नवरात्रि में लोग “आज कौन सी देवी है” इसलिए पूछते हैं क्योंकि नौ दिन एक नाम पर नहीं टिके रहते। घटस्थापना वाले दिन से गिनती शुरू होती है। शारदीय नवरात्रि 2026 में यह शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार, से मानी जा रही है और नौवाँ दिन 19 अक्टूबर है। घर का पंचांग एक तिथि आगे-पीछे कर दे तो उसी को मानें। यह चार्ट याद रखने के लिए है, राजपत्र नहीं।
| दिन | तिथि 2026 | देवी | जैसे टाइप होता है |
|---|---|---|---|
| 1 | 11 अक्टूबर | शैलपुत्री | शैलपुत्रि |
| 2 | 12 अक्टूबर | ब्रह्मचारिणी | ब्रह्मचारिनी |
| 3 | 13 अक्टूबर | चंद्रघंटा | चन्द्रघण्टा |
| 4 | 14 अक्टूबर | कूष्मांडा | कुष्मांडा |
| 5 | 15 अक्टूबर | स्कंदमाता | स्कन्दमाता |
| 6 | 16 अक्टूबर | कात्यायनी | कात्यायिनी |
| 7 | 17 अक्टूबर | कालरात्रि | कालरात्री |
| 8 | 18 अक्टूबर | महागौरी | महागौरी |
| 9 | 19 अक्टूबर | सिद्धिदात्री | सिद्धिदात्री |

गिनती कहाँ से शुरू करें
पहले दिन कलश बैठता है, जौ या गेहूँ बोया जाता है, और शैलपुत्री का नाम लिया जाता है। कई घर सुबह सूर्योदय के आसपास पढ़ते हैं, शाम को आरती। अगला नाम अगले सूर्योदय पर बदलता है, दोपहर को नहीं। यदि प्रतिपदा दो दिन फैली हो तो पंडित या स्थानीय पंचांग बताएगा कि घट किस दिन बैठे। वेबसाइट वह मुहूर्त नहीं काट सकती।
हर दिन घर में क्या होता है
दिन एक पहाड़ की बेटी। नया काम, नई पढ़ाई, दुकान का खाता इसी दिन खोलने की आदत कई मोहल्लों में है। दिन दो तप का दिन है। मिठाई में मिश्री रखी जाती है, बात कम और पढ़ाई ज्यादा। दिन तीन चंद्रघंटा। भाल पर घंटे जैसा चाँद। बच्चे इस दिन का नाम सबसे ज्यादा भूलते हैं, इसलिए चार्ट दीवार पर लग जाता है।
दिन चार कूष्मांडा। वर्तनी दो तरह की चलती है, कूष्मांडा और कुष्मांडा। दोनों उसी देवी के लिए खोजे जाते हैं। दिन पाँच स्कंदमाता, गोद में कार्तिकेय। दिन छह कात्यायनी। कन्या पूजन कई घरों में इसी दिन या अष्टमी-नवमी के आसपास होता है, रीत एक नहीं। दिन सात कालरात्रि। रात का रूप। दीया बुझाने की जल्दी नहीं की जाती। दिन आठ महागौरी, सफेद कपड़ा। दिन नौ सिद्धिदात्री। हवन और कन्या भोज अक्सर इसी दिन। विजयादशमी अलग तिथि है, नवमी के साथ मिलाकर न पढ़ें।
गलत स्पेलिंग भी सर्च है
शैलपुत्रि, ब्रह्मचारिनी, चन्द्रघण्टा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायिनी, कालरात्री। फोन इन वर्तनियों से ही खुलता है। मतलब नहीं बदलता। क्रम नहीं बदलता। किसी शहर में दिन तीन को दूसरा नाम नहीं हो जाता।
चार्ट का इस्तेमाल
सुबह उठकर तारीख देखें, तालिका में नाम पढ़ें, वही मंत्र बोलें, वही भोग थाली में रखें। स्टेटस पर पूरा पुराण लिखने की जरूरत नहीं। नाम, दिन और “पंचांग से मिला लें” काफी है। दुर्गा चालीसा पूरे नौ दिन पढ़ी जा सकती है, वह किसी एक दिन की बंधी नहीं।
यह जानकारी हिंदू पंचांग, पुराण-कथा और घर-क्षेत्र की रीत से ली गई है। तिथि स्थानीय पंचांग से बदल सकती है। रंग और भोग एक आधिकारिक सूची नहीं। फल, नौकरी या रोग की गारंटी नहीं। वेबसाइट जिम्मेदार नहीं।