सुबह की धूप में चाय की चुस्की लेते वक्त अगर आपके पैर में हल्की सी खुजली हुई है, तो उसे सिर्फ आम मच्छर का काटना समझकर नजरअंदाज मत कीजिए। हममें से ज्यादातर लोग मानते हैं कि मच्छर सिर्फ रात में अंधेरा होने पर हमला करते हैं, लेकिन डेंगू फैलाने वाला Aedes aegypti मच्छर दिन के उजाले का शिकारी है। आखिर यह दिन में ही क्यों काटता है और कैसे बच सकते हैं, आइए समझते हैं।
डेंगू का मच्छर दिन में ही सबसे ज्यादा सक्रिय क्यों होता है?
साधारण मच्छर अक्सर शाम ढलने या रात के अंधेरे में खून की तलाश में निकलते हैं, लेकिन डेंगू का मच्छर यानी Aedes aegypti पूरी तरह से दिन के उजाले पर निर्भर रहता है। इसकी आंखों की बनावट और जैविक घड़ी (biological clock) ऐसी होती है कि यह रोशनी में बेहतर देख पाता है। सूरज की रोशनी में इसे अपने शिकार की पहचान करने और उड़ने में आसानी होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मच्छर सूरज निकलने के बाद लगभग दो से तीन घंटे और शाम को सूरज ढलने से कुछ घंटे पहले सबसे ज्यादा आक्रामक होता है। अगर आपको लगता है कि दोपहर में या सुबह के वक्त आप पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो यह आपकी बहुत बड़ी भूल हो सकती है। दिन के समय की गई थोड़ी सी लापरवाही भी अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी है।
शरीर के निचले हिस्सों पर ही हमला क्यों करता है यह मच्छर?
आपने शायद कभी गौर किया होगा कि डेंगू का मच्छर ज्यादातर टखनों, पैरों और घुटनों के पास ही काटता है। इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक वजह है। यह मच्छर बहुत ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ सकता। जमीन से आमतौर पर दो से तीन फीट की ऊंचाई तक ही इसकी उड़ान सीमित होती है।
इसके अलावा, यह मच्छर काफी चालाक होता है। यह इंसान के हाथ या चेहरे के पास जाने से बचता है क्योंकि वहां से इसे मारे जाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए यह पैरों और टखनों के आसपास चुपचाप हमला करता है जहां हमारी नजर आसानी से नहीं जाती। यही वजह है कि डॉक्टर दिन के समय पैरों को पूरी तरह ढककर रखने की सलाह देते हैं।
घर के अंदर कहां छिपकर बैठता है एडीज मच्छर?
डेंगू का मच्छर खुले मैदानों से ज्यादा इंसानी आबादी और घरों के अंदर रहना पसंद करता है। इसे ‘डोमेस्टिक मॉस्किटो’ भी कहा जाता है। काटने के बाद यह तुरंत उड़कर किसी ठंडी, अंधेरी और शांत जगह पर छिप जाता है। आपके घर के अंदर ऐसे कई कोने हैं जो इस मच्छर के पसंदीदा ठिकाने बनते हैं।
घर के पर्दे के पीछे, सोफे के निचले हिस्से में, अलमारी के किनारों पर, लटकाए हुए गंदे कपड़ों के बीच और बाथरूम के ठंडे कोनों में यह अक्सर आराम करता है। daylight में शिकार करने के बाद यह इन्हीं अंधेरी जगहों में छिपकर अपनी ऊर्जा बचाता है। इसलिए सिर्फ बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी दिन के समय सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
साधारण मच्छर और डेंगू के मच्छर में क्या अंतर है?
