मराठा और OBC का झगड़ा क्या है

मराठा और OBC का झगड़ा क्या है

मराठा और OBC का झगड़ा महाराष्ट्र में कुणबी सर्टिफिकेट पर है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। कुणबी महाराष्ट्र की OBC लिस्ट में पहले से है। मनोज जरांगे पाटिल मराठा परिवारों को कुणबी वंशावली के आधार पर उसी कोटे में जगह माँग रहे हैं। OBC वाले कह रहे हैं कि नए सर्टिफिकेट से उनका हिस्सा घटेगा। दोनों बातें दावा हैं। कोर्ट का अंतिम फैसला अलग है।

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यह 3 अक्टूबर 2026 की स्थिति है। डेट और बयान अखबारों में छपे हैं। सर्टिफिकेट बनना अपॉइंटमेंट लेटर नहीं है।

जरांगे क्या माँग रहे हैं

17 सितंबर 2026 को जरांगे ने 20 दिन का अनशन खत्म किया। डेक्कन हेरल्ड ने लिखा कि यह उनके तीन साल के अनशनों में सबसे लंबा था। बीड के पाटोदा में जलसंसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के डेलिगेशन से मुलाकात के बाद अनशन टूटा। जरांगे ने सरकार को तीन महीने दिए। कहा कि वादे पूरे नहीं हुए तो अनशन फिर शुरू होगा। तीन महीने का हिसाब दिसंबर के आसपास खुलेगा।

उनकी माँग पुराने गजट की पहचान की है। हैदराबाद गजट, सतारा गजट और औंध गजट। इन्हीं रिकॉर्ड से मराठा परिवार कुणबी वंशावली दिखाकर OBC कोटे का फायदा माँग रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर ऐसा पेपर साइन करें, जिसमें एक भी कुणबी रिकॉर्ड न छूटे। कोल्हापुर और सतारा गजट पर एडवोकेट जनरल की राय का समय मंत्री ने तीन-चार महीने बताया।

मराठा बनाम OBC का डाटा पोस्टर। कुणबी, अनशन, गजट।
17 सितंबर को अनशन खत्म। माँग कुणबी वंशावली से OBC कोटा।

सर्टिफिकेट और रिजर्वेशन एक चीज नहीं

कुणबी सर्टिफिकेट जाति का कागज है। रिजर्वेशन नौकरी और कॉलेज में दिया गया हिस्सा है। कागज मिलने से सीट अपने आप नहीं मिलती। सीट उस भर्ती के नोटिस और कटऑफ से मिलती है। 2025 के गवर्नमेंट रेजोल्यूशन की बात द हिंदू ने लिखी। उस रास्ते पर कुणबी वंशावली वाले मराठा को पढ़ाई और नौकरी में कोटा देने की बात थी। कुणबी पहले से OBC है, इसलिए नया नाम OBC लिस्ट में घुसना OBC वाले हिस्से के अंदर की लड़ाई है। अलग कोटा बनाने का फैसला नहीं।

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अगस्त 2026 में जरांगे ने कहा कि सरकार ने सर्टिफिकेट जारी भी किए और रद्द भी। द हिंदू ने कुछ रद्द सर्टिफिकेट की वजह लिखी। पिता के खून के रिश्तेदार कुणबी हैं, इसका कागज नहीं बना। नामों में ज्योति शिंदे, वर्षा गायकवाड़, कोमल परवे और रेखा सरोदे आए। यह केस हैं। पूरी कम्युनिटी का रद्द होना नहीं।

58 लाख और 22 लाख

द हिंदू ने लिखा कि झगड़ा अब 58 लाख एंट्री की legality और उसके मतलब पर है। जरांगे का 12 पॉइंट प्रस्ताव था। 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड ग्राम पंचायत पर दिखें, सर्टिफिकेट न देने वाले अफसर पर कार्रवाई हो, सतारा, औंध और हैदराबाद गजट लागू हों। 58 लाख सरकारी टेबल के रूप में इस लेख में नहीं है। रिकॉर्ड का झगड़ा है।

लक्ष्मण हाके OBC तरफ से कह रहे हैं कि सर्टिफिकेट से OBC हिस्सा घटेगा। 22,20,577 सर्टिफिकेट उनका दावा है। आधिकारिक तालिका इन रिपोर्टों में नहीं मिली। OBC पक्ष एक सुर में भी नहीं है। राष्ट्रीय OBC महासंघ ने उनके मुंबई मार्च का साथ नहीं दिया, यह पहले की रिपोर्टों में था। दावा दावा है। हिस्सा घट गया, यह फैसला नहीं।

