नई पोस्ट की जानकारी WhatsApp पर पाएं:Join करें

शनिवार का चौघड़िया: दिन और रात का शुभ-अशुभ मुहूर्त, महत्व और सही उपयोग

शनिवार का चौघड़िया: दिन और रात का शुभ-अशुभ मुहूर्त, महत्व और सही उपयोग

🎧
सुनिए — पूरी खबर सिर्फ 1 मिनट में

भारतीय ज्योतिष और पंचांग में ‘चौघड़िया’ का अपना एक विशेष स्थान है। यह दिन और रात के समय को छोटे-छोटे शुभ-अशुभ मुहूर्तों में विभाजित करने का एक प्राचीन तरीका है। खासकर जब बात शनिवार की आती है, तो चौघड़िया का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। शनि देव कर्मों के अनुसार फल देने वाले ग्रह हैं, और उनकी कृपा पाने या उनके अशुभ प्रभावों से बचने के लिए सही समय पर सही कार्य करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

विज्ञापन

यह लेख आपको शनिवार के दिन और रात के चौघड़िया के बारे में विस्तृत जानकारी देगा, ताकि आप अपने महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त का चुनाव कर सकें और अशुभ समय में सावधानी बरत सकें।

चौघड़िया क्या है? इसका ज्योतिषीय महत्व क्या है?

चौघड़िया शब्द ‘चौघड़ी’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘चार घड़ी’। प्राचीन समय में एक घड़ी लगभग 24 मिनट की होती थी। दिन और रात को आठ-आठ भागों में बांटा जाता है, और प्रत्येक भाग को एक चौघड़िया कहा जाता है। इस प्रकार, दिन के आठ और रात के आठ, कुल सोलह चौघड़िया होते हैं। प्रत्येक चौघड़िया का अपना एक ग्रह स्वामी होता है, और उस ग्रह की प्रकृति के अनुसार चौघड़िया का फल शुभ या अशुभ होता है।

  • उत्पत्ति: चौघड़िया का उपयोग मुख्य रूप से यात्रा, व्यापार और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए शुभ समय का निर्धारण करने के लिए किया जाता है। इसकी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है, इसलिए इसके मुहूर्त हर दिन और हर स्थान पर थोड़े भिन्न हो सकते हैं।
  • महत्व: यह हमें बताता है कि कौन सा समय किस कार्य के लिए अनुकूल है और कौन सा प्रतिकूल। इसका पालन करके व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ा सकता है और संभावित बाधाओं से बच सकता है।

शनिवार और शनि देव का विशेष संबंध

शनिवार का दिन भगवान शनि देव को समर्पित है। शनि देव को नवग्रहों में न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। वे व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और उसी के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि की साढ़े साती, ढैया या अन्य अशुभ स्थिति में व्यक्ति को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शनिवार के दिन शुभ चौघड़िया में शनि देव की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य या अन्य महत्वपूर्ण कार्य करने से शनि के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।

विज्ञापन

बहुत से लोग शनिवार को शनि देव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, शनि मंदिरों में दर्शन करते हैं और तेल, तिल, काले वस्त्र जैसी वस्तुओं का दान करते हैं। इन सभी कार्यों के लिए चौघड़िया का ज्ञान बहुत उपयोगी सिद्ध होता है।

शनिवार के दिन का चौघड़िया: शुभ-अशुभ मुहूर्त

शनिवार के दिन के चौघड़िया की शुरुआत सूर्योदय के साथ होती है। यहाँ प्रत्येक चौघड़िया की प्रकृति और उसमें किए जाने वाले या टाले जाने वाले कार्यों का विवरण दिया गया है:

1. रोग चौघड़िया (अशुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया आमतौर पर अशुभ माना जाता है।
  • क्या करें: इस समय में वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़े या रोग संबंधी कार्यों से बचना चाहिए।
  • क्या न करें: कोई नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण लेनदेन शुरू न करें।

2. शुभ चौघड़िया (शुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया शुभ होता है।
  • क्या करें: धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, विवाह संबंधी बातचीत, भूमि पूजन जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
  • क्या न करें: अनावश्यक विवादों से बचें।

