मध्य प्रदेश OBC रिजर्वेशन 50 परसेंट पार करता है क्या

मध्य प्रदेश OBC रिजर्वेशन 50 परसेंट पार करता है क्या

मध्य प्रदेश में OBC को 27 परसेंट मान लो, तो कागजी जोड़ 50 परसेंट की सामान्य लिमिट पार कर जाता है। SC 16 है, ST 20 है। 16 और 20 में 27 जोड़ो, तो 63। EWS का 10 और जोड़ो, तो 73। यह जोड़ है। फैसला नहीं। इंदिरा साहनी, 1992, ने सामान्य लिमिट 50 रखी थी, और असाधारण हालत का एक संकरा दरवाजा भी छोड़ा था। मध्य प्रदेश का केस उसी दरवाजे पर अटका है। OBC का मतलब अन्य पिछड़ा वर्ग है।

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51 परसेंट हलफनामा है, जनगणना की टेबल नहीं। 73 को जजमेंट मत लिखो।

जोड़ कैसे बना

2019 में राज्य ने OBC कोटा 14 से 27 किया। पुराना 14 लिमिट के अंदर की बात थी। 27 करने पर कुल रिजर्वेशन 50 के पार चला गया। राज्य ने हलफनामे में आबादी का दावा रखा। 51 परसेंट उसी हलफनामे का आंकड़ा है। जनगणना में OBC का अलग कॉलम नहीं है, इसलिए आबादी का फाइनल नंबर नहीं है। कॉलम जुड़ने से यह केस अपने आप नहीं निपटेगा।

EWS का 10 OBC नहीं है। 63 और 73 दो जोड़ हैं। 63 SC, ST और OBC 27 का है। 73 में EWS जुड़ा है। कोर्ट ने 73 को कुल रिजर्वेशन का फैसला नहीं लिखा। जोड़ कागज पर है।

50 परसेंट लिमिट का डाटा पोस्टर। 63 और 73 जोड़।
73 जोड़ है, फैसला नहीं। 51 हलफनामा है।

50 का दरवाजा

इंदिरा साहनी की सामान्य लिमिट 50 है। ऊपर जाने के लिए खास हालात दिखाने होते हैं। राज्य कहता है हालात हैं। याचिका कहती है लिमिट टूटी है। 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केस हाईकोर्ट को वापस भेजा। 6 अगस्त 2026 को दैनिक भास्कर ने फैसला रिजर्व लिखा। रिजर्व जीत या हार नहीं। ऑर्डर नहीं छपा। रिजर्व को 73 लागू मत लिखो।

भर्ती 87:13 पर है। 87 परसेंट पद आगे, 13 अतिरिक्त कोटा होल्ड। सर्कुलर 29 सितंबर 2022 का बताया गया। लिमिट का केस होल्ड नहीं खोलता। होल्ड रद्द भी नहीं है।

कौन क्या बोल रहा है

22 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने मोहन यादव को पत्र लिखा। माँग 27 लागू करने और 13 होल्ड पर लेटर देने की थी। माँग है, ऑर्डर नहीं। 4.87 लाख उस पत्र में नहीं था। 24 सितंबर को विश्वास सारंग ने कहा सरकार 27 देने को कटिबद्ध है। बयान है। कटिबद्ध होना हर विज्ञापन पर 27 नहीं है। कमलनाथ वाली रोक की लाइन आरोप है। 2019 का नोटिस आरोप से रद्द नहीं होता।

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70 परसेंट हजारीबाग मोर्चे का दावा है। 51 हलफनामा है। दोनों जनगणना नहीं। दोनों को एक नंबर मत बनाओ।

उदाहरण से समझो

100 पद हैं। कागज पर 27 OBC लिख दो, तो SC 16 और ST 20 के साथ 63 हो जाता है। EWS 10 अलग कॉलम है। जोड़ 73 दिख सकता है। भर्ती में 87 आगे और 13 होल्ड चल रहा है। तुम्हारा रोल 13 पर है, तो लिमिट का लेख लेटर नहीं देगा। पोर्टल पर होल्ड है, तो होल्ड मानो। PDF में 14 है, तो उस भर्ती में 14 चल रहा है।

इसी लाइन के पेज यहाँ हैं। 27 लागू हुआ या नहीं, 87:13 फॉर्मूला, रिजर्वेशन कितना परसेंट और अलग कॉलम।

जो नंबर रिपोर्ट में था, वही यहाँ है। 16, 20, 27, जोड़ 63। EWS 10, जोड़ 73। 51 हलफनामा। 1992 इंदिरा साहनी। नोटिस 2019। सर्कुलर 29 सितंबर 2022। रिमांड 19 फरवरी 2026। रिजर्व 6 अगस्त 2026। लेटर की गिनती नहीं।

