के जिला कलेक्टर और कोच्चि नगर निगम के आयुक्त जैसे पदों का जिक्र आता है। बाद में रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय में संयुक्त और अतिरिक्त सचिव, फिर संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव। 31 जनवरी 2024 को सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के दो महीने से कम समय बाद, 15 मार्च 2024 को उन्हें निर्वाचन आयुक्त बनाया गया। उस वक्त 2024 के लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम आने वाला था। अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद खाली हुई जगह का भी जिक्र खबरों में है। 19 फरवरी 2025 को वे भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। उनसे पहले राजिव कुमार इस कुर्सी पर थे।

सैलरी और कार्यकाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सैलरी सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर रखी गई है। यह 1991 के चुनाव आयोग सेवा कानून में लिखा है। सार्वजनिक पन्नों पर बेसिक वेतन 2,50,000 रुपये महीना दर्ज मिलता है, भत्ते अलग। पे रिवीजन के बाद आंकड़ा बदल सकता है, इसलिए भर्ती विज्ञापन वाला आंकड़ा न समझें। कार्यकाल अधिकतम छह साल, या 65 वर्ष की उम्र, जो पहले आए। खबरों में उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक चलने वाला बताया गया है, अगर उम्र की सीमा पहले न आ जाए। यानी 3 अक्टूबर 2026 को इस्तीफा नहीं हुआ है, और कानून से अपने आप कुर्सी खाली नहीं हो रही।

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नियुक्ति पर विवाद

वे 2023 के कानून के बाद चुने गए पहले CEC बताए जाते हैं। इस कानून ने चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री को बैठाया। समिति में प्रधानमंत्री, एक मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होते हैं। राहुल गांधी ने नियुक्ति का विरोध किया था और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में कानून की चुनौती लंबित है, इसलिए फैसला टाला जाए। कानून अभी लागू है। विपक्ष कहता है इससे आयोग की स्वायत्तता कमजोर हुई। सरकार का पक्ष है कि संसद का कानून है और नियुक्ति वैध है।

पुराना काम, नया तूफान

करियर स्केच में अनुच्छेद 370 और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक काम का जिक्र आता है। यह उनका चुनाव आयोग वाला काम नहीं है। चुनाव आयोग में विवाद SIR को लेकर है। विशेष गहन पुनरीक्षण। बिहार से शुरू हुआ अभ्यास कई राज्यों में गया। BBC जैसी रिपोर्टों में ड्राफ्ट सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने का आंकड़ा छपा, करीब 13 प्रतिशत मतदाता। आयोग कहता है मृत, शिफ्ट और डुप्लिकेट नाम हटे। विपक्ष कहता है गरीब, दलित, मुस्लिम और विपक्षी वोटर निशाने पर हैं। दोनों दावे एक साथ पढ़ें, एक को फैसला न मानें।

23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि साथी आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीने में कम से कम 14 बार फाइल पर आपत्ति दर्ज की। विस्तार इस लेख में है: संधू और जोशी की 14 आपत्तियाँ। नाम काटने का बड़ा आंकड़ा यहां है: SIR में 13 करोड़ नाम।

इस्तीफा क्यों मांग रहे हैं

2 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने शिवाजी पार्क पर ज्ञानू मस्ट गो का नारा दिया। दिल्ली में जंतर-मंतर पर विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए। मांग एक ही है, इस्तीफा। 3 अक्टूबर सुबह तक इस्तीफा नहीं आया। आगे की तारीख 10 अक्टूबर है, जिसे जंतर-मंतर 2.0 कहा जा रहा है। कानूनी रास्ता अलग है। CEC को नारे से नहीं, संसद के विशेष बहुमत वाले पते से हटाया जाता है। वह प्रक्रिया यहां है: CEC कैसे हटाया जाता है।

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एडवाइस:

सर्च में सैलरी और उम्र लिखी मिले तो स्रोत देखें। बेसिक 2.5 लाख वाला आंकड़ा पुराने सार्वजनिक पन्ने का है, भत्ता और नया पे-स्केल अलग हो सकता है। इस्तीफा हो गया जैसी पोस्ट पर भरोसा न करें, जब तक आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट न आए। नाम कटा हो तो नारे से नहीं, फॉर्म 6 से जुड़ता है। यह लेख जीवनी है, आरोप की अदालत नहीं।

