भाषण और व्हाट्सएप स्टेटस के लिए नौ देवी का परिचय लंबी कथा नहीं माँगता। नाम, वाहन, हाथ में क्या है, और वह दिन क्यों गिना जाता है। नीचे वही है। भुजाओं की संख्या घर-घर एक नहीं कही जाती। जहाँ फर्क है, वहाँ लिख दिया है।

शैलपुत्री
हिमालय की पुत्री। सती के बाद पार्वती के जन्म वाली कथा से यह नाम जुड़ता है। वाहन बैल। हाथ में त्रिशूल और कमल। दो या चार भुजा, दोनों वर्णन मिलते हैं। पहला दिन इसी से खुलता है। कलश और जौ इसी सुबह।
ब्रह्मचारिणी
पैदल। वाहन नहीं गिना जाता। एक हाथ में जपमाला, दूसरे में कमंडल। तप का रूप। शिव को पाने के लिए की गई साधना की कथा घरों में सुनाई जाती है। भोग में मिश्री। कपड़ा अक्सर लाल या सफेद, रीत के हिसाब से।
चंद्रघंटा
भाल पर घंटे की आकृति का चाँद, इसलिए नाम। वाहन सिंह, कहीं बाघ कहा जाता है। दस भुजा का वर्णन ज्यादा चलता है: त्रिशूल, गदा, तलवार, कमल। तीसरा दिन। बच्चे नाम भूलें तो “घंटा वाली माँ” काफी है।
कूष्मांडा
आठ भुजा। सिंह। हाथ में कमंडल, धनुष, कमल, अमृत का कलश — वर्णन घटते-बढ़ते हैं। नाम कूष्माण्ड से जोड़ा जाता है। चौथा दिन। वर्तनी कुष्मांडा भी खोज में चलती है।
स्कंदमाता
गोद में स्कंद, यानी कार्तिकेय। वाहन सिंह। चार भुजा का घरेलू वर्णन आम है। पाँचवाँ दिन। केला भोग में रखा जाता है। माँ के रूप पर जोर है, युद्ध वाले रूप पर नहीं।
कात्यायनी
ऋषि कटयान की कथा से नाम। चार भुजा। सिंह। तलवार और कमल। छठा दिन। कई घर कन्या पूजन की तैयारी इसी दिन शुरू करते हैं। अष्टमी तक टालना भी रीत है।
कालरात्रि
काला रूप। वाहन गधा। हाथ में तलवार, कहीं खड्ग और वरद मुद्रा। सातवाँ दिन। रात के दीये जल्दी न बुझाएँ। डराने वाली कहानी बच्चों को सुनाकर व्रत न बिठाएँ। यह रूप रात का है, किसी इंसान का नहीं।
महागौरी
श्वेत वस्त्र। बैल। चार भुजा। आठवाँ दिन। तप के बाद शांत रूप वाली कथा कही जाती है। नारियल भोग में आता है। सफेद कपड़ा न हो तो हल्का रंग चलेगा।
सिद्धिदात्री
नौवाँ दिन। चार भुजा। कमल पर विराजमान वर्णन भी है, सिंह भी। हाथ में चक्र, शंख, गदा, कमल — यह एक चलता वर्णन है। हवन, कन्या भोज और आरती अक्सर यहीं जमा होते हैं। विजयादशमी अगली तिथि है।
यह जानकारी हिंदू पंचांग, पुराण-कथा और घर-क्षेत्र की रीत से ली गई है। तिथि स्थानीय पंचांग से बदल सकती है। रंग और भोग एक आधिकारिक सूची नहीं। फल, नौकरी या रोग की गारंटी नहीं। वेबसाइट जिम्मेदार नहीं।