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हरतालिका तीज पूजा विधि 2026: सामग्री, स्टेप-बाय-स्टेप विधि और नियम

Festivals Vivek Hardaha Updated: नवम्बर 3, 2026

Hartalika Teej Vrat 2024 ki sampoorna puja vidhi, shubh muhurat, katha aur mahatva.

हरतालिका तीज पूजा विधि 2026: सामग्री, स्टेप-बाय-स्टेप विधि और नियम

हरतालिका तीज हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिए, तथा अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और तपस्या का प्रतीक है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ और ‘आलिका’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ‘सहेली द्वारा हरण’। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती की सहेली उन्हें उनके पिता के घर से हरण करके घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो और वे अपनी तपस्या जारी रख सकें। इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए।

यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम के समय शिव-पार्वती की विशेष पूजा करती हैं। इस गाइड में हरतालिका तीज पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं। 2026 की सही तारीख और मुहूर्त के लिए कृपया हमारी अपडेट गाइड देखें: हरतालिका तीज 2026 — मध्यप्रदेश तारीख, पूजा व मुहूर्त।

हरतालिका तीज का महत्व

हरतालिका तीज का व्रत सुहागन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है। कुंवारी लड़कियां योग्य और मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत रखती हैं। यह व्रत त्याग, तपस्या और प्रेम का प्रतीक है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य प्रेम की याद दिलाता है। विधि-विधान से पूजा करने से माता पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती और भगवान शिव के प्रेम से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनके पिता हिमालय राज ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया था, जिससे पार्वती बहुत दुखी हुईं। अपनी सहेली की सलाह पर वे विवाह से बचने के लिए घने जंगल में चली गईं और वहां रेत से शिवलिंग बनाकर कठोर तपस्या करने लगीं। उन्होंने अन्न-जल त्याग कर केवल पत्तों पर जीवन यापन किया। उनकी इस घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें पति रूप में स्वीकार किया। माता पार्वती की सहेली द्वारा उन्हें हरण कर जंगल ले जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा। इस कथा का श्रवण व्रत के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह त्याग और प्रेम के संदेश को दर्शाता है।

हरतालिका तीज की पूजा सामग्री

हरतालिका तीज की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री को पहले से एकत्र कर लें, ताकि पूजा के समय कोई बाधा न आए। विस्तृत सूची:

  • भगवान की प्रतिमाएं: भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाएं (स्वयं बनानी होती हैं)।
  • पूजा के लिए आवश्यक वस्तुएं:
    • पूजा की चौकी या पाटा
    • स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र (चौकी पर बिछाने के लिए)
    • कलश (जल से भरा हुआ)
    • नारियल
    • पान के पत्ते
    • सुपारी
    • अक्षत (चावल)
    • कुमकुम (रोली)
    • चंदन
    • धूप, दीप (घी का दीपक)
    • अगरबत्ती
    • कपूर
    • माचिस
    • गंगाजल (यदि उपलब्ध हो)
    • स्वच्छ जल
  • पुष्प और पत्तियां:
    • बेलपत्र
    • दूर्वा घास
    • शमी के पत्ते
    • आक के फूल
    • धतूरे का फल और फूल
    • गेंदे के फूल
    • अन्य मौसमी फूल
    • केले के पत्ते (मंडप सजाने के लिए)
  • नैवेद्य और फल:
    • मिठाई (जैसे लड्डू, पेड़ा)
    • पांच प्रकार के फल
    • सूखे मेवे
    • शहद
    • घी
    • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण)
  • सुहाग की सामग्री (माता पार्वती के लिए):
    • लाल साड़ी या चुनरी
    • बिंदी
    • सिंदूर
    • महावर
    • चूड़ियां
    • मेहंदी
    • काजल
    • कंघी
    • शीशा
    • इत्र
  • अन्य: जनेऊ (भगवान शिव के लिए), वस्त्र (भगवान शिव के लिए), दक्षिणा (दान के लिए सिक्के)।

हरतालिका तीज की संपूर्ण पूजा विधि

हरतालिका तीज की पूजा संध्याकाल में या प्रदोष काल में की जाती है। यह पूजा विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक करनी चाहिए।