और पढ़ें: इस्तीफे की मांग, इस्तीफा क्यों नहीं आया, अभिजीत दीपके कौन हैं।

फाइल में और क्या है

ज्ञानेश कुमार को गृह मंत्री अमित शाह की पसंद बताया गया है। यह विपक्षी बयान और कुछ प्रोफाइल लेखों की भाषा है, आधिकारिक चयन आदेश में ऐसा वाक्य नहीं होता। चयन समिति का रिकॉर्ड सार्वजनिक बहस में यही कहता है कि नेता प्रतिपक्ष असहमत थे। नियुक्ति रुक नहीं पाई।

आयोग में तीन सदस्य होते हैं। मुख्य आयुक्त और दो आयुक्त। कानून कहता है कामकाज का बंटवारा सर्वसम्मति से होना चाहिए। सितंबर 2026 की रिपोर्ट ने इसी बिंदु पर उंगली रखी। संधू और जोशी ने कहा कई आदेश उनकी जानकारी के बिना निकले। आयोग ने बाद में कहा कि ड्राफ्ट पर सवाल आम प्रशासनिक प्रक्रिया है। दोनों आयुक्तों ने सार्वजनिक इस्तीफा नहीं दिया।

उम्र और तारीख पर अटकल कम करें। सेवानिवृत्ति 31 जनवरी 2024 पक्की है। निर्वाचन आयुक्त बनना 15 मार्च 2024 पक्का है। CEC बनना 19 फरवरी 2025 पक्का है। 26 जनवरी 2029 वाली तारीख खबरों का आकलन है, राष्ट्रपति की अधिसूचना खुद पढ़ लें अगर सटीक दिन चाहिए।

सर्च में एक और सवाल आता है, क्या ये वही अधिकारी हैं जिनका नाम अनुच्छेद 370 पर आता है। करियर स्केच में गृह मंत्रालय वाले वर्षों का जिक्र है। इसका मतलब यह नहीं कि SIR का फैसला 2019 में लिखा गया। दोनों बातें जोड़कर शॉर्टकट न बनाएं।

2 अक्टूबर को नारा था गद्दार ज्ञानू मस्ट गो और ज्ञानेश ब्रो जस्ट रेजाइन। नारा मांग है। इस्तीफा दस्तावेज नहीं है। 3 अक्टूबर सुबह तक राष्ट्रपति भवन या आयोग की तरफ से त्यागपत्र का नोट नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर बताई जा रही है।

लोग क्या पूछ रहे हैं

ज्ञानेश कुमार की सैलरी कितनी है?

कानून उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर रखता है। सार्वजनिक पन्नों पर बेसिक 2,50,000 रुपये महीना लिखा है, भत्ता अलग। नया पे-स्केल अलग हो सकता है।

कौन से बैच के IAS हैं?

1988 बैच, केरल काडर। सेवानिवृत्ति 31 जनवरी 2024।

कितनेवें CEC हैं?

26वें। कुर्सी 19 फरवरी 2025 से। उनसे पहले राजिव कुमार।

क्या इस्तीफा दे दिया?

3 अक्टूबर 2026 सुबह तक नहीं।

टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी

15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।

ज्ञानेश कुमार कौन हैं? सैलरी, कार्यकाल और 26वें CEC की फाइल पर दोनों पक्ष

19 फरवरी 2025 को वे 26वें CEC बने। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।

सैलरी सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर है, सार्वजनिक पन्ने बेसिक 2.5 लाख लिखते हैं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।

2023 के कानून में चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश हटे। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।

कार्यकाल छह साल या 65 वर्ष, खबरों में 26 जनवरी 2029 तक का आकलन है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।

आगे कौन सा सर्च फूटेगा

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।

पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।

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Vivek Hardaha Written by: Writer, YouTuber and tool builder · Madhya Pradesh

Vivek has been online since 2012 and has worked since 2014 across YouTube, blogs and news platforms. He holds an M.Sc. in Computer Science and an M.A. in Sociology. On Vista Hub he writes practical, plain-language guides on tech, money, health, farming and festivals.

कैसे बना: ड्राफ्ट में AI की मदद ली गई; स्रोत, आँकड़े और भाषा विवेक हरदहा ने जाँचे। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

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