रात को ठीक 3 बजे आँख खुल गई। कमरा शांत है। लोग कहते हैं यह भूत का समय है। घड़ी का 3 अपने आप आत्मा नहीं बुलाता। शरीर की घड़ी और नींद का चक्र भी इसी पहर में आँख खोल सकते हैं।
यह हर रात हर आदमी के साथ नहीं होता। जो रोज 3 बजे जगता है, उसे वहम से पहले नींद देखनी चाहिए।
नींद टुकड़ों में चलती है
नींद एक लंबी पट्टी नहीं है। करीब 90 मिनट का एक चक्र होता है। हल्की नींद, गहरी नींद, फिर सपने वाली नींद। रात में चार या पाँच चक्र बनते हैं। चक्र के जोड़ पर आँख खुलना आम है। 11 बजे सोए, तो 2:30 या 3 के आसपास एक जोड़ आ सकता है। घड़ी गोल नंबर दिखाए, तो डर लग जाता है। जोड़ तो 2:40 पर भी टूट सकता है।
सुबह से पहले शरीर जागने लगता है
रात के दूसरे हिस्से में कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ता है। यह सुबह जगाने की तैयारी है। कुछ लोगों में यह उठान 3 बजे के आसपास आँख खोल देता है। बुढ़ापे में गहरी नींद कम होती है, इसलिए पहर में जागना बढ़ता है। यह आत्मा का टाइमटेबल नहीं। शरीर का है।
क्या आँख खुलवाता है
फोन की रोशनी। देर की चाय या कॉफी। शराब। नींद आने की गोली बीच में छूटना। पेट खाली होना। पेशाब। बगल के कमरे की आवाज। गर्मी और पंखा। इनमें से एक भी चक्र तोड़ सकता है। तनाव हो, तो दिमाग उसी जोड़े पर विचार शुरू कर देता है। विचार डर बन जाता है। डर और नींद खोलता है।
साँस रुक-रुक कर चले, तो भी जागना होता है। खर्राटे तेज हों, सुबह थकान हो, तो यह भूत नहीं। डॉक्टर स्लीप की जाँच बता सकता है। यह पेज जाँच नहीं लिखता।
3 बजे का किस्सा कहाँ से आया
पुरानी कहानियों में आधी रात को बुरा समय कहा गया। घड़ी जब घर में आई, तो 3 बजे का अंक किस्से में चिपक गया। फिल्मों ने वही अंक बार-बार दिखाया। जो फिल्म देखकर सोता है, उसे 3 बजे की घड़ी पहले से डरावनी लगती है। आँख खुली, नजर घड़ी पर पड़ी, कहानी पूरी हो गई।
कई लोग 1 बजे भी जागते हैं, 4 बजे भी। उनकी कहानी नहीं बनती, क्योंकि फिल्म में वह अंक नहीं है।
क्या कर सकते हो
घड़ी उलटी रखो। समय देखने से दिमाग जाग जाता है। उठकर पानी पी लो, फोन मत खोलो। रोशनी नीली हो, तो नींद और दूर जाती है। वही करवट, वही तकिया। 20 मिनट में नींद न आए, तो दूसरे कमरे में बैठो। बिस्तर को जागने की जगह मत बनाओ।
शाम की चाय 6 बजे के बाद हटाओ। दिन में धूप लो। रात को एक समय पर लेटो। यह नुस्खा इलाज नहीं। हफ्तों से 3 बजे जागना हो, दिन में नींद आए, साँस रुके, तो डॉक्टर।
एडवाइस:
3 बजे आँख खुलना अपने आप भूत नहीं। नींद का चक्र वहाँ टूट सकता है। कॉर्टिसोल सुबह से पहले बढ़ता है। फोन और घड़ी डर बढ़ाते हैं। घड़ी उलटी रखो। रोज का जागना डॉक्टर को दिखाओ। किस्सा फिल्म का है, घड़ी का नियम नहीं।
यह नींद की आम समझ है, इलाज नहीं। लगातार जागना, खर्राटे या दिन की थकान हो तो डॉक्टर से मिलाओ। साइट घड़ी के समय की गारंटी नहीं देती।