3. उद्वेग चौघड़िया (अशुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया भी अशुभ श्रेणी में आता है। इसका स्वामी सूर्य होता है, जो उग्रता का प्रतीक है।
  • क्या करें: इस समय में धैर्य बनाए रखें। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें।
  • क्या न करें: सरकारी कार्य, नए व्यापार की शुरुआत या यात्रा से बचें।

4. चर चौघड़िया (मध्यम/शुभ)

  • प्रकृति: चर का अर्थ है चलायमान। यह चौघड़िया यात्रा और गतिमान कार्यों के लिए मध्यम शुभ होता है।
  • क्या करें: यात्राएं, वाहन खरीदना, कृषि कार्य या ऐसे कार्य जिनमें गतिशीलता आवश्यक हो, किए जा सकते हैं।
  • क्या न करें: स्थायी प्रकृति के बड़े निवेश या गृह प्रवेश जैसे कार्य टालें।

5. लाभ चौघड़िया (शुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया अत्यंत शुभ और लाभदायक होता है।
  • क्या करें: व्यापारिक सौदे, नए उद्यम शुरू करना, लेन-देन, विद्या आरंभ करना या कोई भी धन संबंधी कार्य इस समय में शुभ फल देते हैं।
  • क्या न करें: अनावश्यक जोखिम लेने से बचें।

6. अमृत चौघड़िया (अति शुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया सबसे शुभ माना जाता है, अमृत के समान फलदायी।
  • क्या करें: सभी प्रकार के शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, औषध ग्रहण, नए वस्त्र धारण करना, यात्रा, विवाह संबंधी कार्य इस समय में सफलता प्रदान करते हैं।
  • क्या न करें: इस समय में कोई भी बड़ा अशुभ कार्य न करें।

7. काल चौघड़िया (अशुभ)

  • प्रकृति: यह चौघड़िया अत्यंत अशुभ होता है।
  • क्या करें: इस समय में कोई भी शुभ कार्य न करें। वाद-विवाद, झगड़े या यात्रा से बचें।
  • क्या न करें: किसी भी नए कार्य की शुरुआत, महत्वपूर्ण बातचीत या निवेश से दूर रहें।

शनिवार की रात का चौघड़िया: शुभ-अशुभ मुहूर्त

जिस प्रकार दिन में चौघड़िया होते हैं, उसी प्रकार सूर्यास्त के बाद से अगले सूर्योदय तक रात के चौघड़िया होते हैं। इनका भी अपना महत्व होता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो रात में कार्य करते हैं या विशेष साधना करते हैं। रात के चौघड़िया भी दिन के चौघड़िया के समान ही शुभ-अशुभ फल देते हैं, बस उनके आने का क्रम भिन्न होता है।

विज्ञापन

रात के चौघड़िया भी मुख्य रूप से अमृत, चर, लाभ (शुभ) और रोग, काल, उद्वेग (अशुभ) प्रकृति के होते हैं। रात के समय, विशेषकर शनिवार को, शनि देव से संबंधित साधना या मंत्र जाप करना अधिक फलदायी हो सकता है, बशर्ते वह शुभ चौघड़िया में किया जाए।

शनिवार के चौघड़िया का सही उपयोग कैसे करें?

चौघड़िया का सही उपयोग करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • स्थानीय पंचांग: चौघड़िया के समय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं, जो स्थान-स्थान पर भिन्न होते हैं। इसलिए, अपने स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय ज्योतिष ऐप का उपयोग करके सटीक समय की जानकारी प्राप्त करें।
  • राहुकाल और यमगंड: चौघड़िया के साथ-साथ राहुकाल और यमगंड जैसे अन्य अशुभ समयों पर भी ध्यान दें। यदि कोई चौघड़िया शुभ हो, लेकिन उसी समय राहुकाल भी हो, तो उस कार्य को टालना ही बेहतर होता है।
  • नियत कर्म: दैनिक नित्यकर्मों (जैसे भोजन, स्नान) के लिए चौघड़िया देखने की आवश्यकता नहीं होती। इसका उपयोग विशेष और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए ही किया जाता है।
  • इरादे की शुद्धता: ज्योतिषीय मुहूर्तों के साथ-साथ आपके कर्मों की शुद्धता और इरादे भी महत्वपूर्ण होते हैं। शुभ मुहूर्त में किया गया गलत कार्य भी शुभ फल नहीं देगा।

