इस साल विश्वकर्मा पूजा गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को है। ये सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं — कन्या संक्रांति वाला सूर्य पर्व है, जब कारीगर, मिस्त्री, इंजीनियर और फैक्ट्री वाले अपने औजार-मशीन के आगे दीया जलाते हैं। नीचे तारीख, समय की खिड़कियाँ और सरल विधि है; मुहूर्त हमेशा अपने शहर के पंचांग से मिला लें।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की तारीख और वार
विश्वकर्मा पूजा 2026 गुरुवार, 17 सितंबर को मानी जा रही है। उत्तर भारत के कई घरों, वर्कशॉप और औद्योगिक इलाकों में यही दिन औजार पूजन का दिन होता है। त्यौहार का स्वभाव चंद्र तिथि से ज्यादा सूर्य की गति से जुड़ा बताया जाता है — यानी कन्या राशि में सूर्य के प्रवेश का दिन। इसलिए अलग-अलग पंचांग में तिथि एक दिन इधर-उधर दिखे तो घबराइए मत; संक्रांति का समय ही इस पर्व की रीढ़ है।
दिल्ली और आम रिपोर्टों में कन्या संक्रांति करीब सुबह 07:58 IST बताई गई है। पूजा का शुभ विंडो अक्सर इसी समय से दोपहर तक चलता हुआ लिखा जाता है — लगभग 07:58 AM से 12:40 PM। अभिजित मुहूर्त करीब 11:51 AM से 12:40 PM के बीच बताया गया है। पुण्य काल की रिपोर्टें अलग-अलग हैं, कुछ जगह दोपहर 2:22 या 2:31 PM तक का उल्लेख मिलता है। इसलिए “इतने बजे पक्का” न लिखकर यही कहना सही है: स्थानीय पंचांग देखें।
शहर बदलते ही संक्रांति का मिनट भी बदल सकता है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पटना — एक ही गुरुवार, थोड़ा अलग घड़ी। वर्कशॉप अगर शिफ्ट में चलती है तो सुबह की पाली में झाड़ू-पोंछा और फूल रख लें, दोपहर की पाली अभिजित के आसपास आरती कर ले। रविवार वाली छुट्टी का इंतजार इस पर्व को नहीं करना पड़ता; काम के दिन ही पूजा है, यही इसकी पहचान है।
वार गुरुवार है — कई घरों में गुरुवार पहले से व्रत-कथा वाला दिन माना जाता है, लेकिन विश्वकर्मा पूजा को किसी और व्रत से जोड़कर नया नियम मत गढ़िए। जो सरल विधि आपके परिवार या कारखाने में सालों से चलती है, उसी को श्रद्धा से निभाइए।
कन्या संक्रांति: ये सूर्य पर्व क्यों कहा जाता है

कन्या संक्रांति का मतलब है सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश। विश्वकर्मा पूजा को कई पंचांग और लोक-परंपरा सूर्य पर्व के रूप में देखती हैं, केवल चंद्रमा की तिथि के त्यौहार की तरह नहीं। इसीलिए कहीं भाद्रपद, कहीं आश्विन के पन्ने पर नाम दिखे तो भ्रम होता है। तारीख सूरज की चाल से बँधी है।
शास्त्र-कथाओं में विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी कहे गए हैं — नगर, रथ, आयुध और भवन की रचना का प्रतीक। आज का अर्थ सीधा है: जो हाथ औजार पकड़ता है, जो मशीन चलाता है, जो नक्शा बनाता है, वो उसी रचना-शक्ति को प्रणाम करता है। बढ़ई की रंदा, मिस्त्री की गुनिया, ड्राइवर की स्टीयरिंग, इंजीनियर की ड्रॉइंग, फैक्ट्री की लेथ — सब एक ही श्रद्धा के घेरे में आते हैं।
