25 मई 1965। मेन के लुईस्टन में एक युवा केंद्र का हॉकी रिंक बॉक्सिंग अखाड़ा बना था। भीड़ चार हज़ार से कम। वर्ल्ड हेवीवेट रिमैच। Muhammad Ali 23 साल के, खिताब बचा रहे थे। Sonny Liston एक साल पहले मियामी में हार चुके थे। पहला राउंड 1 मिनट 44 सेकंड के आसपास थम गया। लिस्टन गिरे। अली ऊपर खड़े चिल्लाए। Ali vs Liston 1965 की मशहूर तस्वीर उसी चिल्लाहट की है।
हम Neil Leifer वाले सटीक पोज की नकल नहीं करते — गिरा हुआ चैंपियन, ऊपर खड़ा अली, उंगली। कहानी उसी रात, उसी छोटी रिंग की है।
अली लिस्टन 1965 फोटो कैसे बनी
लाइफर Sports Illustrated के लिए फ्रीलांस थे, 22 साल। रिंगसाइड दो कैमरों में रंगीन फिल्म थी, एक उन्हीं का। जॉन रूनी (AP) ने काले-सफेद में लगभग वही कोण काटा। मैगज़ीन ने लाइफर फ्रेम कवर पर तुरंत नहीं लगाया। सालों बाद वही फ्रेम “सबसे बड़ी स्पोर्ट्स फोटो” कहलाने लगा।
पंच दिखा कम लोगों को। इसलिए नाम पड़ा phantom punch। कुछ ने फिक्सिंग चिल्लाया। लाइफर बाद में कहते रहे: पंच लगा, कितने साफ दिखे यह अलग बात है। रेफरी ने अली को कॉर्नर भेजा, अली नहीं हटे। लिस्टन गिनती पर बाहर। लड़ाई आधिकारिक तौर पर दो मिनट के आसपास खत्म बताई जाती है।
पहली लड़ाई फरवरी 1964 मियामी — तब नाम कैसियस क्ले था, लिस्टन भारी Favoured थे, टॉवल आठवें राउंड में आया। 1965 तक क्ले मुहम्मद अली बन चुके थे, नेशन ऑफ इस्लाम, देश की राजनीति रिंग में घुस चुकी थी। लुईस्टन इसलिए चुना गया कि बड़े शहर नहीं चाहते थे। नतीजा: विश्व खिताब एक छोटे रिंक में, एक राउंड में।

नील लाइफर 22 साल के थे। रंगीन फिल्म वाले दो कैमरों में से एक उन्हीं के पास था।
तस्वीर देर से बड़ी हुई
उस रात लोग लड़ाई पर झगड़ रहे थे, फ्रेम पर नहीं। कवर दूसरे शॉट का बना। लाइफर का रंगीन फ्रेम संग्रह में पड़ा, फिर पोस्टर बना, फिर सदी की फोटो की सूची में बैठा। खेल की तस्वीर अक्सर instant होती है। यह वाली धीरे बड़ी हुई।
लिस्टन 1970 में गए। अली और दो दशकों तक रिंग में बोले। फ्रेम दोनों से बड़ा हो गया — एक आदमी खड़ा, एक आदमी गिरा, बीच में एक सेकंड जिसे कोई साफ नहीं देख पाया।

अली चिल्लाए: उठो और लड़ो। लिस्टन नहीं उठे। पंच को लोग फैंटम कहने लगे।
आज सर्च क्या माँगती है
कोई लिखता है Ali vs Liston 1965। कोई Neil Leifer। कोई phantom punch। तीनों एक छोटे मेन शहर की रिंग खोलते हैं। हम रिंग देते हैं, कॉपीराइट पोज नहीं। लड़ाई छोटी थी। तस्वीर लंबी निकली।