नवदुर्गा का मंत्र खोजने वाला पूरा दुर्गा सप्तशती नहीं ढूँढता। उसे उस दिन का एक नाम मंत्र चाहिए, जिसे सुबह थाली के सामने बोला जा सके। नीचे नौ नाम मंत्र हैं। 108 जाप कई घरों की आदत है। वह नियम नहीं। एक माला, ग्यारह माला, या बिना गिने पाँच मिनट — घर जितना निभाए।

- शैलपुत्री — ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। 11 अक्टूबर।
- ब्रह्मचारिणी — ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। 12 अक्टूबर।
- चंद्रघंटा — ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। 13 अक्टूबर।
- कूष्मांडा — ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। 14 अक्टूबर।
- स्कंदमाता — ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। 15 अक्टूबर।
- कात्यायनी — ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। 16 अक्टूबर।
- कालरात्रि — ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। 17 अक्टूबर।
- महागौरी — ॐ देवी महागौर्यै नमः। 18 अक्टूबर।
- सिद्धिदात्री — ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। 19 अक्टूबर।
बोलने का तरीका
नहाकर, साफ कपड़े में, कलश या तस्वीर की तरफ मुँह करके। माला अंगूठे और मध्यमा से चले, तर्जनी से नहीं। यह भी घर की सिखाई है, शास्त्र की परीक्षा नहीं। बीच में फोन आ जाए तो माला रोक दें, बात पूरी कर फिर वहीं से। संख्या टूटने पर पूरी माला दोहराने की जिद कई घर करते हैं। जरूरी नहीं।
सुबह का जाप खाली पेट की रीत है। शाम की आरती के बाद भी वही नाम मंत्र चलता है। एक दिन का मंत्र अगले दिन मिलाकर न बोलें। दीवार पर आज का नाम लिख देना बच्चों के लिए काफी है।
बीज और ध्यान
शैलपुत्री पर कई घर ह्रीं शिवायै नमः भी बोलते हैं। इसे बीज मंत्र कहा जाता है। बाकी दिनों नाम मंत्र ही काफी माना जाता है। पहले दिन की ध्यान पंक्ति यह है: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। मतलब चाँद सा आधा मुकुट, बैल पर सवार, हाथ में त्रिशूल। यह स्तोत्र का विकल्प नहीं। दुर्गा चालीसा अलग से पढ़ी जाती है, पूरे नौ दिन।
जो गलती होती है
नमः की जगह नमही, शैलपुत्र्यै की जगह शैलपुत्री नमः। अर्थ बिगड़ता नहीं, उच्चारण घर-घर फिसलता है। यदि पोथी में दूसरा पाठ हो तो पोथी मानें। इंटरनेट की एक लाइन पुराने पंडित के कागज से ऊपर नहीं। जाप से नौकरी, रोग या मुकदमा खत्म होने का वादा कोई मंत्र नहीं करता।
यह जानकारी हिंदू पंचांग, पुराण-कथा और घर-क्षेत्र की रीत से ली गई है। तिथि स्थानीय पंचांग से बदल सकती है। रंग और भोग एक आधिकारिक सूची नहीं। फल, नौकरी या रोग की गारंटी नहीं। वेबसाइट जिम्मेदार नहीं।