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महिला होली फाग गीत लिरिक्स: ढोलक की ताल पर पारंपरिक और नए फाग गीतों का संपूर्ण संग्रह

महिला होली फाग गीत लिरिक्स: ढोलक की ताल पर पारंपरिक और नए फाग गीतों का संपूर्ण संग्रह

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फाल्गुन का महीना आते ही हवा में एक अलग ही मस्ती और उमंग घुल जाती है। यह समय होता है रंगों के त्योहार होली का, और होली का असली रंग महिलाओं के पारंपरिक फाग गीतों और ढोलक की थाप के बिना अधूरा है। घरों के आंगन हों या मोहल्ले की चौपालें, दोपहर के समय जब औरतें अपने सारे कामकाज निपटाकर एक साथ बैठती हैं, तो ढोलक की ताल पर गाए जाने वाले मीठे और मनमोहक फाग गीत पूरे माहौल में जादू भर देते हैं। ये गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी लोक-संस्कृति की एक अनमोल धरोहर हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही है।

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अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं को पुराने और पारंपरिक होली गीतों की शुरुआती पंक्तियां तो याद रहती हैं, लेकिन आगे के पूरे बोल (Lyrics) भूल जाते हैं। उनकी इसी उलझन को दूर करने और होली के इस पावन पर्व को और भी रंगीन बनाने के लिए, हम vhoriginal.com पर आपके लिए लाए हैं सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले और इंटरनेट पर खोजे जाने वाले ‘महिला फाग गीतों’ का पूरा और विस्तृत संग्रह। इन गीतों को आप आसानी से अपनी डायरी में लिख सकती हैं, याद कर सकती हैं और ढोलक की ताल पर गाकर होली के उत्सव को जीवंत बना सकती हैं।

होली के फाग गीत: हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर

महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले फाग गीत सिर्फ गाने नहीं होते, ये हमारी सामाजिक बुनावट और पारिवारिक रिश्तों की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं। इनमें देवर-भाभी की मीठी छेड़खानी, ननद-भौजाई के नोक-झोंक भरे ताने-बाने और राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम का बहुत ही सुंदर वर्णन होता है। इन गीतों के माध्यम से आपसी गिले-शिकवे मिटाए जाते हैं और रिश्तों में और अधिक मिठास घोली जाती है।

  • सामाजिक समरसता: फाग गीत महिलाओं को एक मंच पर लाते हैं, जहां वे एक-दूसरे के साथ हंसती-गाती हैं, जिससे सामुदायिक भावना मजबूत होती है।
  • पारिवारिक बंधन: इन गीतों में परिवार के हर सदस्य का जिक्र होता है, जिससे रिश्तों की गर्माहट और मजबूती महसूस होती है।
  • राधा-कृष्ण की भक्ति: कई फाग गीत राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं और होली खेलने के वर्णन से भरे होते हैं, जो भक्ति और शरारत का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।
  • लोक-परंपरा का संरक्षण: ये गीत मौखिक परंपरा का हिस्सा हैं, जो हमारी लोक-संस्कृति, रीति-रिवाजों और लोक-कथाओं को जीवित रखते हैं।

ढोलक की ताल पर फाग: एक अनूठा अनुभव

ढोलक भारतीय लोक संगीत का एक अभिन्न अंग है, खासकर फाग गीतों में इसकी भूमिका केंद्रीय होती है। ढोलक की थाप के बिना फाग गीत अधूरे लगते हैं। इसकी गूंज और लय होली के उत्सव में चार चाँद लगा देती है। ढोलक की ताल पर गाए जाने वाले फाग गीत न केवल सुनने में मधुर लगते हैं, बल्कि ये गायकों और श्रोताओं में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर देते हैं।

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महिलाएं जिस कुशलता से ढोलक बजाती हैं, वह अपने आप में एक कला है। धीमी, मध्यम और तेज तालों का मिश्रण गीतों में विविधता लाता है। ढोलक की गड़गड़ाहट और फाग गीतों की मधुरता मिलकर एक ऐसा माहौल बनाती है, जिसमें हर कोई झूमने को मजबूर हो जाता है। यह एक ऐसा अनुभव है जो शहरों की चकाचौंध में कहीं खो गया था, लेकिन अब फिर से लोग इसे अपनाने लगे हैं।

लोकप्रिय महिला होली फाग गीत (पूर्ण लिरिक्स)