1. प्रातःकाल की तैयारी और संकल्प

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूरे दिन निर्जला व्रत का संकल्प लें — पूरी श्रद्धा और निष्ठा से इस व्रत का पालन करेंगी।

2. पूजा स्थल की तैयारी

  • घर के एक पवित्र स्थान पर पूजा के लिए चौकी या पाटा स्थापित करें।
  • इस पर एक स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  • केले के पत्तों से एक छोटा मंडप या सुंदर सजावट करें।

3. मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण

  • गंगाजल से शुद्ध की गई मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्वयं बनाएं। यह प्रक्रिया इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग है।
  • इन प्रतिमाओं को चौकी पर स्थापित करें।

4. सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा

  • किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सबसे पहले गणेश जी का आवाहन करें।
  • उन्हें जल, अक्षत, फूल, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें।

5. शिव-पार्वती की पूजा

  • आवाहन: भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें।
  • आसन: उन्हें आसन ग्रहण करने के लिए कहें (मन ही मन)।
  • स्नान: प्रतिमाओं को स्वच्छ जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
  • वस्त्र और श्रृंगार: भगवान शिव को वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री (चुनरी, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी आदि) अर्पित करें।
  • पुष्प और पत्र: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी के पत्ते अर्पित करें। माता पार्वती को लाल फूल और अन्य सुगंधित फूल चढ़ाएं। दूर्वा और अक्षत भी अर्पित करें।
  • धूप-दीप: धूप जलाएं और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • नैवेद्य: फल, मिठाई, शहद और अन्य भोग सामग्री अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें।
  • कथा श्रवण: हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • आरती: अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। आप ‘जय शिव ओंकारा’ और ‘जय अम्बे गौरी’ जैसी आरतियां गा सकती हैं। आरती के बाद कपूर जलाएं।
  • प्रदक्षिणा: संभव हो तो प्रतिमाओं की परिक्रमा करें।
  • क्षमा याचना: पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए भगवान से क्षमा याचना करें।

6. रात्रि जागरण

कई स्थानों पर हरतालिका तीज के दिन महिलाएं रात्रि जागरण करती हैं। इस दौरान भजन-कीर्तन किए जाते हैं और कथाएं सुनी जाती हैं।

7. अगले दिन व्रत का पारण

  • अगले दिन सुबह स्नान के बाद भगवान की पूजा करें।
  • प्रतिमाओं का विसर्जन करें (नदी या किसी पवित्र स्थान पर)।
  • इसके बाद जल और कुछ मीठा खाकर व्रत का पारण करें।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।

हरतालिका तीज 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

📌 2026 तारीख व मुहूर्त

यहाँ पुरानी वर्ष की सटीक घड़ियाँ नहीं दोहराई जा रही हैं। हरतालिका तीज 2026 की सही तिथि, तृतीया काल और पूजा मुहूर्त (मध्यप्रदेश फोकस सहित) के लिए अपडेट गाइड पढ़ें: हरतालिका तीज 2026 तारीख–मुहूर्त गाइड। स्थानीय पंचांग या पंडित जी से भी पुष्टि अवश्य करें।

प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा संध्याकाल/प्रदोष में करने की परंपरा है; सटीक घड़ी क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार तय करें।

हरतालिका तीज व्रत के नियम और सावधानियां

  • यह व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करना होता है।
  • व्रत के दौरान क्रोध, अपशब्द और निंदा से बचें। मन को शांत और पवित्र रखें।
  • रात्रि में सोना वर्जित माना जाता है। रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करना चाहिए।
  • मिट्टी की प्रतिमाओं को अगले दिन विसर्जित करने से पहले उनकी पूजा अवश्य करें।
  • व्रत का पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में ही करें।

निष्कर्ष

हरतालिका तीज का व्रत न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास का भी प्रतीक है। विधि-विधान से व्रत पालन और सच्ची श्रद्धा से शिव-पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत सिखाता है कि कठोर तपस्या और निष्ठा से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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