संपादकीय चित्रण है, घटना की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026 सुबह की।
8 अक्टूबर को कौन निकलेगा, यह सर्च 2 अक्टूबर की रात से चल रहा है। समाजवादी पार्टी ने 2 से 8 अक्टूबर को लोकतंत्र बचाओ सप्ताह कहा। इटावा और औरैया में वोट बचाओ मार्च की खबर छपी। दीपके ने गोवा, कर्नाटक, बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का नाम लिया। स्टालिन ने SIR पर चुप्पी को लेकर विजय पर निशाना साधा, यह तमिलनाडु वाला सर्च अलग है।
क्या तय है
तय मांग इस्तीफा और SIR पर सवाल है। तय भीड़ नहीं है। 2 अक्टूबर को दिल्ली में हिरासत हुई, मुंबई में शिवाजी पार्क भरा। 8 अक्टूबर स्थानीय मार्च है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर 2.0 का अल्टीमेटम है। तीन तारीखें मिलाकर एक भीड़ न गिनें। राष्ट्रीय लेख यहां है: 2 से 8 अक्टूबर मार्च। 10 अक्टूबर यहां: जंतर-मंतर 2.0।
स्टालिन और विजय
तमिलनाडु में SIR पर डीएमके और टीवीके के बीच चुप्पी का आरोप सर्च बन गया। यह दिल्ली की हिरासत से अलग घटना है। नाम एक होने से मुद्दा एक न समझें।
एडवाइस:
8 अक्टूबर की भीड़ का आंकड़ा शाम को पुलिस या आयोजक दोनों से मिलाकर पढ़ें। सुबह का पोस्टर अनुमान है।
और पढ़ें: दीपके कौन हैं।
टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी
15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।
8 अक्टूबर को कौन निकलेगा: सपा मार्च, 6 राज्य और स्टालिन-विजय पर दोनों पक्ष
सपा ने 2 से 8 अक्टूबर को सप्ताह कहा, इटावा-औरैया में मार्च की खबर है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
दीपके ने छह राज्यों का नाम लिया, भीड़ का आंकड़ा तय नहीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
10 अक्टूबर अलग अल्टीमेटम है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
स्टालिन-विजय तमिलनाडु का सर्च है, दिल्ली की हिरासत नहीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आगे कौन सा सर्च फूटेगा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।
पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।