जुलाई की पहली झमाझम बारिश और गमले में लगा नया पौधा दो दिन में सड़ गया? अक्सर हम सावन आते ही नर्सरी से महंगे पौधे खरीद लाते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने से मानसून की यही नमी पौधों की जड़ों को गला देती है। अगर आप इस सावन अपने घर को हरा-भरा बनाना चाहते हैं, तो जानिए वे कौन से पौधे हैं जो बारिश के पानी में सबसे तेजी से अपनी जड़ें फैलाते हैं।
सावन की बारिश और पौधों की ग्रोथ का सीधा कनेक्शन
मानसून का महीना गार्डनिंग के शौकीनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता। हवा में नमी और आसमान से गिरने वाला प्राकृतिक पानी पौधों के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है। हालांकि, कई लोग शिकायत करते हैं कि सावन में लगाए पौधे भी गल जाते हैं।

इसका असली कारण पौधों का चुनाव और रूट-रॉट (Root Rot) यानी जड़ों का सड़ना होता है। जब आप ऐसे पौधे चुनते हैं जिन्हें ज्यादा पानी की आदत नहीं होती, तो लगातार बारिश उन्हें नुकसान पहुंचाती है। इसलिए इस मौसम में वही पौधे लगाने चाहिए जिनकी जड़ें नमी को बर्दाश्त कर सकें और तेजी से नई कलियां निकाल सकें।
सावन के महीनों में हाई ह्यूमिडिटी (High Humidity) के कारण कटिंग से नए पौधे तैयार करना सबसे आसान होता है। अगर आप सही वैरायटी चुनेंगे तो महज 7 से 10 दिनों के अंदर आपको नए पत्ते निकलते दिख जाएंगे।
1. तुलसी का पौधा: सावन में लगाने का सबसे सही समय
सावन के पवित्र महीने में घर में तुलसी (Tulsi) लगाना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से शुभ माना जाता है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी यह मौसम तुलसी के विकास के लिए सबसे बेहतरीन है। इस मौसम में हवा में मौजूद नमी तुलसी के बीजों और मंजरी को तेजी से अंकुरित होने में मदद करती है।
अगर आपके पास पुराना तुलसी का पौधा है, तो उसकी ऊपर की 3-4 इंच की हरी टहनी काट कर मिट्टी में दबा दें। सावन की बारिश में यह कटिंग बिना किसी खास खाद के भी मात्र एक हफ्ते में नई जड़ें पकड़ लेती है।
बस एक बात का ध्यान रखें कि गमले का ड्रेनेज होल (Drainage Hole) बिल्कुल खुला होना चाहिए। तुलसी की जड़ों में अगर सावन का पानी जमा रह गया, तो पत्तियां काली पड़कर गिरने लगती हैं।
2. मनी प्लांट और फिलोडेंड्रॉन: बेलों की अंधाधुंध ग्रोथ
हर घर की शान माना जाने वाला मनी प्लांट (Money Plant) सावन के मौसम में दोगुनी रफ्तार से बढ़ता है। इसकी वजह यह है कि मनी प्लांट की स्टेम पर छोटी-छोटी एरियल रूट्स (Aerial Roots) यानी हवा में लटकने वाली जड़ें होती हैं, जो मानसून की नमी को सीधे हवा से सोख लेती हैं।
अगर आप सावन में मनी प्लांट की एक छोटी सी सिंगल नोड (पत्ते के पास का हिस्सा) काटकर पानी या सीधे गमले की मिट्टी में लगा देंगे, तो यह कभी फेल नहीं होगी। बारिश का पानी मिलते ही इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से जकड़ लेती हैं।
सावन में मनी प्लांट लगाने का आसान तरीका:
- ऐसी टहनी चुनें जिसमें पहले से छोटी भूरी जड़ें दिखाई दे रही हों।
- वेल-ड्रेंड सॉइल (बालू मिश्रित मिट्टी) का इस्तेमाल करें।
- शुरुआती दो-तीन दिन पौधे को सीधे बहुत तेज बारिश से बचाकर बालकनी की छांव में रखें।
3. पारजात (हरसिंगार): खुशबूदार फूलों का राजा
पारिजात या हरसिंगार के पौधे को मानसून की शुरुआत में लगाना सबसे उत्तम रहता है। सावन के बीतते-बीतते इसमें नई शाखाएं आने लगती हैं और शरद ऋतु की शुरुआत में पूरा पौधा सफेद और नारंगी रंग के अत्यंत खुशबूदार फूलों से भर जाता है।
हरसिंगार की हार्डवुड कटिंग (Hardwood Cutting) यानी थोड़ी पक्की लकड़ी वाली टहनी सावन में बहुत जल्दी जड़ें बनाती है। अगर आप नर्सरी से भी पारिजात का नया पौधा ला रहे हैं, तो सावन की रिमझिम बारिश उसे नए वातावरण में सेट होने में मदद करती है।
इस पौधे को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां सावन के बाद भी दिन में कम से कम 4-5 घंटे की धूप मिल सके। इसकी जड़ें काफी मजबूत होती हैं और यह बरसात के मौसम को आसानी से झेल लेता है।
4. स्नेक प्लांट और जास्मिन (मोगरा)
अगर आप इनडोर एयर-प्यूरीफायर पौधे की तलाश में हैं, तो स्नेक प्लांट (Snake Plant) सावन में बेझिझक लगाएं। स्नेक प्लांट की एक पत्ती को काटकर अगर आप गीली मिट्टी में दबा देंगे, तो सावन की नमी के कारण उस पत्ती के नीचे से छोटे-छोटे बेबी प्लांट्स निकलने शुरू हो जाते हैं।
