सोचिए, आप बाज़ार से एकदम हरी-भरी गोभी खरीदकर लाए, बड़े चाव से उसकी मसालेदार सब्ज़ी बनाई और रात में अचानक पूरा परिवार पेट दर्द से तड़पने लगा। मानसून में ऐसा होना कोई इत्तेफ़ाक नहीं है। इस मौसम में नमी और कीड़ों की वजह से कुछ ख़ास सब्ज़ियां अंदर ही अंदर सड़ने लगती हैं और हमें पता भी नहीं चलता।
पत्तेदार सब्ज़ियां: मानसून में बीमारी का सबसे बड़ा ज़रिया
बरसात का मौसम आते ही सब्ज़ी मंडी में हरी-भरी पत्तागोभी, पालक, मेथी और चौलाई खूब दिखाई देने लगती हैं। देखने में ये बहुत फ्रेश लगती हैं, लेकिन मानसून में पत्तेदार सब्ज़ियां सबसे ज़्यादा ख़तरनाक साबित होती हैं। बारिश के पानी की वजह से मिट्टी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और छोटे-छोटे कीड़े इन पत्तियों के बीच चिपक जाते हैं।
इन्हें चाहे आप कितनी भी बार धो लें, पत्तियों की बारीक परतों के बीच छिपे बैक्टीरिया आसानी से बाहर नहीं निकलते। जब नमी बढ़ती है, तो ये हरी पत्तियां बहुत तेज़ी से गलने लगती हैं। ई-कोलाई (E. coli) और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इन्हीं नमी वाली पत्तियों पर सबसे तेज़ी से पनपते हैं, जो पेट में गंभीर इन्फेक्शन फैलाते हैं।
अगर आपको मानसून में पत्तेदार सब्ज़ियां खानी भी हैं, तो उन्हें पकाने से पहले गुनगुने नमक के पानी में कम से कम दस मिनट तक डुबोकर रखें। लेकिन सबसे बेहतर तरीका यही है कि बारिश के दो-तीन महीनों में पालक और साग खाने से थोड़ा परहेज़ ही रखें।
फूलगोभी और बंदगोभी: अंदर छिपा होता है ख़तरा
क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि बारिश के दिनों में गोभी काटने पर अक्सर अंदर से छोटे हरे या काले कीड़े निकलते हैं? दरअसल, फूलगोभी की बनावट ऐसी होती है कि उसमें पानी ठहर जाता है। जब पानी गोभी के फूलों के बीच जमा रहता है, तो वहां फंगस और सड़ांध पैदा होना बेहद आम बात है।
बंदगोभी (Pattagobhi) की हर परत के बीच बारिश का मटमैला पानी घुस जाता है। व्यापारी बाहर की परतें हटाकर उसे ताज़ा दिखाकर बेच देते हैं, लेकिन अंदरूनी हिस्सों में नमी के कारण फंगल इन्फेक्शन और बैक्टीरिया फैल चुके होते हैं। पकाने पर भी कई बार इनके अंडे नष्ट नहीं होते।
गोभी ऊपर से जितनी सफ़ेद और साफ़ दिखेगी, मानसून में उसके अंदर सड़ांध होने की गुंजाइश उतनी ही ज़्यादा होती है। इसलिए इस मौसम में गोभी खरीदने से पहले उसके हर डंठल को गहराई से चेक करना बेहद ज़रूरी हो जाता है।
बैंगन और शिमला मिर्च: सड़ांध बाहर से दिखती ही नहीं
मानसून के महीनों में बैंगन और शिमला मिर्च बाहर से एकदम चिकने और चमकदार दिख सकते हैं, लेकिन काटने पर अंदर का नज़ारा पूरा बदला हुआ मिलता है। बैंगन में कीड़े का प्रकोप बारिश के मौसम में सबसे ज़्यादा होता है। कीड़ा बैंगन के अंदर बारीक छेद करके घुस जाता है और अंदर ही अंदर फल को पूरी तरह सड़ा देता है।
यही हाल शिमला मिर्च का भी है। शिमला मिर्च के ऊपरी डंठल के पास पानी जमा हो जाता है, जिससे अंदर का खोखला हिस्सा सड़ने लगता है। कई बार हम ऊपर से चमकीली शिमला मिर्च काटते हैं और अंदर पूरा काला फंगस जमा दिखता है।
अगर आप बैंगन खरीद भी रहे हैं, तो बहुत हल्के वज़न वाले और बिना किसी छोटे छेद वाले बैंगन ही चुनें। जिस बैंगन में थोड़ा सा भी दाग या छेद दिखे, उसे तुरंत छोड़ देने में ही समझदारी है, क्योंकि उसमें बैक्टीरियल फ़्यूजन हो चुका होता है।
मशरूम: नमी सोखकर बहुत जल्दी बनते हैं ज़हरीले
मशरूम वैसे तो सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन मानसून में इन्हें खरीदना किसी ख़तरे से कम नहीं है। मशरूम की तासीर एक स्पंज की तरह होती है, जो हवा में मौजूद अत्यधिक नमी को तुरंत सोख लेती है।
जैसे ही मशरूम में नमी का स्तर बढ़ता है, उसमें चिपचिपापन आने लगता है और वह काले पड़ने लगते हैं। बाज़ार में मिलने वाले पैकेटबंद मशरूम अगर पैकेट के अंदर थोड़े से भी गीले दिखें, तो समझ लीजिए कि उनमें फंगस पनपना शुरू हो चुका है। ऐसा मशरूम खाने से भयंकर फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है।
मानसून में मशरूम की शेल्फ लाइफ़ घटकर आधी से भी कम हो जाती है। अगर आप पैकेट खोलते ही मशरूम पर हल्का सा भी चिपचिपा पानी या अजीब गंध महसूस करें, तो उसे पकाने की भूल बिल्कुल मत कीजिए।
जड़ वाली सब्ज़ियां: अरबी और रतालू क्यों ख़राब होते हैं?
