संपादकीय चित्रण है, घटना की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026 सुबह की।
ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की भाषा सड़क पर आसान है। संसद में यह हटाने का नोटिस है। 3 अक्टूबर 2026 तक कुर्सी नहीं हिली। दो नोटिस रिजेक्ट हो चुके हैं। अप्रैल वाली 73 सांसदों की राज्यसभा नोटिस पेंडिंग बताई जाती है। सितंबर के आखिर में तीसरी कोशिश की खबर है।
तीन कोशिशें
पहला सेट 12 मार्च 2026 का है। राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर, लोकसभा में 130। 6 अप्रैल को राज्यसभा सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नोटिस अस्वीकार किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अस्वीकार किया। बुलेटिन में जजों वाली प्रक्रिया की धारा 3 का हवाला था। 24 अप्रैल को ताजा राज्यसभा नोटिस गया, 73 सांसद, नौ आरोप, सिद्ध दुराचार की भाषा। जैराम रमेश ने कहा नोटिस महासचिव को दिया गया। भारतीय एक्सप्रेस ने लिखा कि टीएमसी और कांग्रेस ने दस्तखत जुटाए, आधार नए बताए गए। यह नोटिस पेंडिंग है। 28 सितंबर को इंडिया टुडे ने लिखा विपक्ष दोनों सदनों में नई नोटिस तैयार कर रहा है, एक्सप्रेस वाली आंतरिक आपत्तियों को भी शामिल करने की बात है।
हटता कैसे है
CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह हटाया जाता है। दोनों सदनों का विशेष बहुमत वाला पता राष्ट्रपति को जाता है। नारा, धरना या एक सदन की अधूरी नोटिस काफी नहीं। विस्तार यहां है: CEC कैसे हटाया जाता है।
एडवाइस:
महाभियोग लग गया जैसी पोस्ट झूठ है। रिजेक्ट और पेंडिंग अलग शब्द हैं। 73 सांसद बहुमत नहीं है।
और पढ़ें: इस्तीफा क्यों नहीं।
टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी
15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।
ज्ञानेश कुमार महाभियोग: तीसरी नोटिस, 73 सांसद, दो रिजेक्ट पर दोनों पक्ष
12 मार्च 2026 की नोटिस 6 अप्रैल को दोनों सदनों में रिजेक्ट हुईं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
24 अप्रैल की राज्यसभा नोटिस पर 73 दस्तखत और नौ आरोप हैं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
73 सांसद विशेष बहुमत नहीं है। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
नारे से कुर्सी नहीं छूटती। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आगे कौन सा सर्च फूटेगा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।
पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।