संक्रांति के दिन स्नान, दान और पुण्य काल की बात पंचांगों में मिलती है। विश्वकर्मा पूजा में दान का रूप अक्सर सरल होता है — मिठाई बाँटना, कर्मचारियों को प्रसाद, औजार साफ रखकर रखना। कोई नई दक्षिणा की सूची यहाँ नहीं गढ़नी। जो आपके साधन में हो, वो काफी है।
सूर्य पर्व होने की वजह से सुबह का समय विशेष माना जाता है। अंधेरे में जल्दबाजी से पूजा खत्म करने की जरूरत नहीं, संक्रांति के बाद की खिड़की काफी चौड़ी बताई गई है। फिर भी शिफ्ट और स्कूल के समय से पहले थोड़ा इंतजाम कर लें, ताकि दोपहर तक भीड़ और शोर में आरती अधूरी न रह जाए।
मुहूर्त की खिड़कियाँ: संक्रांति, शुभ काल, अभिजित, पुण्य काल
रिपोर्टेड समय दिल्ली/आम पंचांग के हिसाब से ये हैं — इन्हें अनुमान समझें, अंतिम घड़ी अपने नगर के पंचांग की मानें।
कन्या संक्रांति: करीब 07:58 AM IST। कई जगह पूजा इसी के बाद शुरू मानी जाती है। शुभ पूजा विंडो अक्सर लगभग 07:58 AM से 12:40 PM तक लिखी जाती है। अभिजित मुहूर्त करीब 11:51 AM से 12:40 PM बताया गया है — दफ्तर या कारखाना अगर सुबह व्यस्त हो तो यही छोटी खिड़की आरती के लिए सुविधाजनक पड़ती है।
पुण्य काल की रिपोर्टें एक जैसी नहीं हैं। कुछ उल्लेख दोपहर करीब 2:22 PM या 2:31 PM तक जाते हैं। फर्क पंचांग-पद्धति और नगर के अक्षांश से आता है। इसलिए लेख में एक ही मिनट को देश भर पर थोपना गलत होगा। स्थानीय पंचांग या अपने पुरोहित से उसी सुबह एक बार पुष्टि कर लें।
रात की पूजा इस पर्व की आम चर्चा में नहीं आती। औजार धोकर रात रख दें, पूजन सुबह-दोपहर की खिड़की में करें — यही व्यावहारिक रास्ता है। अगर कोई मशीन 24 घंटे चलती है, तो शिफ्ट बदलते समय थोड़ी देर सुरक्षित रोककर फूल-रोली लगा लेना काफी परिवारों-कारखानों में देखा जाता है। नया “रात्रि मुहूर्त” गढ़ने की जरूरत नहीं।
याद रहे: मुहूर्त साधन है, डर नहीं। पाँच मिनट लेट हो गए तो श्रद्धा नहीं टूटती। साफ जगह, साफ औजार और सादा प्रसाद — ये तीन चीजें समय की स्याही से बड़ी हैं।
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**विश्वकर्मा पूजा 2026:** गुरुवार, 17 सितंबर। कन्या संक्रांति (दिल्ली/आम रिपोर्ट) करीब 07:58 AM IST। पूजा की अक्सर बताई गई खिड़की लगभग 07:58 AM–12:40 PM; अभिजित करीब 11:51 AM–12:40 PM। पुण्य काल रिपोर्टों में भिन्न (कुछ उल्लेख ~2:22/2:31 PM तक) — स्थानीय पंचांग देखें। ये सूर्य पर्व (कन्या संक्रांति) है, केवल चंद्र तिथि नहीं।
किसे और क्यों है ये दिन खास

कारीगर, मिस्त्री, सुनार, लोहार, मैकेनिक, ड्राइवर, प्रिंटर, दर्जी, राज मिस्त्री — ये नाम पारंपरिक सूची में सबसे पहले आते हैं। साथ में आज के इंजीनियर, आर्किटेक्ट, फैक्ट्री वर्कर, आईटी हार्डवेयर संभालने वाले, वर्कशॉप सुपरवाइजर भी उसी पंक्ति में खड़े होते हैं। औजार और मशीन जिसके रोजी-रोटी का आधार है, उसके लिए ये दिन धन्यवाद का दिन है।
