नवरात्रि की शाम हो और घर के आंगन में धूप-अगरबत्ती की महक के बीच सुन मेरी देवी मां पर्वत वासिनी की आरती न गूंजे, ऐसा कम ही होता है। दुर्गा पूजा और नवरात्रि के पावन पर्व पर मां शेरावाली की आराधना के लिए यह प्रसिद्ध जस एवं आरती बेहद श्रद्धा के साथ गाई जाती है। जब ढोलक की थाप पर भक्त मां की महिमा का बखान करते हैं, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठता है।
पर्वत वासिनी मां दुर्गा की आरती का आध्यात्मिक महत्व
मां दुर्गा को पर्वत वासिनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे हिमवान और विंध्याचल जैसे पवित्र पर्वतों पर निवास करके समूचे ब्रह्मांड की रक्षा करती हैं। इस आरती में भक्त मां के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए उनकी असीम कृपा का धन्यवाद करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से नवरात्रि में देवी के इस जस को गाते हैं, उनके जीवन के सभी भय और कष्ट दूर हो जाते हैं।
पूजा और जस गायन में इस लिरिक्स इमेज का उपयोग कैसे करें?
अक्सर पूजा के समय या डांडिया-गरबा के दौरान आरती के पूरे बोल याद नहीं रहते। इस समस्या को आसान बनाने के लिए हमने ‘सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी’ आरती का सुंदर पाठ्य रूप (Text Card) तैयार किया है।
- दैनिक पूजा में: आप अपने फोन में इस इमेज को सेव करके आरती के समय आसानी से पढ़ सकते हैं।
- पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में: नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर अपने परिजनों और मित्रों को यह भक्ति संदेश भेज सकते हैं।
- सोशल मीडिया स्टेटस: इसे अपने व्हाट्सएप स्टेटस या इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करके भक्ति का माहौल बनाएं।
विवेक भाई की सलाह
भक्ति सिर्फ आरती गा लेने तक सीमित नहीं है। जब आप मां दुर्गा की आरती गाते हैं, तो उसके एक-एक शब्द के अर्थ को समझें। ध्यानू भगत की भांति निश्छल भाव से जब आप मां के सामने शीश नवाते हैं, तभी पूजा सफल मानी जाती है। अपने भीतर के अहंकार और नकारात्मक विचारों को समाप्त करना ही मां दुर्गा की सच्ची आराधना है। इस नवरात्रि, आरती गाने के साथ-साथ किसी जरूरतमंद की मदद करने का भी संकल्प लें।