वहीं दूसरी तरफ खुशबू के शौकीनों के लिए मोगरा या जैस्मिन (Jasmine) की कटिंग लगाने का यह सबसे पीक सीजन है। मोगरे के पौधे को सावन में हल्की प्रूनिंग (छंटाई) की जरूरत होती है। छंटाई के बाद बारिश का पानी पड़ते ही इसमें ढेरों नई कलियां और शाखाएं फूट पड़ती हैं।
मोगरा एक हेवी फीडर पौधा है, इसलिए सावन की शुरुआत में ही गमले की मिट्टी में थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की पुरानी खाद मिला देना फायदेमंद होता है।
मिट्टी की सही तैयारी: जो पौधों को गलने से बचाएगी
सावन में पौधे न जमने की सबसे बड़ी वजह खराब मिट्टी होती है। अगर आपकी मिट्टी चिकनी है और पानी रोक कर रखती है, तो मानसून में कोई भी पौधा जीवित नहीं रह पाएगा। इसलिए पौधे लगाने से पहले गमले का पॉटिंग मिक्स (Potting Mix) सही तरीके से तैयार करना बेहद जरूरी है।
सावन के लिए सबसे आदर्श पॉटिंग मिक्स बनाने के लिए 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% बालू (रेत या रीवर सैंड) और 20% कंपोस्ट मिलाएं। बालू मिलाने से गमले में अतिरिक्त पानी टिकेगा नहीं और सीधे नीचे के छेद से बाहर निकल जाएगा।
साथ ही, मिट्टी में चुटकी भर हल्दी पाउडर या नीम खली मिला दें। बारिश के मौसम में मिट्टी में फंगस लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, और ये प्राकृतिक चीजें पौधे की नाजुक जड़ों को फंगल इन्फेक्शन से सुरक्षित रखती हैं।
सावन में गार्डनिंग करते समय ये 3 गलतियां बिल्कुल न करें
अक्सर लोग सावन में पौधों की अति-देखभाल के चक्कर में उन्हें नुकसान पहुंचा बैठते हैं। पहली बड़ी galti है ओवर-वाटरिंग (Over-watering)। जब रोज बारिश हो रही हो, तब गमले में अलग से पानी देने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह छूकर देखें, जब वह सूखी लगे तभी पानी दें।
दूसरी गलती है बारिश के दिनों में पौधों में केमिकल फर्टिलाइजर यानी रासायनिक खाद डालना। तेज बारिश में यह खाद पानी के साथ बह जाती है और जड़ों को जला सकती है। सावन में हमेशा हल्की जैविक खाद का ही प्रयोग करें।
तीसरी बात, नए लगाए गए पौधों को तुरंत तेज तूफानी बारिश के नीचे न छोड़ें। जब तक कटिंग में नई पत्तियां न आ जाएं, उसे किसी शेड या ऐसी जगह रखें जहां बारिश की हल्की फुहारें तो पड़ें लेकिन तेज थपेड़ों से पौधा टूटे नहीं।
Vivek Bhai ki Advice
सावन के मौसम में पौधे लगाना एक तरह से कुदरत के सबसे आसान दौर का फायदा उठाना है। जब हवा में ही इतनी नमी हो कि बिना मेहनत जड़ें फूटने लगें, तो नर्सरी से महंगे-महंगे पौधे खरीदने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। आप अपने पड़ोस या दोस्तों के घर से तुलसी, मनी प्लांट या मोगरा की टहनी (कटिंग) मांगकर ला सकते हैं और गमले में रोप सकते हैं।
लेकिन याद रखिए, गार्डनिंग में सबसे बड़ा रोल पौधे का नहीं बल्कि आपकी गमले की मिट्टी और ड्रेनेज (Drainage) का होता है। अगर पानी गमले के नीचे से 5 सेकेंड में बाहर नहीं निकल रहा, तो सावन का यही पानी आपके पौधे का दुश्मन बन जाएगा। लोग पौधे खरीद लाते हैं लेकिन गमले के नीचे का छेद चेक करना भूल जाते हैं, जिससे जड़ें सड़ जाती हैं।
तो इस सावन, सिर्फ पौधे खरीदिए मत, बल्कि सही पॉटिंग मिक्स बनाकर कटिंग से नए पौधे उगाने का मज़ा लीजिए। अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो मनी प्लांट और स्नेक प्लांट से करें, ये कभी निराश नहीं करते।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सावन में पौधे की कटिंग कितने दिन में जड़ पकड़ लेती है?
सावन के मौसम में हवा में नमी अधिक होने के कारण ज़्यादातर पौधों की कटिंग्स 7 से 12 दिनों के भीतर नई जड़ें विकसित कर लेती हैं।
क्या सावन में गमले में रोज पानी देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। अगर गमला खुले आसमान के नीचे है और बारिश हो रही है, तो अलग से पानी न दें। अत्यधिक पानी देने से जड़ें गल सकती हैं।
बरसात में पौधों को फंगस से कैसे बचाएं?
मिट्टी तैयार करते समय उसमें नीम खली या थोड़ा सा हल्दी पाउडर मिलाएं। पत्तियों पर फंगस दिखे तो एक लीटर पानी में चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाकर स्प्रे करें।
सावन में कौन सी खाद सबसे अच्छी होती है?
सावन में रासायनिक खाद के बजाय गोबर की सड़ी हुई पुरानी खाद या वर्मीकम्पोस्ट जैसी हल्की जैविक खाद ही इस्तेमाल करनी चाहिए।
Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।