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बाबा रामदेव जी की आरती, भजन लिरिक्स और कथा

बाबा रामदेव जी की आरती, भजन लिरिक्स और कथा

फोन खोला — आरती चाहिए, भजन चाहिए, कथा भी चाहिए। तीनों यहीं हैं। ये रुणिचा / रामदेवरा वाले बाबा रामदेवजी की आरती–भजन–कथा है। पतंजलि वाले योग गुरु स्वामी रामदेव की नहीं। घर की चौकी पर दीया जलाओ, लिरिक्स सामने रखो, आवाज़ अपनी रहने दो।

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नाम मिलते-जुलते हैं इसलिए फोटो देखो: घोड़े पर सवार बाबा = रामदेवरा वाले। योगासन वाली तस्वीर = दूसरा व्यक्तित्व। इस लेख का फोकस सिर्फ लोकदेवता पर है। जयंती की तारीख (13 या 21) अलग गाइड में साफ की गई है; यहाँ पाठ और भाव है।

FACT: बाबा = रुणिचा/रामदेवरा वाले रामदेवजी (रामसा पीर)। आरती घर-मंदिर दोनों में। पाठ थोड़ा-बहुत बदल सकता है — परिवार की रीति मानो। योग गुरु स्वामी रामदेव अलग हैं।

बाबा रामदेव जी की आरती लिरिक्स

मंदिरों और घरों में सबसे ज़्यादा यही हिंदी आरती चलती है। पंक्ति-पंक्ति गाओ; कोरस सब मिलकर दोहराएँ।

ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।
पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेनादे।।
ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।।

रूप मनोहर जिसका, घोड़े असवारी।
कर में सोहे भाला, मुक्तामणि धारी।।
ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।।

विष्णु रूप तुम स्वामी, कलियुग अवतारी।
सुर नर मुनिजन ध्यावें, जावें बलिहारी।।
ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।।

दुख दलजी का तुमने, भर में टारा।
सरजीवन भाण को, तुमने कर डारा।।
ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।।

नाव सेठ की तारी, दानव को मारा।
पल में कीना तुमने, सरवर को खारा।।
ओउम जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।।

जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे।
पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेनादे।।

कैसे गाएं: एक व्यक्ति पंक्ति बोले, सब मिलकर “ओउम जय…” दोहराएँ। दीप को धीरे गोल घुमाओ। अंत में “जय बाबा री” या घर की रीति वाला जयघोष। बच्चों को एक-दो पंक्ति याद करवा दो — आवाज़ सुरीली हो ज़रूरी नहीं, भाव साफ हो।

कुछ घर “रामादे” की जगह “रामदेव” बोलते हैं। दोनों श्रद्धा से चलते हैं। रिकॉर्डिंग से मैच न हो तो घबराओ मत — लोक पाठ लिखे हुए किताब से ज़्यादा ज़िंदा रहता है।

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राजस्थानी आरती (घर-मेले वाली)

मेले और गाँव के घरों में राजस्थानी स्वाद वाली आरती भी चलती है। नीचे एक प्रचलित स्वरूप है; पाठ घर-घर थोड़ा बदलता है।

पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया।
घर अजमल अवतार लियो।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।।

गंगा जमुना बहे सरस्वती।
रामदेव बाबो स्नान करे।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।।

घिरत मिठाई बाबा चढ़े थारे चूरमो।
धूपां री महकार पड़े।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।।

ढोल नगाड़ा बाबा नौबत बाजे।
झालर री झणकार पड़े।
लाछां सुगणा करे थारी आरती।
हरजी भाटी चंवर ढोले।।

लच्छा–सुगणा बाबा की बहनें मानी जाती हैं — कई कथाओं में आरती उन्हीं के नाम से जुड़ी सुनाई जाती है। हरजी भाटी चंवर ढोलने वाले भक्त के रूप में याद किए जाते हैं। अगर तुम्हारे घर का पाठ अलग है तो वही सही; ये लेख एक प्रचलित स्वरूप है, अनिवार्य किताब नहीं।

बाबा रामदेव जी के भजन — कैसे चुनें

बाबा रामदेवजी रामदेवरा भजन
रामदेवरा वाले बाबा भजन

आरती पूजा के अंत की विधि है। भजन उससे पहले या जागरण में चलते हैं — ढोल, मंजीरा, हारमोनियम, कभी सिर्फ ताली। लोक भजनों में बाबा का घोड़ा, रामदेवरा की राह, मन्नत, और “बाबा री” का पुकार बार-बार आता है।

घर पर छोटा सेट काफी है:

  • एक आरती (ऊपर वाला हिंदी पाठ)
  • एक छोटा भजन जो परिवार को याद हो
  • अंत में जयघोष और प्रसाद

यूट्यूब की लंबी प्लेलिस्ट ज़रूरी नहीं। बच्चों के सोने का समय हो तो आधा घंटा भक्ति भी पूरी भक्ति है। स्पीकर तेज़ करके पड़ोस को परेशान मत करो — बाबा शोर के व्यापारी नहीं।