यहां हम आपके लिए कुछ ऐसे लोकप्रिय फाग गीत लाए हैं, जिनके बोल आपको कंठस्थ करने में आसानी होगी और आप इन्हें ढोलक की ताल पर गाकर होली के रंग में पूरी तरह डूब सकती हैं।

1. फाग गीत: “आज बिरज में होली रे रसिया” (राधा-कृष्ण)

यह गीत राधा-कृष्ण के होली खेलने का मनमोहक वर्णन करता है, जिसमें प्रेम, शरारत और भक्ति का अद्भुत मेल है।

आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया।

कान्हा ने मारी पिचकारी, राधा भीगी सारी
कान्हा ने मारी पिचकारी, राधा भीगी सारी
ओढ़नी भीगी, चोली भीगी, भीगी सारी सारी
आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया।

राधा ने मारी गुलाल, कान्हा के मुख लाल
राधा ने मारी गुलाल, कान्हा के मुख लाल
मुखड़ा चमके, जैसे सूरज, चमके लाल लाल
आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया।

सखियाँ सब मिल होली खेलें, गोपी संग ग्वाल
सखियाँ सब मिल होली खेलें, गोपी संग ग्वाल
ढोलक बाजे, मंजीरा बाजे, बाजे मृदंग ताल
आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया।

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भर भर के मारे रंग, कोई नहीं बचे संग
भर भर के मारे रंग, कोई नहीं बचे संग
नंदगाँव में धूम मची है, सब हो गए मलंग
आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया
आज बिरज में होली रे रसिया।

2. फाग गीत: “होली खेलत नंदलाला” (राधा-कृष्ण)

एक और मनभावन फाग गीत जो नंदलाला और राधा के बीच होली के खेल को दर्शाता है, जिसमें भक्ति और लोक-रंग का संगम है।

होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है
होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है

कान्हा ने मारी पिचकारी, राधा भीगी सारी
कान्हा ने मारी पिचकारी, राधा भीगी सारी
सखियाँ सब मिलकर आईं, रंग की भर पिचकारी
होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है।

राधा ने पकड़ी कान्हा की कलाई, बोली मत कर शरारत भाई
राधा ने पकड़ी कान्हा की कलाई, बोली मत कर शरारत भाई
कान्हा बोले, “आज तो होली है, रंग लगाऊंगा तुझको प्यारी”
होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है।

ढोलक बाजे, मंजीरा बाजे, फाग गावें नर-नारी
ढोलक बाजे, मंजीरा बाजे, फाग गावें नर-नारी
गुलाल उड़त है चारों दिशा में, शोभा लगे अति प्यारी
होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है।

नंदगाँव में धूम मची है, बरसाने में प्यारी
नंदगाँव में धूम मची है, बरसाने में प्यारी
युगल जोड़ी की छटा निराली, जय हो गिरिधारी
होली खेलत नंदलाला, बिरज में धूम मची है।

3. फाग गीत: “देवर मत मारो पिचकारी” (देवर-भाभी की छेड़छाड़)

यह गीत देवर और भाभी के बीच की मीठी तकरार और होली की मस्ती को दर्शाता है, जो भारतीय परिवारों में एक आम और प्यारा दृश्य है।

देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी
देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी

मैं तो जाऊँ पानी भरने, तुम क्यों आए पीछे पड़ने
मैं तो जाऊँ पानी भरने, तुम क्यों आए पीछे पड़ने
मटकी मेरी गिर जाएगी, भीगी जाए मेरी सारी
देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी।

सासुल मेरी देखेगी, ननद मेरी हंसेगी
सासुल मेरी देखेगी, ननद मेरी हंसेगी
भैया मेरे आएंगे, तब तेरी खैर नहीं होगी
देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी।

लाल गुलाल मत डालो, मेरे कपड़े खराब ना कर डालो
लाल गुलाल मत डालो, मेरे कपड़े खराब ना कर डालो
मैं तो होली नहीं खेलूँगी, तुम जाओ अपने घर को
देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी।

देवर हँसकर बोला, भाभी! ये तो होली का है होला
देवर हँसकर बोला, भाभी! ये तो होली का है होला
थोड़ा रंग लगा लो तुम भी, क्या बिगड़ेगा तुम्हारा भला
देवर मत मारो पिचकारी, भीगी जाए मेरी सारी।

4. फाग गीत: “होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे” (सामान्य उल्लास)

यह एक सामान्य होली गीत है जो त्योहार के आगमन, रंगों के उल्लास और सखियों के मिलन का वर्णन करता है।

होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे
होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे

देखो फागुन की बयार, मनवा डोले बार-बार
देखो फागुन की बयार, मनवा डोले बार-बार
सब मिलकर गायें गीत, झूमे सारा संसार
होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे।

लाल, पीले, हरे, नीले, रंगों की है भरमार
लाल, पीले, हरे, नीले, रंगों की है भरमार
कोई मारे पिचकारी, कोई लगाए गुलाल
होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे।

ढोलक बाजे, मंजीरा खनके, पायल की झंकार
ढोलक बाजे, मंजीरा खनके, पायल की झंकार
भंग की खुमारी छाई, सब हैं बेकरार
होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे।

आओ सखियों! मिलकर खेलें, भूल जाएं सब तकरार
आओ सखियों! मिलकर खेलें, भूल जाएं सब तकरार
होली का ये पावन पर्व, खुशियों का है त्योहार
होली आई रे, सखी! रंग भर लाई रे।

फाग गीतों को गाने और ढोलक बजाने के कुछ सुझाव

इन पारंपरिक फाग गीतों को गाते और ढोलक बजाते समय कुछ बातों का ध्यान रखने से आप होली के उत्सव को और भी यादगार बना सकती हैं:

  • सामूहिक गायन: फाग गीतों का असली आनंद तब आता है जब इन्हें समूह में गाया जाए। एक महिला मुख्य गायिका बने और बाकी कोरस में उसका साथ दें।
  • सही ताल और लय: ढोलक की ताल को गीत की लय के अनुसार रखें। शुरुआत धीमी ताल से करें और धीरे-धीरे उसे बढ़ाती जाएं।
  • नवरस का समावेश: गीतों में हास्य, श्रृंगार, भक्ति जैसे विभिन्न रसों का समावेश करें। चेहरे के भाव और शारीरिक हरकतें भी गीतों में जान डालती हैं।
  • नए गीतों को शामिल करना: पारंपरिक गीतों के साथ-साथ, कुछ नए फाग गीत या फिल्मों के होली गीत भी शामिल कर सकती हैं, ताकि सभी पीढ़ियों का जुड़ाव बना रहे।
  • सरलता और सहजता: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप सहज और सरल रहें। होली का त्योहार मस्ती और उल्लास का है, इसलिए बिना किसी झिझक के इसका आनंद लें।

फाग गीतों का बदलता स्वरूप और आधुनिक प्रासंगिकता

समय के साथ लोकगीतों के स्वरूप में कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन फाग गीतों की आत्मा आज भी वही है। आज भी ये गीत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से इन गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे ये हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। कई कलाकार इन पारंपरिक गीतों को आधुनिक संगीत के साथ मिलाकर एक नया स्वरूप दे रहे हैं, जिससे इनकी पहुंच और भी व्यापक हो रही है।

होली के फाग गीत केवल परंपरा का पालन नहीं हैं, बल्कि ये हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और त्योहारों के असली मायने समझाते हैं। ये गीत हमें बताते हैं कि जीवन के हर रंग को उत्सव की तरह जीना चाहिए, गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटनी चाहिए।

निष्कर्ष

महिला होली फाग गीत और ढोलक की ताल भारतीय संस्कृति के ऐसे अविभाज्य अंग हैं, जो होली के त्योहार को एक विशेष पहचान देते हैं। ये गीत न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि हमारी लोक-परंपराओं को जीवित रखते हुए सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम को भी बढ़ावा देते हैं। उम्मीद है कि यह संपूर्ण संग्रह आपको अपनी होली को और भी रंगीन और यादगार बनाने में मदद करेगा। इन गीतों को गाकर आप भी होली के इस पावन पर्व पर अपनी आवाज और अपनी संस्कृति के रंगों को बिखेर सकती हैं। वोरिजिनल.कॉम की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

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🗓️ आज का इतिहास — 15 अक्टूबर

  • 2003। चीन ने अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष यान 'शेंझोउ 5' को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिससे वह अंतरिक्ष में पहुंचने वाला तीसरा देश बना।
  • 1997। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म: इन्होंने भारत के मिसाइल कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
  • 1990। सोवियत संघ के अंतिम नेता मिखाइल गोर्बाचेव को शीत युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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Vivek Hardaha लेखक:

Vivek Hardaha, Madhya Pradesh. M.Sc. (Computer Science) and M.A. (Sociology). Writing since 2014 on science, logic and society in simple words.

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