आज का रंग नवरात्रि की सबसे अस्थिर खोज है। एक व्हाट्सएप लिस्ट दिन एक को सफेद लिखती है, दूसरी पीला, तीसरी नारंगी। तीनों शहरों में लोग कपड़ा पहनकर मंदिर जाते हैं। कोई एक सूची राजपत्र में दर्ज नहीं। नीचे दो चलती रीत हैं, और भोग की वह थाली है जो ज्यादातर घर निभा लेते हैं।

कपड़े की दो लिस्ट
पहली, जो स्कूल और कई उत्तर भारतीय स्टेटस पर चलती है: दिन 1 सफेद, 2 लाल, 3 नीला, 4 पीला, 5 हरा, 6 स्लेटी, 7 नारंगी, 8 मोरपंखी, 9 गुलाबी। दूसरी लिस्ट दिन 1 को पीला या नारंगी रखती है और आगे का क्रम हिला देती है। दोनों को “शास्त्र का रंग” लिखकर न भेजें। लिखें कि घर या मोहल्ले की रीत है।
जो साड़ी या कुर्ता अलमारी में हो, वही पहनें। नवरात्रि के लिए नया कपड़ा जरूरी नहीं। सफेद न हो तो मलाई, लाल न हो तो मैरून। रंग पूजा रोकता नहीं। दुकान का लिंक यहाँ नहीं।
भोग की थाली
दिन 1 घी। कटोरी में थोड़ा देशी घी, या घी की बर्फी। दिन 2 मिश्री या शक्कर। दिन 3 खीर या दूध। दिन 4 मालपुआ। न बने तो कोई भी घी की मिठाई। दिन 5 केला। दिन 6 शहद, थोड़ी सी quantity। दिन 7 गुड़। दिन 8 नारियल। दिन 9 तिल का लड्डू या तिल। एलर्जी हो, मधुमेह हो, बच्चा हो — वह चीज थाली में न रखें। प्रसाद दवा नहीं है। उपवास का हाल डॉक्टर से।
फूल और दीया
गेंदा लगभग हर दिन चल जाता है। शैलपुत्री पर सफेद फूल की बात कई घर करते हैं, चमेली या गुलाब। चंद्रघंटा पर लाल। कालरात्रि पर रात को दीया जलता छोड़ना रीत है, परदा और कागज दूर रखें। भोग पहले चढ़े, परिवार बाद में खाए। बासी प्रसाद अगली सुबह फ्रिज से निकालकर “कल का भोग” न कहें।
स्टेटस पर क्या लिखें
नाम, दिन, कपड़े का रंग जो आपने पहना, और एक लाइन कि रंग क्षेत्र बदलता है। किसी और की लिस्ट गलत घोषित करने की जरूरत नहीं। विजयादशमी का रंग इस नौ दिन की तालिका में न घुसेड़ें।
यह जानकारी हिंदू पंचांग, पुराण-कथा और घर-क्षेत्र की रीत से ली गई है। तिथि स्थानीय पंचांग से बदल सकती है। रंग और भोग एक आधिकारिक सूची नहीं। फल, नौकरी या रोग की गारंटी नहीं। वेबसाइट जिम्मेदार नहीं।