जमीन के नीचे उगने वाली सब्ज़ियां जैसे अरबी, रतालू और अदरक वैसे तो टिकाऊ मानी जाती हैं, लेकिन बारिश के मौसम में गीली मिट्टी इनके सड़ांध की सबसे बड़ी वजह बनती है। खेतों से जब इन्हें निकाला जाता है, तो गीली मिट्टी छिलके पर चिपकी रह जाती है।
यह नमी छिलके के अंदर तक जाकर सड़न पैदा करती है। कई बार बाज़ार से लाई गई अरबी बाहर से तो सख्त लगती है, लेकिन उबलने के बाद अंदर से पूरी तरह चिपचिपी, पानी भरी और बदबूदार निकलती है। गीली मिट्टी के कारण इनमें मिट्टी के परजीवी (Parasites) भी चिपके रहते हैं।
जड़ वाली सब्ज़ियों को हमेशा एकदम सूखी हालत में ही खरीदें। अगर मंडी में सब्ज़ी विक्रेता उन पर पानी का छिड़काव कर रहा हो, तो ऐसी सब्ज़ी भूलकर भी घर न लाएं, क्योंकि पानी पड़ते ही इनकी उम्र कुछ ही घंटों की रह जाती है।
मानसून में कौन सी सब्ज़ियां हैं सबसे सुरक्षित विकल्प?
जब इतनी सारी सब्ज़ियां मानसून में ख़राब और ख़तरनाक हो जाती हैं, तो सवाल उठता है कि आख़िर खाएं क्या? इस मौसम में बेल पर उगने वाली सब्ज़ियां (Gourd family) सबसे सुरक्षित और सेहतमंद मानी जाती हैं।
लौकी, तोरई, करेला, परवल, कद्दू और कुंदरू जैसी सब्ज़ियां बारिश में बहुत तेज़ी से बढ़ती हैं और इनमें पानी रुकने की जगह नहीं होती। इनके छिलके मोटे होते हैं जो अंदरूनी हिस्से को बैक्टीरिया से बचाकर रखते हैं। करेला और नीम-गिलोय जैसी कड़वी चीज़ें मानसून में शरीर के इम्यून सिस्टम को भी मज़बूत करती हैं।
इसके अलावा, दालें, बेसन और सूखे मेवे या न्यूट्रिला का इस्तेमाल भी इस मौसम में सब्ज़ियों के बेहतरीन विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जो पेट को हर तरह के इन्फेक्शन से सुरक्षित रखते हैं।
Vivek Bhai ki Advice
देख भाई, मानसून में सब्ज़ी मंडी जाना किसी माइंडगेम से कम नहीं है। दुकान वाले पानी मार-मारकर सड़ी हुई सब्ज़ियों को भी ऐसा चमका देते हैं कि लगता है अभी-अभी खेत से टूटकर आई है। लेकिन दिखावे पर मत जाओ, अपनी सेहत देखो। इस मौसम में हमारा डाइजेशन वैसे ही धीमा रहता है, ऊपर से अगर पेट में बैक्टीरिया चला गया तो हफ़्ते भर के लिए अस्पताल या बेड रेस्ट पक्का है।
सबसे बड़ा नियम यह बना लो कि बारिश के दो महीने पत्तेदार साग और गोभी से थोड़ा ब्रेक ले लो। लौकी, तोरई, परवल और करेला खाने में भले थोड़े बोरिंग लगें, लेकिन ये तुम्हारे पेट को सुरक्षित रखेंगे। और हां, सब्ज़ी चाहे जो भी लाओ, उसे पकाने से पहले गुनगुने पानी से धोना कभी मत भूलो।
स्मार्ट बनो और सिर्फ़ ताज़ा, सूखी और छिलके वाली सब्ज़ियां ही चुनो। थोड़ी सी सावधानी तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मानसून की बीमारियों से बचा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मानसून में कौन सी सब्ज़ी सबसे जल्दी ख़राब होती है?
मानसून में पालक, मेथी और पत्तागोभी जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियां सबसे जल्दी ख़राब होती हैं। नमी के कारण इनमें बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेज़ी से पनपते हैं।
क्या बारिश के मौसम में बैंगन खाना सुरक्षित है?
मानसून में बैंगन खाने से बचना चाहिए क्योंकि इस मौसम में बैंगन के अंदर कीड़े और सड़ांध होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है, जो बाहर से नज़र नहीं आती।
बारिश में सब्ज़ियों से कीड़े और बैक्टीरिया कैसे साफ़ करें?
सब्ज़ियों को काटने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक या सिरका (Vinegar) मिलाकर 10-15 मिनट के लिए भिगो दें, फिर साफ़ पानी से धोकर ही इस्तेमाल करें।
मानसून में कौन सी सब्ज़ियां खानी चाहिए?
मानसून में बेल वाली सब्ज़ियां जैसे लौकी, तोरई, करेला, परवल, कद्दू और कुंदरू खाना सबसे सुरक्षित और सेहतमंद होता है।
Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।