शनिवार को शनि देव को प्रसन्न करने के अन्य उपाय (चौघड़िया के साथ)

चौघड़िया के शुभ-अशुभ समय का ध्यान रखते हुए, आप शनिवार को शनि देव को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

  • शनिवार व्रत: शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार का व्रत रखना अत्यंत फलदायी होता है। यह व्रत शुभ चौघड़िया में ही शुरू करें।
  • शनि मंत्र का जाप: ॐ शं शनैश्चराय नमः या ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः जैसे शनि मंत्रों का जाप शुभ चौघड़िया में करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
  • दान-पुण्य: काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र, उड़द दाल, लोहा आदि का दान गरीबों और जरूरतमंदों को करें। यह कार्य ‘लाभ’ या ‘अमृत’ चौघड़िया में करना विशेष शुभ होता है।
  • हनुमान जी की पूजा: माना जाता है कि हनुमान जी की पूजा करने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं और उनके अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनिवार को शुभ चौघड़िया में हनुमान चालीसा का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • पीपल की पूजा: शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

शनिवार का चौघड़िया हमें शनि देव के प्रभाव को समझते हुए अपने कार्यों को नियोजित करने का एक सरल और प्रभावी तरीका प्रदान करता है। शुभ चौघड़िया में किए गए कार्य अक्सर सफलता और सकारात्मक परिणाम लाते हैं, जबकि अशुभ चौघड़िया में सावधानी बरतने से संभावित परेशानियों से बचा जा सकता है। यह सिर्फ एक ज्योतिषीय गणना नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन और सही समय पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा भी है। याद रखें, कर्म ही प्रधान है, और शुभ मुहूर्त में किए गए नेक कर्म ही हमें शनि देव की सच्ची कृपा दिलाते हैं।

विज्ञापन

अध्यात्म और आस्था के फ्री टूल

सभी देखें →

🗓️ आज का इतिहास — 15 अक्टूबर

  • 2003। चीन ने अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष यान 'शेंझोउ 5' को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिससे वह अंतरिक्ष में पहुंचने वाला तीसरा देश बना।
  • 1997। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म: इन्होंने भारत के मिसाइल कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
  • 1990। सोवियत संघ के अंतिम नेता मिखाइल गोर्बाचेव को शीत युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पूरी जानकारी ›
Vivek Hardaha लेखक:

Vivek Hardaha, Madhya Pradesh. M.Sc. (Computer Science) and M.A. (Sociology). Writing since 2014 on science, logic and society in simple words.

Vista Hub अब WhatsApp पर नई पोस्ट और फ्री टूल्स की अपडेट सीधे WhatsApp पर पाएं। Join करें →

🆕 मिलती-जुलती पोस्ट

Navratri Mantra Jaap for 9 Days: नौ दिनों के मंत्र और जाप विधि Navratri Mantra Jaap for 9 Days: नौ दिनों के मंत्र और जाप विधि अध्यात्म और आस्था पूजा में आँसू, जम्हाई या शरीर काँपना: क्या यह माता का संकेत है? पूजा में आँसू, जम्हाई या शरीर काँपना: क्या यह माता का संकेत है? अध्यात्म और आस्था नवरात्रि में मंत्र गलत पढ़ जाए या दुर्गा पाठ अधूरा रह जाए तो क्या करें? नवरात्रि में मंत्र गलत पढ़ जाए या दुर्गा पाठ अधूरा रह जाए तो क्या करें? अध्यात्म और आस्था नवरात्रि में चौराहे पर नींबू, सिंदूर और टोटका दिखे तो क्या करें? नवरात्रि में चौराहे पर नींबू, सिंदूर और टोटका दिखे तो क्या करें? अध्यात्म और आस्था
विज्ञापन
नवरात्रि में नींबू, नारियल और बकरे की बलि क्यों देते हैं? नवरात्रि में नींबू, नारियल और बकरे की बलि क्यों देते हैं? अध्यात्म और आस्था नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और गुप्त साधना: सच, मान्यताएँ और सावधानियाँ नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और गुप्त साधना: सच, मान्यताएँ और सावधानियाँ अध्यात्म और आस्था