पूजा का भाव “औजार को भगवान मानना” से ज्यादा “औजार को सम्मान देना” है। जो हथौड़ा रोज हाथ कटने से बचाता है, जो मशीन रोटी कमाती है, उसे साल में एक बार धोकर फूल चढ़ाना कृतज्ञता है। बच्चे अगर स्कूल से छुट्टी पर हों तो पिता के औजार के पास दीया देखने दें — पाठ किताबी नहीं, घर का होगा।
फैक्ट्री और वर्कशॉप में ये दिन अनुशासन भी सिखाता है। महीने भर तेल-मैल में पड़े रिंच उसी सुबह चमकते हैं। दुर्घटना कम हों, काम सुचारु रहे — यही मंगलकामना आरती में छिपी रहती है। कोई चिकित्सा या कानूनी दावा इससे नहीं बँधता; ये आस्था और साफ-सुथरे काम की याद है।
गाड़ियों की पूजा भी कई परिवारों में इसी दिन दिखती है — बोनट पर फूल, स्टीयरिंग पर मौली। नया नियम नहीं गढ़िए; जो आपके इलाके में सालों से चलता है, वही निभाइए। पड़ोसी राज्य की कोई रीत नकल में थोपना जरूरी नहीं।
पूजा की सादी सामग्री
बड़े बाजार से थाली भरने की जरूरत नहीं। साफ पानी, गंगाजल हो तो थोड़ा, फूल (गेंदा आम है), रोली, हल्दी, अक्षत (चावल), धूप या अगरबत्ती, दीया-तेल या घी, मौली, मिठाई या फल का प्रसाद। कुछ घर में गुड़-चना या हलवा बनाते हैं। जो बने, वो चढ़ाएँ।
औजार और मशीन पहले पोंछ लें। तेल-ग्रीस पूजा के फूल से नहीं मिलने चाहिए। लैपटॉप, प्रिंटर, सिलाई मशीन, स्कूटर — सबको सूखे कपड़े से पोछना काफी है। बिजली के उपकरण पर पानी न डालें; श्रद्धा सुरक्षा के खिलाफ नहीं जाती।
कपड़ा साफ हो, जगह झाड़ दें, एक छोटा आसन या लाल/पीला कपड़ा औजार के नीचे बिछा दें — कई घरों की आदत है, अनिवार्य शास्त्र-सूची नहीं। मूर्ति हो तो विश्वकर्मा जी की तस्वीर या कैलेंडर भी सामने रख सकते हैं। मूर्ति न हो तो औजार ही केंद्र हैं।
मंत्र के नाम पर आम प्रचलित जाप काफी है: ॐ विश्वकर्मणे नमः। इसी के आसपास सरल नमन चलते हैं। कोई नया, लंबा या “खास सिद्ध” मंत्र यहाँ नहीं लिखा जाएगा। जो आपके पुरोहित या परिवार ने सिखाया है, वही दोहराएँ। गलत उच्चारण के डर से पूजा मत छोड़िए; भाव सीधा रखिए।
पूजा विधि: घर, वर्कशॉप और कारखाने में चरणबद्ध
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान या मशीन शेड झाड़-पोंछ कर लें। औजार एक जगह सजाएँ — हथौड़ा, रंदा, कैलीपर, लैपटॉप, चाभी गुच्छा, जो भी आपके काम के स्तंभ हैं।
दीया जलाएँ। रोली-हल्दी-अक्षत से तिलक औजार पर और अपने माथे पर लगाएँ। फूल चढ़ाएँ। ॐ विश्वकर्मणे नमः का जाप मन से करें, जितनी साँस शांत हो उतनी बार। आरती का एक छोटा दीया घुमा लें। प्रसाद धरें, फिर परिवार या साथियों में बाँटें।
