OBC क्रीमी लेयर की इनकम लिमिट 8 लाख रुपये सालाना है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है। 13 सितंबर 2017 को कार्मिक विभाग ने इसे 6 लाख से 8 लाख किया। इससे ऊपर की इनकम वाले परिवार के बच्चे केंद्र के 27 परसेंट OBC रिजर्वेशन से बाहर माने जाते हैं। मार्च 2026 में सरकार ने लिखा कि अभी और बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है। 15 लाख की बात माँग है। ऑर्डर नहीं।
यह 3 अक्टूबर 2026 की स्थिति है। लिमिट इनकम की है। जनगणना का आबादी वाला नंबर नहीं। नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट स्टेट से बनता है।
8 लाख है क्या
क्रीमी लेयर वह OBC परिवार है, जिसे इस रिजर्वेशन से बाहर रखा जाता है। नाम OBC लिस्ट में हो सकता है। फिर भी बच्चे को 27 परसेंट नहीं मिलता, अगर परिवार क्रीमी लेयर में आ गया हो। टेलीग्राफ ने 15 मार्च 2026 को बी एल वर्मा का लिखित जवाब छापा। वे सोशल जस्टिस के राज्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा, आखिरी ऑर्डर 13 सितंबर 2017 का है, 6 लाख से 8 लाख। अभी आगे रिवीजन का प्रस्ताव नहीं है।
10 मार्च 2026 को राज्यसभा में भाजपा सांसद भीम सिंह ने जीरो ऑवर में 15 लाख की माँग की। कहा कि तीन साल में एक बार रिवीजन होना चाहिए, नौ साल से अटका है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अक्टूबर 2015 में 6 लाख से 15 लाख की सिफारिश कर चुका था। सिफारिश और सांसद की माँग ऑर्डर नहीं बनीं। ऑर्डर 8 लाख पर है।

सैलरी अकेले तय नहीं करती
लोग सैलरी स्लिप को ही लिमिट समझ लेते हैं। नियम इतना सीधा नहीं है। DoPT के रास्ते में सैलरी और खेती की इनकम को इनकम टेस्ट से अलग रखा गया है। दूसरी इनकम गिनी जाती है। पोस्ट भी देखी जाती है। माँ या पिता ग्रुप A अधिकारी हों, तो क्रीमी लेयर पोस्ट से लग सकती है, सैलरी के नंबर से अलग।
11 मार्च 2026 के सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर की रिपोर्टों में यही लाइन है। केस यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन बताया गया। बेंच जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आर महादेवन की थी। रिपोर्ट कहती है कि सैलरी अकेले क्रीमी लेयर तय नहीं कर सकती। 1993 के ऑर्डर की तरह माता-पिता की पोस्ट का दर्जा पहले देखना है। ग्रुप A और B एक तरफ, ग्रुप C और D दूसरी तरफ। यह रिपोर्ट है। अपना केस अपने सर्टिफिकेट फॉर्म पर चलेगा।
तीन साल का हिसाब
सर्टिफिकेट बनाते समय तीन पिछले फाइनेंशियल ईयर देखे जाते हैं। एक साल भी लिमिट के ऊपर गया, तो नॉन क्रीमी लेयर नहीं मिलता, यह फॉर्म की आम लाइन है। मान लो तीन साल की दूसरी इनकम 7.2, 8.5 और 7.9 लाख है। बीच वाला साल 8 लाख के पार है। उसी साल की वजह से सर्टिफिकेट अटक सकता है। यह उदाहरण है। फैसला तहसील का फॉर्म देखकर होगा।
सर्टिफिकेट स्टेट जारी करती है। सेंट्रल जॉब में सेंट्रल OBC लिस्ट भी देखनी होती है। स्टेट लिस्ट पर नाम है, सेंट्रल लिस्ट पर नहीं, तो SSC या UPSC का 27 नहीं मिलता। दोनों लिस्ट मिलाओ।
