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चिंता की सबसे बड़ी दवा क्या है? कहते हैं चिंता चिता के समान है। ज्यादा चिंता सेहत के लिए अच्छी नहीं। आजकल हर कोई कुछ न कुछ सोचता रहता है। अच्छी बात यह है कि चिंता को संभालना सीखा जा सकता है।

चिंता क्या है
चिंता भविष्य की बात सोचकर होती है, जैसे “आगे क्या होगा?”। तनाव बाहर के दबाव से होता है, जैसे काम का बोझ। दोनों आपस में जुड़े हैं। थोड़ी चिंता सामान्य है और कई बार हमें तैयारी करने में मदद भी करती है। लेकिन जब नींद, भूख या काम बिगड़ने लगे तो ध्यान देना चाहिए।
उदाहरण: परीक्षा से पहले घबराहट या नौकरी का तनाव आम बात है। लेकिन अगर हर दिन बेचैनी रहे, दिल तेज धड़के या मन किसी काम में न लगे, तो मदद लेना ठीक है।
चिंता के आम कारण
पैसे की कमी, सेहत, परिवार की परेशानी, पढ़ाई या नौकरी, ये चिंता के आम कारण हैं। एक कागज पर अपनी सारी चिंताएं लिखो और देखो कि कौन सी सबसे बड़ी है। लिखने से दिमाग का बोझ हल्का होता है और साफ दिखता है कि किस बात पर पहले काम करना है।
बहुत से लोगों को रात में चिंता ज्यादा होती है, क्योंकि तब दिमाग खाली होता है। इसलिए दिन में व्यस्त रहना और शाम को थोड़ा टहलना मदद करता है।
चिंता कम करने के तरीके
धीमी सांस: आराम से बैठो। नाक से 5 तक गिनते हुए सांस अंदर लो और मुंह से 5 तक गिनते हुए बाहर छोड़ो। ऐसा 3 से 5 मिनट करो। इससे शरीर शांत होता है और घबराहट कम होती है।
चिंता का समय तय करो: दिन में 15-20 मिनट का एक समय रखो, जैसे शाम 6 बजे। उसी समय अपनी चिंताओं के बारे में सोचो। बाकी समय कोई चिंता आए तो उसे एक लाइन में लिख लो और उसी तय समय के लिए छोड़ दो।
खुद से पूछो: क्या यह बात मेरे बस में है? अगर हां, तो आज का एक छोटा कदम लिखो और उसे कर डालो। अगर नहीं, तो उस पर बार-बार सोचने से कुछ नहीं बदलेगा। अपना ध्यान उन बातों पर लगाओ जो आप बदल सकते हो।
दिमाग को व्यस्त रखो: किताब पढ़ो, संगीत सुनो, घर का काम करो या कोई शौक पूरा करो। खाली समय में चिंता बढ़ती है।
शरीर को हिलाओ: तेज चलना, साइकिल चलाना या योग करो। बड़ों के लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की हल्की-मध्यम एक्सरसाइज अच्छी मानी जाती है। इससे मूड बेहतर होता है और नींद भी अच्छी आती है।
चाय-कॉफी, शराब और सिगरेट कम करो: ज्यादा चाय-कॉफी से घबराहट बढ़ सकती है। शराब और सिगरेट से थोड़ी देर आराम लगता है, लेकिन बाद में चिंता और बढ़ सकती है।
नींद पूरी लो: रोज एक ही समय पर सोओ और उठो। सोने से एक घंटा पहले फोन बंद कर दो। बड़ों को आमतौर पर 7-9 घंटे की नींद चाहिए।
रोजमर्रा की आदतें
सुबह उठकर 5 मिनट धीमी सांस लो। दिन में पानी पीते रहो और खाना समय पर खाओ। शाम को फोन और खबरें कम देखो।
अगर चिंता ज्यादा हो तो एक दिन में बस एक काम पूरा करने का लक्ष्य रखो। छोटा काम पूरा होने से भरोसा बढ़ता है।
परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त से अपनी बात शेयर करो। अकेले बोझ मत ढोओ। किसी से बात करने भर से मन हल्का हो जाता है।
कब मदद लें
अगर चिंता रोज रहती है, कई हफ्तों से है, और नींद, भूख या काम पर असर पड़ रहा है, तो डॉक्टर को दिखाओ। मदद लेना कमजोरी नहीं है।
भारत सरकार की Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 या 1-800-891-4416 पर मुफ्त बात कर सकते हो। अगर खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं तो तुरंत 112 पर कॉल करो या नजदीकी अस्पताल जाओ।
सलाह
चिंता की कोई एक जादुई दवा नहीं है। दिमाग को व्यस्त रखना, लिखना, धीमी सांस लेना और किसी से बात करना, ये रोज की आदतें सबसे ज्यादा काम आती हैं।
छोटे कदम से शुरू करो। आज एक आदत डालो, अगले हफ्ते दूसरी। धीरे-धीरे सुधार होगा। एक दिन में सब ठीक नहीं होता, इसलिए खुद के साथ धैर्य रखो।
FAQ
चिंता कैसे दूर करें?
धीमी सांस लो, चिंता लिखो, दिमाग को काम में लगाओ, एक्सरसाइज करो और नींद पूरी लो। ज्यादा परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलो।
चिंता और तनाव में क्या फर्क है?
तनाव बाहरी दबाव से होता है। चिंता भविष्य की बात सोचकर होती है। दोनों आपस में जुड़े होते हैं।
रात को चिंता से नींद न आए तो क्या करें?
सोने से पहले फोन बंद करो। धीमी सांस लो। मन की बातें कागज पर लिख लो। रोज एक ही समय पर सोने की आदत डालो।
चिंता के लिए डॉक्टर कब दिखाएँ?
जब नींद, भूख या काम पर असर पड़े, या चिंता काबू से बाहर लगे। Tele-MANAS 14416 पर भी बात कर सकते हो।
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स्रोत: NHS: Generalised anxiety disorder
यह जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है, इलाज नहीं। मदद के लिए डॉक्टर या Tele-MANAS 14416 से बात करें। इमरजेंसी में 112 पर कॉल करें।