काउंटर स्लिप और विज्ञापन की PDF साथ रखो। 73 का फॉरवर्ड आए, तो जोड़ लिखो, फैसला मत लिखो। पैसे माँगने वाला लिंक फ्रॉड हो सकता है। क्रीमी लेयर का 8 लाख इस लिमिट का नंबर नहीं है। नाम स्टेट लिस्ट से मिलाओ। फैसला रिजर्व है, तो जीत का पोस्टर मत शेयर करो।

जॉइनिंग का लेटर डिपार्टमेंट जारी करता है। 73 की तस्वीर जॉइनिंग नहीं है। यलो स्कार्फ वाला मार्च इस केस को नहीं खोलता। ग्रुप एडमिन का मैसेज कोर्ट का ऑर्डर नहीं होता। फॉरवर्ड की तारीख नोटिस की तारीख नहीं। पोर्टल रोज चेक करो। PDF संभालकर रखो। काउंटर स्लिप पर साल लिखा हो, तब रखो।

दो जोड़ अलग हैं

63 वाला जोड़ SC, ST और OBC 27 का है। 73 वाला जोड़ उसमें EWS का 10 मिलाता है। EWS अलग कॉलम है। OBC का कॉलम नहीं। दोनों जोड़ एक पोस्टर पर आ जाएँ, तो भी दो लाइन हैं। 51 तीसरी लाइन है। वह हलफनामे का आंकड़ा है। 70 चौथी लाइन है। वह मोर्चे का दावा है। चार नंबर चार कागज हैं। एक वाक्य में मत मिलाओ।

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लिमिट पार दिखना लेटर आना नहीं है। 100 पद में 87 आगे और 13 होल्ड, यही भर्ती का रास्ता है। लिमिट का लेख इस हिसाब को नहीं बदलता। होल्ड रिजल्ट और फाइनल मेरिट एक नहीं। मेरिट में नाम हो, फिर भी 13 वाली लाइन होल्ड हो सकती है। होल्ड हटने का नोटिस साइट पर PDF में आए, तब मानो। केंद्र का 27 और राज्य का 27 एक नियम नहीं।

कुणबी सर्टिफिकेट महाराष्ट्र का कागज है। बंगाल की विंडो अलग है। खूंटी का धरना कॉलम का लोकल प्रोग्राम है। तीनों 73 को फैसला नहीं बनाते। नाम OBC लिस्ट में है या नहीं, स्टेट लिस्ट से देखो। इनाम या लेटर का रेट आए, तो पैसे मत भेजो। ऑर्डर की कॉपी और रोल नंबर की स्लिप एक लिफाफे में रखो।

पुराना रिजल्ट नए जोड़ से मत मिलाओ। जिस भर्ती का रोल नंबर है, उसी की PDF खोलो। PDF में परसेंट नहीं है, तो 27 लागू मत मानो। दफ्तर का काउंटर स्लिप भी रखो। साल नहीं है, तो स्लिप किसी और परीक्षा की हो सकती है।

इंदिरा साहनी 1992 का फैसला है। 2026 का रिमांड नया ऑर्डर नहीं है। ऑर्डर छपे, तब लाइन बदलना। तब तक 73 को फैसला मत कहो।

नाम लिस्ट से मिलाओ। फॉरवर्ड की तारीख नोटिस की तारीख नहीं।

PDF संभालकर रखो। पोर्टल रोज चेक करो।

73 को फैसला मत कहो।

एडवाइस:

सीधी बात यह है। 16, 20 और 27 जोड़कर 63 होता है। EWS का 10 जोड़ो, तो 73। 73 जजमेंट नहीं है। 51 हलफनामा है, जनगणना नहीं। 50 इंदिरा साहनी की सामान्य लिमिट है। केस हाईकोर्ट में वापस है, फैसला रिजर्व बताया गया। भर्ती 87 आगे और 13 होल्ड पर है। रोल नंबर अपने पोर्टल पर मिलाओ। जोड़ को लेटर मत मानो।

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Vivek Hardaha Written by: Writer, YouTuber and tool builder · Madhya Pradesh

Vivek has been online since 2012 and has worked since 2014 across YouTube, blogs and news platforms. He holds an M.Sc. in Computer Science and an M.A. in Sociology. On Vista Hub he writes practical, plain-language guides on tech, money, health, farming and festivals.

कैसे बना: ड्राफ्ट में AI की मदद ली गई; स्रोत, आँकड़े और भाषा विवेक हरदहा ने जाँचे। कोई गलती दिखे तो हमें बताएँ।

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