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ओशो महापरिनिर्वाण दिवस: मृत्यु नहीं, उत्सव है – ओशो के अनमोल विचार और वाणी (19 जनवरी)

ओशो महापरिनिर्वाण दिवस: मृत्यु नहीं, उत्सव है – ओशो के अनमोल विचार और वाणी (19 जनवरी)

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हर साल 19 जनवरी का दिन ओशो प्रेमियों और उनके अनुयायियों के लिए एक विशेष महत्व रखता है। यह दिन ओशो के शरीर त्यागने का दिन है, जिसे वे ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ कहते थे। यह किसी शोक का दिन नहीं, बल्कि एक ऐसे गुरु के जीवन और दर्शन का उत्सव है, जिन्होंने मृत्यु को जीवन का स्वाभाविक और सुंदर हिस्सा माना, न कि उसका अंत। vhoriginal.com पर आज हम ओशो के इसी अद्वितीय दृष्टिकोण को समझेंगे और उनके उन अनमोल विचारों को जानेंगे, जो हमें जीवन और मृत्यु के गहरे रहस्यों से परिचित कराते हैं।

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ओशो महापरिनिर्वाण दिवस: मृत्यु नहीं, महायात्रा का उत्सव

ओशो, जिन्हें आचार्य रजनीश के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसे दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और विचारक थे जिन्होंने अपने जीवनकाल में लाखों लोगों के सोचने का तरीका बदल दिया। उनका जन्म 11 दिसंबर 1931 को हुआ था और उन्होंने 19 जनवरी 1990 को पुणे में अपना शरीर त्यागा। ओशो ने हमेशा सिखाया कि मृत्यु कोई दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक परम यात्रा का अगला पड़ाव है। उनके अनुसार, मृत्यु सिर्फ शरीर का अंत है, आत्मा का नहीं। यह एक पुराने वस्त्र को त्याग कर नए वस्त्र धारण करने जैसा है।

ओशो का मृत्यु पर अद्वितीय दृष्टिकोण

ओशो के दर्शन का एक केंद्रीय बिंदु मृत्यु को लेकर उनका क्रांतिकारी विचार था। वे कहते थे कि समाज ने हमें मृत्यु से डरना सिखाया है, जबकि यह जीवन का ही एक अभिन्न और अपरिहार्य हिस्सा है। उनका मानना था कि जब तक हम मृत्यु के भय से मुक्त नहीं होते, तब तक हम वास्तव में जी भी नहीं सकते। जो व्यक्ति मृत्यु को स्वीकार करता है, वही जीवन को उसकी पूर्णता में अनुभव कर पाता है।

“मृत्यु कोई अंत नहीं है, बल्कि यह एक नया द्वार है, एक नया आयाम है। यह जीवन का उत्सव है, न कि जीवन का समापन।”

यह विचार हमें सिखाता है कि हमें जीवन के हर पल को पूरी जागरूकता और प्रेम के साथ जीना चाहिए, क्योंकि यही हमें मृत्यु के पार ले जाने वाला अनुभव बनेगा।

ओशो के अनमोल विचार: जीवन, मृत्यु और उत्सव

ओशो ने अपने प्रवचनों और पुस्तकों में जीवन, मृत्यु, प्रेम, ध्यान और अस्तित्व के बारे में कई गहरे विचार साझा किए हैं। उनके कुछ प्रेरणादायक कोट्स यहां दिए गए हैं, जो हमें उनके दर्शन को समझने में मदद करेंगे:

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मृत्यु को लेकर ओशो के क्रांतिकारी विचार

  • “मृत्यु का भय ही जीवन का भय है।”
    ओशो कहते थे कि हम मृत्यु से नहीं डरते, बल्कि हम जीवन को पूरी तरह से जीने से डरते हैं। जब हम जीवन को पूरी तरह से जी लेते हैं, तो मृत्यु एक विश्राम की तरह आती है।

  • “मृत्यु परम विश्राम है।”
    मृत्यु को एक गहरी नींद के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां आत्मा एक नई यात्रा के लिए तैयार होती है। यह शरीर के लिए एक पूर्ण विश्राम है।

  • “जो मृत्यु को स्वीकार करता है, वह अमर हो जाता है।”
    यह विचार इस बात पर जोर देता है कि मृत्यु को स्वीकार करने से ही हम जीवन के वास्तविक अर्थ को समझ पाते हैं और अमरता के अनुभव के करीब आते हैं।

  • “मृत्यु सिर्फ एक दरवाजा है, जो एक जीवन से दूसरे जीवन में ले जाता है।”
    ओशो पुनर्जन्म और आत्मा की अमरता में विश्वास रखते थे। उनके लिए मृत्यु एक पड़ाव था, अंत नहीं।