हर काटता हुआ मच्छर डेंगू नहीं फैलाता, इसलिए साधारण मच्छर और डेंगू फैलाने वाले मच्छर के बीच का फर्क समझना बहुत आवश्यक है। एडीज मच्छर दिखने में काफी अलग और पहचाने जाने योग्य होता है। इसके शरीर और पैरों पर सफेद और काले रंग की धारियां (tiger-like stripes) बनी होती हैं, जिसके कारण इसे कभी-कभी ‘टाइगर मॉस्किटो’ भी कहा जाता है।
साधारण मच्छर अक्सर काटते समय तेज भनभनाहट की आवाज करते हैं, लेकिन डेंगू का मच्छर बेहद खामोशी से आता है और बिना किसी आवाज के काटता है। इसका काटना इतना हल्का हो सकता है कि आपको तुरंत अहसास भी न हो। इसके अलावा, साधारण गंदे नालियों के पानी में पनपते हैं, जबकि डेंगू का मच्छर सिर्फ साफ और स्थिर पानी में ही अंडे देता है।
दिन के समय डेंगू से बचाव के सबसे असरदार तरीके
जब खतरा दिन के उजाले में हो, तो सुरक्षा के उपाय भी उसी हिसाब से करने होंगे। केवल रात में मच्छरदानी लगा लेना डेंगू से बचने के लिए काफी नहीं है। आपको अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे ताकि आप और आपका परिवार इस बीमारी की चपेट में आने से बचे रहें।
दिन में बाहर निकलते समय या घर पर रहते हुए भी हल्के रंग के ऐसे कपड़े पहनें जो पूरे शरीर को ढकें। गहरे रंग के कपड़े मच्छरों को अपनी ओर ज्यादा आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, दिन के समय त्वचा पर मच्छर भगाने वाली क्रीम (mosquito repellent) का इस्तेमाल करें। बच्चों को स्कूल भेजते समय उनके कपड़ों पर फैब्रिक रोल-ऑन या पैच जरूर लगाएं ताकि क्लासरूम में भी वे सुरक्षित रह सकें।
साफ पानी भी बन सकता है जानलेवा: इन गलतियों से बचें
ज्यादातर लोगों को लगता है कि डेंगू सिर्फ आसपास फैली गंदगी या गंदे पानी से फैलता है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। डेंगू की मादा मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में ही अपने अंडे देती है। आपके घर में रखी छोटी सी चीज भी इनके पनपने की नर्सरी बन सकती है।
कूलर का पानी, मनी प्लांट की बोतलें, पक्षियों के पीने के बर्तन, गमलों की ट्रे और छत पर पड़े पुराने टायर या टूटे डिब्बे—इन सबमें जमा साफ पानी डेंगू के मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। सप्ताह में कम से कम एक बार इन सभी बर्तनों को पूरी तरह खाली करके सुखाना बेहद जरूरी है, वरना एक छोटा सा पानी का बर्तन पूरे परिवार के लिए खतरा बन सकता है।
Vivek Bhai ki Advice
देखिए, जब बात हेल्थ और फैमिली की सेफ्टी की हो, तो आधी-अधूरी जानकारी सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। हम अक्सर रात में तो ऑल-आउट या कॉइल जलाकर सो जाते हैं, लेकिन दिन के समय पूरी तरह बेफिक्र रहते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि डेंगू का असली खतरा दिन के उजाले में ही मंडराता है, खासकर सुबह और शाम के वक्त।
कई बार लोग सोचते हैं कि साफ पानी से क्या नुकसान हो सकता है, लेकिन वही साफ पानी डेंगू के मच्छर का सबसे बड़ा ब्रीडिंग ग्राउंड है। अगर आप अपने घर के कूलर, गमले या मनी प्लांट के पानी को हफ़्ते में एक बार नहीं बदलते, तो आप अनजाने में ही सही, खतरे को खुद न्योता दे रहे हैं। मच्छर भगाने के उपाय सिर्फ रात के लिए नहीं, दिन के लिए भी उतने ही जरूरी हैं।
आजकल के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में छोटी-छोटी लापरवाहियों का नतीजा प्लेटलेट्स काउंट गिरने के रूप में भुगतना पड़ता है। इसलिए स्मार्ट बनिए—खुद भी फुल स्लीव्स के कपड़े पहनिए और बच्चों को भी दिन में बिना मॉस्किटो रिपेलेंट लगाए बाहर न जाने दें। थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को अस्पताल के चक्कर काटने से आसानी से बचा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डेंगू का मच्छर किस समय सबसे ज्यादा काटता है?
डेंगू का मच्छर मुख्य रूप से दिन में काटता है। सूर्योदय के बाद 2 से 3 घंटे और शाम को सूर्यास्त से कुछ घंटे पहले यह सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है।
क्या डेंगू का मच्छर रात में नहीं काटता?
यह मच्छर मुख्य रूप से दिन का शिकारी है, लेकिन अगर रात में कमरे में तेज रोशनी जल रही हो, तो यह रात के समय भी काट सकता है।
डेंगू मच्छर के काटने के कितने दिन बाद लक्षण दिखते हैं?
संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 10 दिनों के भीतर व्यक्ति में डेंगू के लक्षण जैसे तेज बुखार, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द नजर आने लगते हैं।
डेंगू के मच्छर को कैसे पहचानें?
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के शरीर और पैरों पर काले और सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। यह आकार में मध्यम होता है और बिना भनभनाहट के उड़ता है।
Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।