कुणबी सर्टिफिकेट महाराष्ट्र में OBC कोटे की चाबी बन गया है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। कुणबी राज्य की OBC लिस्ट में पहले से है। मनोज जरांगे पाटिल कह रहे हैं कि पुराने गजट से मराठा परिवार कुणबी वंशावली साबित करें, और उसी कोटे में फॉर्म भरें। लक्ष्मण हाके कह रहे हैं कि नए सर्टिफिकेट से OBC की सीट घटेगी। 22,20,577 उनका दावा है। सरकारी टेबल नहीं। कागज हाथ में होना अपॉइंटमेंट लेटर नहीं है।
यह 3 अक्टूबर 2026 की स्थिति है। तीन महीने की मोहलत 17 सितंबर से गिनी गई। दिसंबर से पहले जीत या हार मत लिखो।
सर्टिफिकेट बनता कैसे है
गजट तीन बताए गए हैं। हैदराबाद, सतारा और औंध। जरांगे चाहते हैं कि इन रिकॉर्ड से कुणबी लिखा दिखे, तो तहसील सर्टिफिकेट दे। 17 सितंबर 2026 को उन्होंने 20 दिन का अनशन खत्म किया। बीड के पाटोदा में राधाकृष्ण विखे पाटिल की मुलाकात के बाद। सरकार को तीन महीने दिए। कहा कि एक भी कुणबी रिकॉर्ड न छूटे, इस बात पर चीफ मिनिस्टर का साइन चाहिए। वह साइन किया पेपर इन खबरों में जारी ऑर्डर नहीं दिखा।
अगस्त 2026 में जरांगे ने कहा कि सर्टिफिकेट जारी भी हुए और रद्द भी। द हिंदू ने कुछ रद्दी की वजह लिखी। पिता के खून के रिश्तेदार कुणबी हैं, इसका कागज नहीं बना। नामों में ज्योति शिंदे, वर्षा गायकवाड़, कोमल परवे और रेखा सरोदे आए। ये केस हैं। पूरी कम्युनिटी का रद्द होना नहीं।

58 लाख और 22 लाख
द हिंदू ने 58 लाख एंट्री की legality का झगड़ा लिखा। जरांगे का प्रस्ताव था कि ये रिकॉर्ड ग्राम पंचायत पर दिखें। 58 लाख सरकारी टेबल के रूप में इस लेख में नहीं है। हाके का 22,20,577 सर्टिफिकेट वाला नंबर भी उनका दावा है। आधिकारिक तालिका नहीं मिली। राष्ट्रीय OBC महासंघ ने उनके मुंबई मार्च का साथ नहीं दिया, यह पहले की रिपोर्टों में था। OBC पक्ष एक सुर में नहीं है। एक मोर्चा मत लिखो।
2025 के गवर्नमेंट रेजोल्यूशन की बात द हिंदू ने लिखी। कुणबी वंशावली वाले मराठा को पढ़ाई और नौकरी में कोटा देने की लाइन थी। कुणबी पहले से OBC है। नया नाम उसी पूल में आना अलग कोटा नहीं है। सीट कटऑफ और पद से मिलती है। कागज अकेला सीट नहीं देता।
क्या करो
सर्टिफिकेट हाथ में हो, तो नकल रखो। नया बनवाना हो, तो तहसील या जिले का पोर्टल पढ़ो। सोशल मीडिया का फॉर्म मत भरना। पैसे माँगने वाला लिंक फ्रॉड हो सकता है। फडणवीस कह चुके हैं कि माँग संविधान और मौजूदा नियम के अंदर देखी जाएगी। नियम के अंदर देखना कोटा दे देना नहीं है।
29 सितंबर को जरांगे ने धैर्य रखने और 15 दिन बाद रास्ता बताने की बात कही। तीन महीने का समय अभी चल रहा है। अनशन फिर शुरू होगा, यह उनकी चेतावनी है। चेतावनी ऑर्डर नहीं।
यह कॉलम वाली खबर नहीं
देश में OBC का अलग कॉलम जनगणना फॉर्म की माँग है। कुणबी सर्टिफिकेट एक परिवार का कागज है। कॉलम जुड़ने से तहसील का कागज नहीं बनेगा। मध्य प्रदेश की 27 परसेंट होल्ड भर्ती अलग है। बंगाल का सर्टिफिकेट केस अलग विंडो है। खूंटी का धरना कॉलम का लोकल प्रोग्राम है।
इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। मराठा और OBC का झगड़ा, जनगणना का अलग कॉलम और रिजर्वेशन कितना परसेंट।
जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। अनशन 20 दिन, खत्म 17 सितंबर। तीन महीने। तीन गजट। 58 लाख रिकॉर्ड का झगड़ा। 22,20,577 हाके का दावा। भीड़ का नंबर नहीं।
रोल नंबर वाला अभ्यर्थी सर्टिफिकेट को रिजल्ट न समझे। रिजल्ट भर्ती पोर्टल पर है। नाम OBC लिस्ट में है या नहीं, स्टेट लिस्ट से मिलाओ। क्रीमी लेयर का 8 लाख अलग कागज है। गजट का पन्ना अकेला सर्टिफिकेट नहीं बनता। तहसील का नियम पढ़ो।
कागज और सीट का फर्क
मान लो दादा के गजट में कुणबी लिखा है। तहसील सर्टिफिकेट दे दे, तो परिवार OBC कोटे की भर्ती में फॉर्म भर सकता है। सीट तब है, जब पद और कटऑफ हों। कागज फॉर्म खोलता है। लेटर नहीं देता। रद्द सर्टिफिकेट वाला केस उलटा है। कागज बना, फिर पिता की तरफ का रिकॉर्ड नहीं मिला, तो रद्द हुआ। इसलिए नकल रखो, और रद्दी का कारण पूछो।
OBC तरफ का डर पूल का है। कोटा एक पूल है। नए नाम उसी पूल में आए, तो पुराने नामों की सीट कम दिख सकती है। हाके यही कह रहे हैं। 22,20,577 उनका आंकड़ा है। डिपार्टमेंट की लिस्ट नहीं। जब तक लिस्ट न छपे, नंबर फॉरवर्ड है। महासंघ ने मुंबई मार्च का साथ नहीं दिया, इसलिए हर OBC नेता हाके की लाइन पर नहीं है।
तीन महीने दिसंबर के आसपास खुलते हैं। कोल्हापुर और सतारा गजट पर एडवोकेट जनरल की राय का समय मंत्री ने तीन-चार महीने बताया। राय आना कोटा लागू होना नहीं। लिखित वादे का पेपर इन खबरों में जारी ऑर्डर नहीं बना। सोशल मीडिया पर «कोटा मिल गया» लिखा हो, तो तहसील पोर्टल खोलो। पोर्टल पर नाम नहीं है, तो कोटा नहीं मिला।
पुराना मराठा कोटा और यह कुणबी रास्ता एक नहीं। पुराना अलग कोटा कोर्ट में अटका रहा है। यह पेज OBC लिस्ट के अंदर के कागज की बात है। दोनों को एक वाक्य में मत मिलाओ। ग्रुप में फीस का रेट आए, तो पैसे मत भेजो।
कागज की फोटो संभालकर रखो। रद्दी का नोटिस आए, तो कारण लिखा हो तभी मानो। कारण नहीं है, तो तहसील से पूछो। व्हाट्सऐप पर रद्द लिखा हो, पोर्टल पर नाम हो, तो पोर्टल मानो।
जनगणना का कॉलम इस कागज को नहीं बनाता। कागज जिले से बनता है।
तीन गजट के नाम याद रखो, हैदराबाद, सतारा, औंध। चौथा नाम फॉरवर्ड से मत जोड़ो।
एडवाइस:
सीधी बात यह है। कुणबी सर्टिफिकेट जाति का कागज है, नौकरी का लेटर नहीं। जरांगे वंशावली से OBC कोटा माँग रहे हैं। हाके कह रहे हैं सीट घटेगी। 22 लाख सरकारी टेबल नहीं है। 17 सितंबर को अनशन खत्म हुआ, तीन महीने का समय है। कागज की नकल रखो। नया फॉर्म तहसील के पोर्टल से भरो। सोशल मीडिया का फॉर्म और पेमेंट लिंक मत खोलो। दिसंबर से पहले जीत या हार मत लिखो।