📅 7 सितंबर

गणेश चतुर्थी 2023: गणेश जी की स्थापना कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व | Ganesh Chaturthi 2023

गणेश चतुर्थी 2023: गणेश जी की स्थापना कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व | Ganesh Chaturthi 2023
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भारतवर्ष में त्योहारों की धूम हमेशा बनी रहती है, और इन सभी में भगवान गणेश का आगमन एक विशेष उत्साह और उमंग लेकर आता है। गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व महाराष्ट्र सहित पूरे देश में बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दौरान भक्त अपने घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित करते हैं, उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हर साल की तरह, 2023 में भी गणेश चतुर्थी को लेकर भक्तों में उत्सुकता है कि गणेश जी की स्थापना कब होगी और इसका शुभ मुहूर्त क्या है। इस लेख में हम आपको 2023 में गणेश स्थापना की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा की विस्तृत विधि और इस पावन पर्व के महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे। तो चलिए, विघ्नहर्ता गणपति बप्पा के आगमन की तैयारियों में जुट जाते हैं!

गणेश चतुर्थी 2023: स्थापना की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

2023 में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 19 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त अपने घरों और पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे।

  • चतुर्थी तिथि का आरंभ: भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 18 सितंबर, सोमवार को दोपहर 12:39 बजे से शुरू होगी।
  • चतुर्थी तिथि का समापन: यह तिथि 19 सितंबर, मंगलवार को दोपहर 01:43 बजे समाप्त होगी।

हिंदू धर्म में, कोई भी शुभ कार्य उदया तिथि के अनुसार ही किया जाता है। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 19 सितंबर को होगा, इसलिए गणेश चतुर्थी का आरंभ इसी दिन से माना जाएगा और गणेश जी की स्थापना भी 19 सितंबर को ही की जाएगी।

गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2023

गणेश जी की स्थापना के लिए सबसे शुभ और उत्तम मुहूर्त 19 सितंबर, मंगलवार को सुबह 10:50 मिनट से दोपहर 12:52 मिनट तक रहेगा। इस दो घंटे की अवधि में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है और भगवान गणपति की कृपा बनी रहती है। यह मुहूर्त मध्याह्न गणेश पूजा के लिए भी अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।

गणेश चतुर्थी का पौराणिक महत्व और इतिहास

गणेश चतुर्थी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है, जिनकी पूजा किसी भी शुभ कार्य से पहले की जाती है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके।

भगवान गणेश की जन्म कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक बालक की रचना की और उसे द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया। जब भगवान शिव अंदर आना चाहा, तो बालक ने उन्हें रोक दिया। क्रोधित होकर शिव जी ने बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती के विलाप को देखकर, शिव जी ने एक हाथी के बच्चे का सिर उस बालक के धड़ पर लगाकर उसे पुनर्जीवित किया। इस प्रकार, गजमुख गणेश का जन्म हुआ और देवताओं ने उन्हें ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान दिया, यानी सभी पूजाओं में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी। यही कारण है कि गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है।

गणेश उत्सव का इतिहास

गणेश उत्सव की सार्वजनिक शुरुआत का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को जाता है। उन्होंने 1893 में इस उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाना शुरू किया ताकि भारतीय समाज को एकजुट किया जा सके और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में राष्ट्रीय भावना को जगाया जा सके। तब से, यह पर्व एक सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता रहा है, जहां लोग एक साथ आकर भगवान गणेश की भक्ति में लीन होते हैं।

गणेश जी की स्थापना और पूजा की सम्पूर्ण विधि (Ganesh Sthapna Puja Vidhi)

गणेश जी की स्थापना और पूजा करना एक पवित्र और विस्तृत प्रक्रिया है, जिसे श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। यहां हम आपको गणेश स्थापना और पूजा की चरण-दर-चरण विधि बता रहे हैं:

स्थापना से पूर्व की तैयारी

  • स्थान का चुनाव: घर में एक साफ-सुथरा स्थान चुनें, जहां आप गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करेंगे।
  • सफाई और सजावट: स्थान को अच्छी तरह से साफ करें, गंगाजल छिड़कें और फूलों, रंगोली या तोरण से सजाएं।
  • चौकी तैयार करें: एक लकड़ी की चौकी या पाटा रखें और उस पर लाल या पीला स्वच्छ वस्त्र बिछाएं।
  • सामग्री एकत्र करें: गणेश जी की मूर्ति, जल कलश, दीपक, धूप, रोली, चंदन, अक्षत (चावल), मोदक, लड्डू, दूर्वा घास, लाल फूल (विशेषकर गुड़हल), पान, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल का मिश्रण), गंगाजल, कपूर, आरती के लिए थाली।

गणेश जी की स्थापना विधि

  1. कलश स्थापना: चौकी पर एक साफ कलश में जल भरकर रखें। इसमें एक सुपारी, सिक्का, अक्षत और कुछ फूल डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर एक नारियल स्थापित करें।
  2. गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें: कलश के दाहिनी ओर या चौकी के मध्य में गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। मूर्ति स्थापित करते समय ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते रहें।
  3. संकल्प लें: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना और पूजा का संकल्प लें।
  4. गणेश जी का आह्वान: भगवान गणेश का आह्वान करें और उनसे अपने घर में वास करने की प्रार्थना करें।

