संपादकीय चित्रण है, घटना की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026 सुबह की।
जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट फ्रीज कर दो, यह कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष की मांग है। 3 अक्टूबर 2026 तक ऐसी कोई अधिसूचना नहीं आई कि पूरी देश की सूची जनवरी 2025 पर रोक दी गई हो। मांग और आदेश में फर्क है।
मांग क्यों है
प्रदर्शनकारी कहते हैं SIR के बाद की सूची छेड़ी गई है, इसलिए पिछले साल जनवरी वाली सूची वापस लाओ और उसी पर आगे बढ़ो। दीपके ने 2025 की सूची फ्रीज करने की बात कही थी। राहुल और ममता भी प्री-SIR रोल की बात कर चुके हैं। आयोग कहता है सूची जीवित दस्तावेज है। मृत और डुप्लिकेट हटेंगे, पात्र नाम जुड़ेंगे। 2 अक्टूबर का विशेष अभियान इसी जोड़ने की तरफ है।
फ्रीज हुआ क्या
चुनाव से पहले सूची एक तारीख पर प्रकाशित होती है और नामांकन के आसपास बंद होती है। वह सामान्य फ्रीज है। जनवरी 2025 को पूरे देश की मतदाता सूची हमेशा के लिए रोकने का आदेश सार्वजनिक नहीं है। जो पोस्ट कहे कि लिस्ट फ्रीज हो गई, वह मांग को आदेश बता रही है।
नाम जोड़ने का रास्ता यहां है: फॉर्म 6।
एडवाइस:
फ्रीज शब्द तभी लिखें जब चुनाव आयोग का आदेश नंबर साथ हो। नहीं तो लिखें कि यह CJP की मांग है।
टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी
15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।
जनवरी 2025 वोटर लिस्ट फ्रीज हुई या नहीं? CJP की मांग का सच पर दोनों पक्ष
फ्रीज CJP की मांग है, अधिसूचना नहीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
चुनाव से पहले की सामान्य क्लोजर अलग चीज है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
प्री-SIR रोल की बात राहुल और ममता भी कर चुके हैं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
नाम व्यक्तिगत फॉर्म 6 से जुड़ता है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आगे कौन सा सर्च फूटेगा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।
पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।