29 सितंबर को क्या कहा

न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने 29 सितंबर की बात छापी। अस्पताल से छुट्टी के बाद जरांगे ने मराठा समाज से धैर्य रखने को कहा। 15 दिन बाद अगला रास्ता बताने की बात कही। बड़ी लड़ाई की तैयारी का वाक्य था। यह बयान है। तीन महीने का वादे वाला समय अभी चल रहा है।

फडणवीस पहले कह चुके हैं कि माँग संविधान और मौजूदा नियम के अंदर देखी जाएगी। नियम के अंदर देखना कोटा दे देना नहीं है। लिखित वादे का पेपर, जिस पर चीफ मिनिस्टर के साइन की माँग थी, इन खबरों में जारी ऑर्डर के रूप में नहीं दिखा।

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यह जनगणना वाले कॉलम की खबर नहीं

देश में OBC का अलग कॉलम जनगणना फॉर्म की माँग है। महाराष्ट्र का यह झगड़ा सर्टिफिकेट और कोटे की सीट का है। कॉलम जुड़ने से कुणबी कागज नहीं बनेगा। मध्य प्रदेश की 27 परसेंट होल्ड भर्ती भी दूसरी खबर है। वहाँ पत्र डिपार्टमेंट के ऑर्डर पर आता है।

इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। कुणबी सर्टिफिकेट, जनगणना का अलग कॉलम और मध्य प्रदेश का 27 परसेंट।

जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। अनशन 20 दिन, खत्म 17 सितंबर 2026। समय तीन महीने। गजट तीन, हैदराबाद, सतारा, औंध। 58 लाख रिकॉर्ड का झगड़ा। 22,20,577 हाके का दावा। भीड़ का नंबर नहीं है।

उदाहरण से समझो

मान लो एक परिवार मराठा है। दादा के पुराने कागज में कुणबी लिखा है। जरांगे कह रहे हैं कि यह रिकॉर्ड गजट से मिलाओ, और सर्टिफिकेट दो। सर्टिफिकेट मिला, तो वह परिवार OBC कोटे की भर्ती में फॉर्म भर सकता है। सीट तब मिलेगी, जब कटऑफ और पद हों। कागज अकेला लेटर नहीं है।

OBC तरफ का डर यह है। कोटा एक पूल है। नए नाम उसी पूल में आए, तो पुराने नामों की सीट कम दिख सकती है। हाके यही कह रहे हैं। 22,20,577 उनका आंकड़ा है। डिपार्टमेंट की लिस्ट नहीं। जब तक लिस्ट न छपे, यह नंबर फॉरवर्ड है।

जनगणना वाला कॉलम यहाँ काम नहीं करता। कॉलम आबादी गिनता है। कुणबी सर्टिफिकेट एक परिवार का कागज है। देश वाले मार्च से महाराष्ट्र का सर्टिफिकेट नहीं निकलेगा। अपना कागज अपने जिले से देखो।

एक और फर्क। मराठा आरक्षण का पुराना अलग कोटा कोर्ट में अटका रहा है। यह पेज उस अलग कोटे का फैसला नहीं है। यह पेज कुणबी रास्ते की माँग है, जो OBC लिस्ट के अंदर है। दोनों को एक वाक्य में मत मिलाओ।

नाम लिस्ट में है या नहीं, यह स्टेट की OBC लिस्ट से मिलाओ, किसी फॉरवर्ड से नहीं।

एडवाइस:

सीधी बात यह है। मराठा और OBC का झगड़ा कुणबी सर्टिफिकेट पर है। जरांगे वंशावली से OBC कोटा माँग रहे हैं। OBC वाले कह रहे हैं कि हिस्सा घटेगा। 17 सितंबर को अनशन खत्म हुआ, सरकार को तीन महीने मिले। सर्टिफिकेट जाति का कागज है, नौकरी का लेटर नहीं। 58 लाख और 22,20,577 को सरकारी टेबल न मानो, जब तक डिपार्टमेंट की लिस्ट न दिखे। अपना कागज तहसील या जिले के सर्टिफिकेट पोर्टल से मिलाओ। व्हाट्सऐप पर «कोटा मिल गया» लिखा हो, तो उसे ऑर्डर न मानो।

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Vivek Hardaha Written by: Writer, YouTuber and tool builder · Madhya Pradesh

Vivek has been online since 2012 and has worked since 2014 across YouTube, blogs and news platforms. He holds an M.Sc. in Computer Science and an M.A. in Sociology. On Vista Hub he writes practical, plain-language guides on tech, money, health, farming and festivals.

कैसे बना: ड्राफ्ट में AI की मदद ली गई; स्रोत, आँकड़े और भाषा विवेक हरदहा ने जाँचे। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

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