यह 27 परसेंट नहीं बदलता
8 लाख कोटा नहीं है। 8 लाख लिमिट है, कि कौन 27 के अंदर आए। केंद्र में OBC रिजर्वेशन 27 परसेंट है। क्रीमी लेयर उसके बाहर है। EWS का 10 परसेंट OBC नहीं है। 8 और 27 जोड़कर कोई नया परसेंट नहीं बनता। मध्य प्रदेश की 87:13 होल्ड भर्ती अलग खबर है। वहाँ पत्र डिपार्टमेंट के ऑर्डर पर आता है।
जनगणना का अलग कॉलम भी अलग माँग है। कॉलम आबादी गिनता है। क्रीमी लेयर एक परिवार की इनकम और पोस्ट देखती है। कॉलम जुड़ने से 8 लाख अपने आप 15 लाख नहीं हो जाएगा। 6 अक्टूबर का जाम और 1 नवंबर का चलो दिल्ली कॉलम की माँग हैं। लिमिट बदलने का ऑर्डर नहीं।
उदाहरण से समझो
एक परिवार OBC लिस्ट में है। पिता प्राइवेट जॉब में हैं। सैलरी स्लिप 9 लाख दिखाती है, पर नियम सैलरी को इनकम टेस्ट से बाहर रखता है। दुकान या किराए की इनकम 3 लाख है। इस केस में स्लिप पार है, गिनी जाने वाली इनकम पार नहीं। उलटा केस भी है। सैलरी 5 लाख है, दुकान 9 लाख है। तब इनकम टेस्ट पार हो सकता है। तीसरा केस पोस्ट का है। पिता ग्रुप A हैं। तब नंबर से पहले पोस्ट देखी जाती है। तीनों में सर्टिफिकेट अपने आप नहीं बनता।
इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। रिजर्वेशन कितना परसेंट, जनगणना का अलग कॉलम और मध्य प्रदेश का 27।
जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। 8 लाख, 13 सितंबर 2017, उससे पहले 6 लाख। मार्च 2026 में प्रस्ताव नहीं। 15 लाख माँग और 2015 की सिफारिश। आबादी का परसेंट इस पेज पर नहीं है।
पुराना सर्टिफिकेट नए फॉर्म पर अपने आप नहीं चलता। जिस साल फॉर्म भर रहे हो, उसी साल का नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट देखो। वैलिडिटी फॉर्म पर लिखी होती है।
सर्टिफिकेट कहाँ से बनता है
नॉन क्रीमी लेयर का कागज तहसील या राज्य के राजस्व दफ्तर से बनता है। ऑनलाइन पोर्टल कई राज्यों में है। कागज पर इनकम और पोस्ट दोनों के कॉलम होते हैं। सेंट्रल एग्जाम में यह कागज काफी नहीं। सेंट्रल OBC लिस्ट पर जाति हो, यह अलग चेक है। स्टेट जॉब स्टेट लिस्ट देखती है। एक कागज दोनों लिस्ट नहीं खोलता।
फॉरवर्ड अक्सर 8 लाख को EWS की लिमिट से मिला देता है। EWS का 8 लाख अलग नियम है, सामान्य वर्ग के लिए। OBC की क्रीमी लेयर भी 8 लाख पढ़ी जाती है, पर सैलरी और खेती का हिसाब अलग है। दोनों फॉर्म एक नहीं हैं। EWS सर्टिफिकेट OBC के 27 परसेंट में काम नहीं करता।
एडवाइस:
सीधी बात यह है। OBC क्रीमी लेयर की लिमिट 8 लाख सालाना है। 2017 में 6 से 8 हुई। मार्च 2026 में सरकार ने कहा, आगे बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है। 15 लाख माँग है, ऑर्डर नहीं। सैलरी अकेले तय नहीं करती। पोस्ट भी देखी जाती है। नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट स्टेट से बनता है। सेंट्रल जॉब में सेंट्रल लिस्ट भी मिलाओ। व्हाट्सऐप पर «लिमिट 15 लाख हो गई» लिखा हो, तो उसे DoPT का ऑर्डर न मानो। यह लिमिट अपॉइंटमेंट लेटर नहीं है।