📅 7 सितंबर

पुरषोत्तम माह या अधिक मास: क्या, क्यों और कैसे करें इस पवित्र महीने का सदुपयोग | What is Purushottam Maas

पुरषोत्तम माह या अधिक मास: क्या, क्यों और कैसे करें इस पवित्र महीने का सदुपयोग | What is Purushottam Maas
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सुनिए — पूरी खबर 30 सेकंड में

नमस्कार दोस्तों! भारतीय संस्कृति और पंचांग में समय का अपना एक अनूठा महत्व है। जहां अंग्रेजी कैलेंडर में हर चार साल में एक ‘लीप ईयर’ आता है, वहीं हमारे हिंदू पंचांग में हर कुछ वर्षों में एक ऐसा महीना जुड़ जाता है, जिसे ‘पुरषोत्तम माह’ या ‘अधिक मास’ के नाम से जाना जाता है। यह सिर्फ एक अतिरिक्त महीना नहीं, बल्कि अध्यात्म, भक्ति और पुण्य कमाने का एक विशेष अवसर होता है।

अक्सर लोग इस महीने को लेकर भ्रमित रहते हैं – यह क्या है, क्यों आता है, और इसमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं? आज हम vhoriginal.com पर इसी पवित्र और रहस्यमयी महीने की गहराई में जाएंगे, ताकि आप इसके महत्व को समझकर इसका पूरा लाभ उठा सकें।

क्या होता है पुरषोत्तम माह या अधिक मास?

पुरषोत्तम माह को ‘अधिक मास’ या ‘मल मास’ भी कहा जाता है। इसे समझने के लिए हमें हिंदू पंचांग की गणना को समझना होगा। हमारा हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा दोनों की गतियों पर आधारित है।

  • सौर वर्ष: सूर्य की गति पर आधारित होता है, जिसमें लगभग 365 दिन होते हैं।
  • चंद्र वर्ष: चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होता है, जिसमें लगभग 354 दिन होते हैं।

इन दोनों में लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यह अंतर हर साल बढ़ता जाता है, और तीन साल में लगभग एक महीना (33 दिन) का हो जाता है। इस अंतर को समायोजित करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं।

अधिक मास की पहचान यह है कि इस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती। संक्रांति वह दिन होता है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, उसे ही अधिक मास या पुरषोत्तम माह कहा जाता है।

इसे पुरषोत्तम माह क्यों कहते हैं? पौराणिक कथा

अधिक मास को पहले ‘मल मास’ कहा जाता था, क्योंकि इसे मलिन और अशुभ माना जाता था। ऐसी मान्यता थी कि इस महीने में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि नहीं करने चाहिए। इस कारण मल मास स्वयं को उपेक्षित और निंदित महसूस करने लगा।

अपनी व्यथा लेकर मल मास भगवान विष्णु के पास पहुंचा और उनसे प्रार्थना की कि वे उसे अपनी शरण में ले लें और उसे मान-सम्मान दिलाएं। भगवान विष्णु, जो करुणा के सागर हैं, ने मल मास की व्यथा सुनी और उसे अपना नाम ‘पुरषोत्तम’ प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज से यह महीना मेरा प्रिय महीना होगा और जो कोई इस महीने में मेरी पूजा-अर्चना करेगा, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी।

भगवान विष्णु ने मल मास को यह वरदान भी दिया कि जो भी इस महीने में मेरी भक्ति करेगा, उसे मेरे ही लोक में स्थान मिलेगा और उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। इस प्रकार, जो महीना पहले ‘मल मास’ के नाम से उपेक्षित था, वह भगवान विष्णु का प्रिय ‘पुरषोत्तम माह’ बनकर अत्यंत पूजनीय और पवित्र हो गया।

पुरषोत्तम माह का महत्व और आध्यात्मिकता

पुरषोत्तम माह को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है, इसलिए यह महीना भक्ति, तपस्या और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक मिलता है। इसका मुख्य महत्व निम्नलिखित कारणों से है:

  • पुण्य संचय: इस माह में किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा-पाठ से मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • पाप मुक्ति: भगवान विष्णु की भक्ति से सभी प्रकार के पापों का शमन होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यह महीना आत्म-चिंतन, ध्यान और ईश्वर से जुड़ने का सर्वोत्तम समय माना जाता है।
  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं और शुभ कर्म इस महीने में विशेष रूप से फलित होते हैं।

पुरषोत्तम माह में क्या करें? (शुभ कार्य)

यह महीना आध्यात्मिक उत्थान का स्वर्णिम अवसर है। इसमें निम्नलिखित शुभ कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