गणेश पूजा के चरण

  1. स्नान: सबसे पहले गणेश जी को शुद्ध जल से स्नान कराएं। यदि मूर्ति मिट्टी की है, तो प्रतीकात्मक रूप से जल छिड़कें। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें।
  2. वस्त्र और उपवस्त्र अर्पण: गणेश जी को नए वस्त्र या उपवस्त्र (कलावा) पहनाएं।
  3. तिलक: रोली और चंदन का तिलक लगाएं।
  4. पुष्प और दूर्वा अर्पण: लाल फूल, दूर्वा (21 गांठों वाली दूर्वा की माला विशेष प्रिय है) और शमी पत्र अर्पित करें।
  5. धूप-दीप प्रज्वलन: धूप और दीपक जलाएं।
  6. भोग: मोदक, लड्डू, फल और अन्य मिष्ठान का भोग लगाएं।
  7. आरती: कपूर या घी के दीपक से गणेश जी की आरती उतारें। ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ आरती का गायन करें।
  8. प्रदक्षिणा: आरती के बाद गणेश जी की परिक्रमा करें (कम से कम तीन बार)।
  9. क्षमा याचना: पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए भगवान से क्षमा याचना करें और अपनी मनोकामनाएं दोहराएं।

गणेश चतुर्थी के दौरान, प्रतिदिन सुबह और शाम गणेश जी की पूजा और आरती की जाती है।

गणेश जी के प्रिय भोग और अर्पित की जाने वाली वस्तुएँ

भगवान गणेश को कुछ विशेष वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं, जिन्हें अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं:

  • मोदक और लड्डू: मोदक भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग है। माना जाता है कि मोदक अर्पित करने से गणेश जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं। बेसन के लड्डू भी उन्हें बहुत पसंद हैं।
  • दूर्वा घास: 21 दूर्वा की गांठों वाली माला गणेश जी को अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • लाल फूल: गुड़हल (जसवंत) का लाल फूल गणेश जी को विशेष रूप से प्रिय है।
  • सिंदूर: गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।
  • केला और नारियल: फल में केला और नारियल भी उन्हें अर्पित किए जाते हैं।
  • शमी पत्र: शमी के पत्ते अर्पित करने से शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है और गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है।

गणेश चतुर्थी का महत्व और संदेश

गणेश चतुर्थी का पर्व सिर्फ पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व भी हैं:

  • विघ्नहर्ता का आशीर्वाद: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। उनकी पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
  • ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक: गणेश जी को ज्ञान, बुद्धि और विद्या का देवता माना जाता है। उनकी उपासना से बुद्धि तेज होती है और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  • एकता और भाईचारा: सार्वजनिक गणेश उत्सव समाज में एकता, भाईचारा और सद्भाव को बढ़ावा देता है। लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जिससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं।
  • प्रकृति प्रेम: आजकल इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों का चलन बढ़ रहा है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

गणेश जी के प्रभावशाली मंत्र और आरती

गणेश पूजा के दौरान कुछ मंत्रों का जाप करने और आरती गाने से वातावरण शुद्ध होता है और मन को शांति मिलती है।

गणेश मंत्र

सबसे सरल और प्रभावशाली गणेश मंत्र है: “ॐ गं गणपतये नमः।” इस मंत्र का जाप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विघ्न दूर होते हैं। इसके अलावा, “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” मंत्र भी अत्यंत शक्तिशाली है, जिसका अर्थ है कि हे हाथी के सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्यों को हमेशा निर्विघ्न पूरा करें।

गणेश आरती

पूजा के अंत में “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा” आरती का गायन करना अनिवार्य है। यह आरती भगवान गणेश की स्तुति करती है और उनकी महिमा का बखान करती है। आरती के बाद कपूर जलाकर भगवान की जय-जयकार की जाती है।

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी का पर्व हमें भगवान गणेश के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करने और उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने का अवसर देता है। 2023 में 19 सितंबर को गणेश जी की स्थापना करके और उपरोक्त विधि-विधान से पूजा करके आप भी भगवान गणपति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह त्योहार न केवल हमारे घरों में खुशियां लाता है, बल्कि हमें सही मार्ग पर चलने और जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति भी प्रदान करता है।

तो, इस गणेश चतुर्थी पर पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ गणपति बप्पा का स्वागत करें और उनके आगमन से अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भर दें। गणपति बप्पा मोरया!

🗓️ आज का इतिहास — 7 सितंबर

  • 2019। इसरो का चंद्रयान-2 मिशन, लैंडर विक्रम से चंद्रमा की सतह पर उतरने से ठीक पहले संपर्क टूट गया, जो भारत के अंतरिक्ष इतिहास की एक बड़ी चुनौती थी।
  • 1998। गूगल की आधिकारिक स्थापना हुई, जिसने इंटरनेट पर सूचना खोजने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया और आज यह दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है।
  • 1977। प्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि, जिन्हें हिंदी साहित्य में प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है।
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