वर्कशॉप में मालिक और कारीगर एक साथ खड़े हों तो अच्छा लगता है। पाँच मिनट शांति, फोन साइड में। मशीन अगर बंद करनी हो तो लॉकआउट का ध्यान रखें — पूजा के नाम पर लापरवाही नहीं। बड़ी फैक्ट्री में शिफ्ट-वाइज छोटी आरती हो सकती है, ताकि उत्पादन पूरी तरह न टूटे और श्रद्धा भी रह जाए।
गाड़ियों पर फूल-मौली बाँधने वाले परिवार बोनट साफ कर दीया दूर सुरक्षित जगह रखें; इंजन गर्म हो तो फूल प्लास्टिक पर न पिघले। बच्चे दीया के पास अकेले न छोड़ें।
विधि का अंत प्रणाम और क्षमा-याचना से करें — जो कमी रह गई, वो माफ हो। फिर औजार वापस औजार बन जाते हैं, काम शुरू होता है। पूजा के बाद औजार को “छूना मना” जैसी कोई सार्वभौम पाबंदी यहाँ नहीं थोपनी; अपने घर की पुरानी आदत हो तो निभाएँ, नई कड़ी मत गढ़ें।
कारखाना, गैराज और दफ्तर: काम के बीच श्रद्धा
औद्योगिक इलाकों में विश्वकर्मा पूजा का नजारा अलग होता है। गेट पर तोरण, शेड में माला, कैंटीन में प्रसाद। इंजीनियर ड्राइंग टेबल पर फूल रखता है, वेल्डर अपनी टोपी उतारकर दो मिनट खड़ा रहता है। ये दृश्य नाटक नहीं, साल भर की थकान का नमस्कार है।
शिफ्ट वाले साथी रात की ड्यूटी से सुबह उतरें तो पूजा उनकी नींद काटने के लिए नहीं है। अभिजित की छोटी खिड़की उनके लिए बनी है। सुपरवाइजर अगर समय की चिट्ठी पहले दिन लगा दें, तो भगदड़ नहीं होती।
दफ्तर में कंप्यूटर और प्रिंटर भी औजार हैं। स्क्रीन पर पानी नहीं, एक फूल और रोली का टीका काफी है। टीम हो तो पाँच लोगों का छोटा चक्र, एक प्रसाद डिब्बा — दिखावे की मंडप नहीं चाहिए।
याद रखने लायक बात: ये पर्व औजार को चलाने वाले का है, केवल मालिक का नहीं। प्रसाद पहले उस हाथ तक जाए जो रोज ग्रीस साफ करता है। श्रद्धा का नाप माला की कीमत से नहीं, हिस्सेदारी से लगता है।
FAQ
विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?
गुरुवार, 17 सितंबर 2026। कन्या संक्रांति दिल्ली/आम रिपोर्टों में करीब सुबह 07:58 IST बताई गई है।
पूजा का शुभ समय क्या है?
अक्सर लगभग 07:58 AM से 12:40 PM की खिड़की लिखी जाती है। अभिजित करीब 11:51 AM–12:40 PM। पुण्य काल रिपोर्टें भिन्न हैं — स्थानीय पंचांग देखें।
ये तिथि का त्यौहार है या संक्रांति का?
आम समझ में ये सूर्य पर्व है, कन्या संक्रांति से जुड़ा। केवल चंद्र तिथि पर निर्भर त्यौहार की तरह न देखें।
कौन पूजा करे?
कारीगर, मिस्त्री, इंजीनियर, फैक्ट्री वर्कर, ड्राइवर — औजार-मशीन-वाहन से रोजी चलाने वाले परिवार। घर में सादी विधि काफी है।
कौन-सा मंत्र बोला जाए?
आम प्रचलित नमन: ॐ विश्वकर्मणे नमः। नया या गढ़ा हुआ मंत्र जरूरी नहीं। परिवार की पुरानी पंक्ति हो तो वही ठीक है।
डिस्क्लेमर: मुहूर्त नगर और पंचांग के हिसाब से बदल सकते हैं। लेख सामान्य श्रद्धा-जानकारी है, किसी क्षेत्र की अनोखी रीत या चिकित्सा-कानूनी सलाह नहीं।
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डिस्क्लेमर: मुहूर्त स्थानीय पंचांग से मिलाएँ।