भारत की आध्यात्मिक भूमि पर, देवी-देवताओं की स्तुति और आराधना का एक महत्वपूर्ण अंग है उनकी आरती। आरती सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच एक गहरा भावनात्मक सेतु है। इन्हीं आरतियों में से एक है जय अंबे गौरी आरती, जो मां दुर्गा, मां शक्ति के गौरी स्वरूप को समर्पित है। यह आरती भक्तों के हृदय में असीम श्रद्धा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। विशेषकर नवरात्रि के पावन पर्व पर, जब हर घर और मंदिर में मां दुर्गा की उपासना की जाती है, तब यह आरती एक विशेष स्थान रखती है।
vhoriginal.com पर आज हम आपके लिए लेकर आए हैं जय अंबे गौरी आरती के संपूर्ण बोल, इसका गहरा अर्थ और इस पवित्र आरती का महत्व। हमारा उद्देश्य है कि आप न केवल इस आरती को गा सकें, बल्कि इसके हर शब्द के पीछे छिपी भक्ति और शक्ति को भी समझ सकें।
जय अंबे गौरी आरती का महत्व (Significance of Jai Ambe Gauri Aarti)
मां अंबे गौरी, देवी दुर्गा का वह सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप हैं जो भक्तों को अभय प्रदान करती हैं और उनके समस्त दुखों का हरण करती हैं। इस आरती का पाठ करने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं:
- मन की शांति: आरती के मधुर और भक्तिपूर्ण बोल मन को शांत करते हैं, तनाव और चिंताएं दूर होती हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: मां गौरी की स्तुति से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जिससे निराशा दूर होती है।
- इच्छा पूर्ति: सच्चे मन से की गई आरती मां गौरी को प्रसन्न करती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- भय मुक्ति: मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती करने से सभी प्रकार के भय और असुरक्षा की भावना दूर होती है।
- कष्टों का निवारण: मां गौरी अपने भक्तों के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करने वाली मानी जाती हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति: नियमित रूप से आरती करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है और वह ईश्वर के करीब महसूस करता है।
जय अंबे गौरी आरती के बोल (Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in Hindi)
यहां प्रस्तुत हैं जय अंबे गौरी आरती के संपूर्ण बोल, जिन्हें आप अपनी पूजा में शामिल कर सकते हैं और मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं:
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥1
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥2
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥3
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥4
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥5
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥6
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥7
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥8
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥9
तुम हो जग की माता, तुम ही हो भरतार।
भक्तन की दुख हरता, सुख-संपति करतार॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥10
भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥11
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥12
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥13
जय अंबे गौरी आरती का अर्थ (Meaning of Jai Ambe Gauri Aarti)
आरती के शब्दों को समझना भक्ति को और गहरा करता है। आइए, इस आरती के प्रत्येक पद के अर्थ को विस्तार से जानें:
प्रथम पद: स्तुति और आह्वान
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥1
अर्थ: हे मां अंबे गौरी, आपकी जय हो! हे श्यामा गौरी (मां का एक और रूप), आपकी जय हो! आपको तीनों देव – हरि (विष्णु), ब्रह्मा और शिव – दिन-रात ध्यान करते हैं और आपकी पूजा करते हैं।
द्वितीय पद: मां का दिव्य स्वरूप
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥2
अर्थ: आपकी मांग में सिंदूर सुशोभित है और मस्तक पर कस्तूरी का टीका लगा है। आपकी दोनों आंखें अत्यंत उज्ज्वल और प्रकाशमान हैं, और आपका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।
तृतीय पद: वेशभूषा का वर्णन
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥3
अर्थ: आपका शरीर सोने के समान चमकीला है और आपने लाल वस्त्र धारण किए हुए हैं, जो आप पर अत्यंत शोभायमान हैं। आपके गले में लाल फूलों की माला सुशोभित है।
चतुर्थ पद: वाहन और अस्त्र-शस्त्र
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥4
अर्थ: आपका वाहन सिंह (केहरि) है, जो अत्यंत शोभायमान है। आपने हाथों में खड्ग (तलवार) और खप्पर (खोपड़ी रूपी पात्र) धारण किए हुए हैं। देवता, मनुष्य और मुनिजन आपकी सेवा करते हैं, क्योंकि आप उनके दुखों को हरने वाली हैं।
पंचम पद: आभूषण और तेज
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥5
अर्थ: आपके कानों में कुंडल सुशोभित हैं और नाक के अग्रभाग पर मोती चमक रहा है। आपकी ज्योति करोड़ों चंद्रमाओं और सूर्यों के समान प्रकाशित होती है।
षष्ठ पद: राक्षसों का संहार
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥6