जीवन को उत्सव बनाने वाले ओशो के कोट्स

  • “जीवन एक उत्सव है, इसे जियो, इसका आनंद लो।”
    ओशो का यह सबसे प्रसिद्ध संदेश है। वे चाहते थे कि लोग जीवन को एक बोझ की तरह न देखें, बल्कि उसे एक आनंदमय उत्सव के रूप में अनुभव करें।

  • “आज में जियो, अभी में जियो।”
    भूतकाल और भविष्य की चिंता में खोए रहने के बजाय, ओशो वर्तमान क्षण में जीने की कला सिखाते थे, क्योंकि जीवन सिर्फ ‘अभी’ में है।

  • “प्रेम ही एकमात्र धर्म है।”
    ओशो के लिए, प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति और एकमात्र सच्चा धर्म था, जो सभी सीमाओं को तोड़ देता है।

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  • “जागरूकता ही स्वर्ग है और अचेतनता ही नर्क।”
    वे कहते थे कि हमारी आंतरिक स्थिति ही हमारे अनुभव को निर्धारित करती है। जागरूक रहना ही सच्ची मुक्ति है।

ओशो महापरिनिर्वाण दिवस: कैसे करें इस दिन को सार्थक?

ओशो महापरिनिर्वाण दिवस को शोक मनाने के बजाय, उनके विचारों और दर्शन को आत्मसात करने के रूप में मनाया जाना चाहिए। यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप इस दिन को सार्थक बना सकते हैं:

  • ओशो की किताबें पढ़ें: उनकी कोई भी किताब उठाकर पढ़ें, जैसे ‘मैं मृत्यु सिखाता हूं’, ‘जीवन रहस्य’, ‘संभोग से समाधि की ओर’। उनके शब्दों में गहराई तक उतरें।
  • ध्यान करें: ओशो ने कई ध्यान विधियां सिखाई हैं, जैसे डायनेमिक मेडिटेशन, कुंडलिनी मेडिटेशन। इस दिन आप इनमें से किसी भी विधि का अभ्यास कर सकते हैं।
  • प्रवचन सुनें: ओशो के ऑडियो या वीडियो प्रवचन सुनें। उनकी आवाज़ और उनके शब्दों में एक विशेष ऊर्जा है जो आपको शांत और केंद्रित महसूस करा सकती है।
  • आत्म-चिंतन करें: अपने जीवन, अपनी मृत्यु के भय और अपने अस्तित्व के बारे में चिंतन करें। ओशो के विचारों के प्रकाश में स्वयं को देखें।
  • जीवन का उत्सव मनाएं: अपने आसपास के लोगों के साथ खुशी के पल साझा करें। जीवन को एक उपहार के रूप में स्वीकार करें और हर पल का आनंद लें।

ओशो के विचार और आधुनिक जीवन

आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां तनाव, चिंता और मृत्यु का भय आम है, ओशो के विचार हमें एक नई दिशा दिखाते हैं। उनका दर्शन हमें सिखाता है कि जीवन को कैसे पूर्णता से जिया जाए, कैसे आंतरिक शांति प्राप्त की जाए और कैसे मृत्यु के भय से मुक्त हुआ जाए। उनके विचार केवल आध्यात्मिक नहीं हैं, बल्कि वे व्यावहारिक रूप से भी हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि हर पल को एक अवसर के रूप में देखें, प्रेम और करुणा के साथ जिएं और अपनी चेतना को विकसित करें।

ओशो महापरिनिर्वाण दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह एक रिमाइंडर है कि जीवन एक अनमोल उपहार है और मृत्यु उसका स्वाभाविक हिस्सा। हमें मृत्यु से भयभीत होने के बजाय, जीवन को पूरे उत्साह और जागरूकता के साथ जीना चाहिए। ओशो के विचार हमें इस यात्रा में प्रकाश और प्रेरणा देते रहेंगे।

Vivek Bhai ki Advice:

Yaar, Osho ki baatein sunke lagta hai ki hum kitna unnecessary death se darte hain. Real advice ye hai ki zindagi ko aise jiyo ki jab end aaye, toh regret na ho, bas ek shanti ho. Har din ko celebration banao, kyunki har din ek chhota sa jeevan hi toh hai. Live fully, my friend! Aur haan, sirf quotes padhne se kuch nahi hoga, unko apni life mein apply bhi karo. That’s the real game changer!

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🗓️ आज का इतिहास — 15 अक्टूबर

  • 2003। चीन ने अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष यान 'शेंझोउ 5' को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिससे वह अंतरिक्ष में पहुंचने वाला तीसरा देश बना।
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Vivek Hardaha लेखक:

Vivek Hardaha, Madhya Pradesh. M.Sc. (Computer Science) and M.A. (Sociology). Writing since 2014 on science, logic and society in simple words.

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