आंकड़े राज्य के हलफनामे और खबरों के हैं। अदालत का अंतिम आदेश अलग है। कानूनी सलाह नहीं। 3 अक्टूबर 2026।
मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत मान लें, तो कागजी जोड़ 50 प्रतिशत की सामान्य सीमा पार कर जाता है। अनुसूचित जाति 16 और अनुसूचित जनजाति 20 पहले से हैं। 16 और 20 में 27 जोड़ें तो 63। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का 10 और जोड़ें तो 73। यह जोड़ है, फैसला नहीं। इंदिरा साहनी, 1992, ने सामान्य सीमा 50 रखी थी, और असाधारण हालत का एक संकरा दरवाजा भी छोड़ा था। मध्य प्रदेश का केस उस दरवाजे पर खड़ा है। अंतिम आदेश नहीं आया है।
51 प्रतिशत आबादी हलफनामा है, जनगणना की तालिका नहीं
राज्य ने 23 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया। उसमें ओबीसी आबादी 51 प्रतिशत से ज्यादा बताई गई, और 2022 की ओबीसी आयोग रिपोर्ट का हवाला दिया गया। 2011 की जनगणना में अनुसूचित जाति 15.6 और अनुसूचित जनजाति 21.1 प्रतिशत छपी है। ओबीसी की अलग गिनती उस जनगणना की प्रकाशित तालिका में नहीं है। इसलिए 51 प्रतिशत को नई जाति जनगणना का नतीजा न मानें। यह राज्य का दावा है। प्रिंट की रिपोर्ट में इसी हलफनामे का ओबीसी हिस्सा 48 प्रतिशत से ऊपर भी लिखा गया। दो खबरें एक तालिका नहीं बनतीं।
27 लागू हुआ, इसका मतलब सीमा टूट गई नहीं
2019 में ओबीसी हिस्सा 14 से 27 किया गया। याचिकाएं लगीं। बढ़ोतरी पर रोक की खबरें हैं, और 87:13 के रास्ते भर्ती चली। 87 प्रतिशत पर नियुक्ति आगे बढ़ी, 13 प्रतिशत होल्ड रहा। होल्ड का मतलब रद्द नहीं है। सीमा टूटी या नहीं, यह इसी केस का सवाल है। 27 प्रतिशत लागू हुआ या नहीं और 87:13 फॉर्मूला अलग पेज हैं।
अभ्यर्थी के रोल नंबर पर यह जोड़ नहीं छपता
जो परीक्षा दे चुका है, उसके लिए 73 एक नारा नहीं, इंतजार है। 22 सितंबर 2026 के पत्र में राहुल गांधी ने होल्ड पदों का नियुक्ति पत्र मांगा। पत्र मांग है। रिजल्ट पोर्टल पर होल्ड सूची हो, तो उसे सीमा टूटने का आदेश न पढ़ें। नियुक्ति पत्र कब मिलेगा और एमपीपीएससी 13 प्रतिशत होल्ड रिजल्ट इसी कड़ी में हैं।
एडवाइस:
50 पार हुआ या नहीं, आदेश की प्रति या विभाग की अधिसूचना से देखें। 73 का जोड़ व्हाट्सऐप पर फैसले की तरह न भेजें। 51 प्रतिशत को जनगणना की डाउनलोड तालिका न समझें। होल्ड सूची में नाम होना नियुक्ति पत्र नहीं है। रोल नंबर उसी पोर्टल पर मिलाएं, जहां रिजल्ट आता है।