अर्थ: आपने शुंभ और निशुंभ जैसे शक्तिशाली राक्षसों का नाश किया है और महिषासुर जैसे महाबलशाली असुर का वध किया है। आपकी आंखें धूम्र विलोचन (धुएं जैसी लाल) हैं, जो दिन-रात मदमस्त रहती हैं (क्रोध से भरी हुई)।
सप्तम पद: अन्य राक्षसों का वध
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥7
अर्थ: आपने चंड और मुंड नामक राक्षसों का संहार किया है और रक्तबीज (जिसके रक्त की बूंदों से नए राक्षस उत्पन्न होते थे) का वध किया है। आपने मधु और कैटभ नामक दो असुरों को भी मारा है, जिससे देवताओं को भयमुक्त किया है।
अष्टम पद: देवियों के स्वरूप
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥8
अर्थ: आप ही ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति), रुद्राणी (शिव की शक्ति) और कमला रानी (लक्ष्मी का स्वरूप) हैं। वेदों और शास्त्रों (आगम-निगम) में आपकी महिमा का बखान किया गया है। आप भगवान शिव की पटरानी (मुख्य पत्नी) हैं।
नवम पद: देवों का नृत्य
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥9
अर्थ: चौंसठ योगिनियां आपका मंगल गान करती हैं और भैरव (भगवान शिव का एक स्वरूप) नृत्य करते हैं। ताल, मृदंग और डमरू जैसे वाद्य यंत्र बज रहे हैं, जो आपकी महिमा का गुणगान कर रहे हैं।
दशम पद: जगत की माता
तुम हो जग की माता, तुम ही हो भरतार।
भक्तन की दुख हरता, सुख-संपति करतार॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥10
अर्थ: आप ही इस जगत की माता हैं और आप ही इसका पालन-पोषण करने वाली हैं। आप अपने भक्तों के दुखों को हरने वाली और उन्हें सुख-संपत्ति प्रदान करने वाली हैं।
एकादश पद: भुजाएं और वरदान
भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥11
अर्थ: आपकी चार भुजाएं अत्यंत सुशोभित हैं, जिनमें आपने खड्ग और खप्पर धारण किए हुए हैं। जो नर और नारी आपकी सेवा करते हैं, वे अपनी मनचाही इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।
द्वादश पद: आरती की थाली
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥12
अर्थ: सोने की थाली में अगर, कपूर और बाती सुशोभित हैं (आरती के लिए)। श्रीमालकेतु पर्वत पर आपकी ज्योति करोड़ों रत्नों के समान प्रकाशित हो रही है।
त्रयोदश पद: अंतिम आह्वान
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥13
अर्थ: हे मां अंबे गौरी, आपकी जय हो! हे श्यामा गौरी, आपकी जय हो! आपको तीनों देव – हरि (विष्णु), ब्रह्मा और शिव – दिन-रात ध्यान करते हैं और आपकी पूजा करते हैं।
आरती करने की सही विधि (How to Perform Aarti)
मां अंबे गौरी की आरती को सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए। यहां कुछ सामान्य चरण दिए गए हैं:
- स्वच्छता: आरती करने से पहले स्वयं को और पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- दीपक प्रज्वलित करें: एक थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, अगरबत्ती, धूप और फूल रखें। दीपक प्रज्वलित करें।
- आसन ग्रहण करें: शांतिपूर्ण मुद्रा में आसन पर बैठें या खड़े हों।
- आरती करें: दीपक को मां गौरी की प्रतिमा या चित्र के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए आरती गाएं।
- घंटी बजाएं: आरती करते समय घंटी या शंख बजाना शुभ माना जाता है।
- कपूर जलाएं: आरती के अंत में कपूर जलाकर मां को समर्पित करें।
- आरती लें: आरती पूर्ण होने पर अपने हाथों को दीपक की लौ के ऊपर घुमाएं और फिर उन्हें अपने माथे और आंखों पर लगाएं, यह आशीर्वाद लेने का प्रतीक है।
- प्रणाम: मां गौरी को प्रणाम करें और अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करें।
कब करें जय अंबे गौरी आरती का पाठ? (When to Chant Jai Ambe Gauri Aarti?)
यह आरती किसी भी समय की जा सकती है, जब आप मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हों। हालांकि, कुछ विशेष अवसर और समय इसके लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं:
- नवरात्रि: मां दुर्गा के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रि में इस आरती का विशेष महत्व है। हर शाम देवी मंदिरों और घरों में यह आरती की जाती है।
- दुर्गा पूजा: दुर्गा पूजा के दौरान भी इस आरती का पाठ अनिवार्य रूप से किया जाता है।
- दैनिक पूजा: अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा में आप इस आरती को शामिल कर सकते हैं।
- शुभ अवसर: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले या किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए भी यह आरती की जा सकती है।
- शुक्रवार: शुक्रवार का दिन देवी को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन आरती करना विशेष फलदायी माना जाता है।
निष्कर्ष
जय अंबे गौरी आरती सिर्फ शब्दों का एक संग्रह नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति है। इसके बोलों में मां की शक्ति, सौंदर्य और कल्याणकारी स्वरूप का विस्तृत वर्णन है। इस आरती को गाकर और इसके अर्थ को समझकर, हम मां गौरी से गहरा जुड़ाव महसूस कर सकते हैं और उनके दिव्य आशीर्वाद को अपने जीवन में आमंत्रित कर सकते हैं। तो, अपनी पूजा में इस पावन आरती को शामिल करें और मां अंबे गौरी की कृपा से अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर लें।

