सुनिए — पूरी खबर सिर्फ 1 मिनट में
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भारत माता की आरती और फोटो
नीचे भारत माता की आरती का संपूर्ण पाठ दिया गया है। आप ऊपर अपनी चुनी हुई फोटो जोड़ सकते हैं।
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आरती — भारत माता
आरती भारत माता की, जगत के भाग्य विधाता की। आरती भारत माता की, जगत के भाग्य विधाता की।
सिर पर हिम गिरिवर सोहै, चरण को रत्नाकर धोए; देवता गोदी में सोए, रहे आनंद, हुए न द्वन्द। बोलो जय बुद्धिप्रदाता की, जगत के भाग्य विधाता की।
आरती भारत माता की, जगत के भाग्यविधाता की।
जगत में लगती है न्यारी, बनी है इसकी छवि न्यारी; कि दुनियाँ देख जले सारी, देख कर झलक, झुकी है पलक, बढ़ी है ललक, कृपा बरसे जहाँ दाता की, जगत के भाग्य विधाता की।
आरती भारत माता की, जगत के भाग्यविधाता की।
गोद गंगा जमुना लहरे, भगवा फहर फहर फहरे; लगे हैं घाव बहुत गहरे, हुए हैं खण्ड, करेंगे अखण्ड; दे कर दंड मौत परदेशी दाता की, जगत के भाग्य विधाता की।
आरती भारत माता की, जगत के भाग्यविधाता की।
पले जहाँ रघुकुल भूषण राम, बजाये बँसी जहाँ घनश्याम; जहाँ का कण कण तीरथ धाम, बड़े हर धर्म, साथ शुभ कर्म; लढे बेशर्म बनी श्री राम दाता की, जगत के भाग्य विधाता की।
आरती भारत माता की, जगत के भाग्यविधाता की।