  1. भगवान विष्णु की पूजा: नियमित रूप से भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा करें। विशेष रूप से सत्यनारायण कथा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
  2. मंत्र जप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” जैसे मंत्रों का अधिक से अधिक जप करें।
  3. भागवत कथा श्रवण: श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ या श्रवण करना इस माह में विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
  4. दान-पुण्य: अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, दीपक, जूते-चप्पल, या भोजन का दान करें। गौ दान और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
  5. व्रत-उपवास: यदि संभव हो तो एकादशी या पूर्णिमा का व्रत रखें। कुछ लोग पूरे महीने एक समय भोजन या फलाहार का व्रत भी करते हैं।
  6. तीर्थ यात्रा: पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर गंगा स्नान, और तीर्थ स्थलों की यात्रा करना इस महीने में मोक्षदायी माना जाता है।
  7. तुलसी पूजा: प्रतिदिन तुलसी माता की पूजा करें और दीपक जलाएं।
  8. सात्विक जीवन: मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का त्याग कर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

पुरषोत्तम माह में क्या न करें? (वर्जित कार्य)

परंपरागत रूप से, पुरषोत्तम माह में कुछ कार्यों को वर्जित माना जाता है, क्योंकि इस महीने को भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है और इसे भौतिक सुखों के बजाय आध्यात्मिक उन्नति के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।

  • विवाह: इस महीने में विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
  • गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नया घर खरीदना शुभ नहीं माना जाता।
  • मुंडन/उपनयन: बच्चों के मुंडन संस्कार या उपनयन संस्कार भी इस महीने में नहीं किए जाते।
  • नए व्यापार का आरंभ: किसी बड़े व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत से बचना चाहिए।
  • भौतिक सुखों की खरीद: नई गाड़ी, संपत्ति या अन्य बड़े भौतिक निवेश को टालने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, ध्यान रहे कि ये केवल पारंपरिक मान्यताएं हैं। यदि कोई कार्य अति आवश्यक हो तो विद्वान पंडितों से सलाह लेकर किया जा सकता है। इस महीने का मूल उद्देश्य भौतिकता से हटकर आध्यात्मिकता की ओर मुड़ना है।

पुरषोत्तम माह के लाभ

जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ पुरषोत्तम माह के नियमों का पालन करता है, उसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • अक्षय पुण्य: किए गए सभी शुभ कर्मों का फल कई गुना होकर मिलता है।
  • पापों से मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रायश्चित होता है।
  • मनोकामना सिद्धि: भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • रोग मुक्ति: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और शरीर निरोगी रहता है।
  • सुख-समृद्धि: घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: अंततः व्यक्ति को मोक्ष की ओर अग्रसर होने का अवसर मिलता है।

आधुनिक जीवन में पुरषोत्तम माह का पालन

आज के व्यस्त जीवन में हर व्यक्ति के लिए सभी नियमों का पालन करना कठिन हो सकता है। ऐसे में महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही इस पवित्र महीने का सदुपयोग करें। यदि आप व्रत नहीं रख सकते, तो प्रतिदिन कुछ समय भगवान का नाम जपें। यदि दान नहीं कर सकते, तो किसी की मदद करें या किसी के प्रति दया भाव रखें। इस महीने का सार आंतरिक शुद्धि और भगवान के प्रति प्रेम है।

Vivek Bhai ki Advice

देखो दोस्तों, पुरषोत्तम माह को लेकर कई लोग बहुत स्ट्रेस में आ जाते हैं कि क्या करें और क्या न करें। मेरी सलाह ये है कि इसे एक अवसर की तरह देखो, न कि नियमों के बंधन की तरह। अगर आप पूरे महीने व्रत नहीं कर सकते, तो कोई बात नहीं। बस इतना करो कि हर दिन 10-15 मिनट भगवान विष्णु का कोई मंत्र जप लो, या बस उनके बारे में सोचो। किसी ज़रूरतमंद की थोड़ी मदद कर दो, या किसी को मीठा बोल दो। सबसे ज़रूरी है अपनी इंटेंशन (इरादा) को प्योर रखना और दिल से भगवान को याद करना। ये महीना आपको खुद से और ईश्वर से कनेक्ट होने का मौका देता है, इसे एन्जॉय करो!

पुरषोत्तम माह वास्तव में एक आध्यात्मिक संजीवनी है, जो हमें भौतिकवादी जीवन की दौड़ से थोड़ा रुककर आत्म-चिंतन और ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित करती है। इस पवित्र महीने का लाभ उठाएं और अपने जीवन को सकारात्मकता और पुण्य से भरें।

🗓️ आज का इतिहास — 7 सितंबर

  • 2019। इसरो का चंद्रयान-2 मिशन, लैंडर विक्रम से चंद्रमा की सतह पर उतरने से ठीक पहले संपर्क टूट गया, जो भारत के अंतरिक्ष इतिहास की एक बड़ी चुनौती थी।
  • 1998। गूगल की आधिकारिक स्थापना हुई, जिसने इंटरनेट पर सूचना खोजने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया और आज यह दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है।
  • 1977। प्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि, जिन्हें हिंदी साहित्य में प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है।
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