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अगर भजन लिखे हुए चाहिए तो घर की कॉपी या मंदिर से मिला पाठ सहेज लो। सोशल मीडिया पर गलत नाम/फोटो वाली क्लिप बहुत घूमती है — घोड़े वाले बाबा वाली क्लिप चुनो। शुभकामना और वॉलपेपर भाव के लिए साइट पर बाबा रामदेव जयंती शुभकामनाएँ वॉलपेपर भी देख सकते हो।

दूसरी लोक-आरती पढ़नी हो तो शैली समझने के लिए खाटू श्याम जी की आरती लिरिक्स जैसी गाइड काम आती है — अलग देवता, लेकिन घर पर लिरिक्स रखकर गाने का तरीका एक जैसा। गणेश आरती–मंत्र की व्यवस्थित गाइड के लिए गणेश आरती और मंत्र 2026 भी उपयोगी है।

बाबा रामदेव जी की कथा — संक्षेप में

बाबा रामदेव जी कथा मेला
बाबा रामदेव जी कथा

लोककथाओं में बाबा रामदेवजी को पिता अजमल और माता मैनादे का पुत्र कहा जाता है। संतान की चाह में की गई प्रार्थना के बाद दो बेटे — बड़े वीरमदेव, छोटे रामदेव। कई कथाएँ उन्हें कृष्ण/विष्णु अवतार के रूप में याद करती हैं; कुछ भक्त रामसा पीर नाम से भी पुकारते हैं — हिंदू-मुस्लिम दोनों की श्रद्धा का पुल।

आरती की पंक्तियों में जो चमत्कार झलकते हैं — सेठ की नाव, सरवर, दलजी का दुख — वे लोक-स्मृति की कहानियाँ हैं। विश्वास वाले के लिए चमत्कार, इतिहास वाले के लिए लोककथा। दोनों को जगह दो; लड़ाई मत मचाओ। पूरी कथा मंदिर में या बुज़ुर्ग से सुनना सबसे अच्छा है — यहाँ स्पॉइलर सिर्फ इतना कि बाबा गरीब और हर जाति के साथ बैठने वाले माने जाते हैं।

समाधि स्थल रामदेवरा / रुणिचा (जैसलमेर क्षेत्र) है। भादो शुक्ल दूज से एकादशी तक मेला लगता है। मन्नत में कपड़े से ढका लकड़ी का घोड़ा चढ़ाने की रीति प्रसिद्ध है — बचपन के उड़ते खिलौना-घोड़े की कथा से जुड़ी। घोड़ा बाज़ार का शोर नहीं, श्रद्धा का निशान है।

कथा सुनते समय बच्चों को डराओ मत। “बाबा सब देखते हैं” वाली लाइन से बेहतर है “बाबा सच और दया सिखाते हैं।” बीमार या कमज़ोर शरीर हो तो लंबी कथा-जागरण की ज़िद मत करो — दीप, नमस्कार और एक आरती भी जुड़ाव है।

घर पर आरती कैसे करें — छोटा तरीका

  1. चौकी साफ करो, बाबा की तस्वीर/मूर्ति रखो।
  2. दीप, अगरबत्ती/धूप, फूल, मिठाई या चूरमा जितना बने।
  3. हाथ धोकर बैठो; मन से संकल्प — “बाबा, घर की शांति और सच्ची राह।”
  4. भजन थोड़ा, फिर हिंदी आरती का पाठ।
  5. दीप घुमाओ, जयघोष, प्रसाद बाँटो।

पंडित ज़रूरी नहीं। दिखावे का सोना-चाँदी सेट मत खरीदना “पूर्ण विधि” के नाम पर। साफ कपड़ा और साफ नीयत काफी है। मेला जाना हो तो पानी, भीड़ और ट्रेन टाइमटेबल पहले देखना — स्टेशन कोड अक्सर RDRA।

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FAQ — बाबा रामदेव जी की आरती

ये आरती किस बाबा की है?
रुणिचा/रामदेवरा वाले लोकदेवता बाबा रामदेवजी की। पतंजलि योग वाले स्वामी रामदेव की नहीं।

हिंदी या राजस्थानी कौन सी गाएँ?
घर की रीति जो हो। कई घर दोनों गाते हैं — पहले भजन/राजस्थानी, अंत में हिंदी आरती।

पाठ अलग क्यों मिलता है?
लोक पाठ है। गाँव-गाँव शब्द बदलते हैं। गलतफहमी मत पालो; परिवार का पाठ प्राथमिक।

घोड़ा आरती में क्यों आता है?
बाबा की पहचान घोड़े से जुड़ी है। मन्नत में लकड़ी का घोड़ा चढ़ाने की रीति भी इसी से जुड़ी मानी जाती है।

कथा पूरी कहाँ सुनें?
मंदिर, जागरण, या घर के बुज़ुर्ग से। नेट पर गलत नाम वाली क्लिप से बचें।

डिस्क्लेमर: आरती–भजन लोक-आस्था के पाठ हैं। शब्द घर-मंदिर के अनुसार बदल सकते हैं। ये लेख श्रद्धा और जानकारी के लिए है — किसी एक रिकॉर्डिंग को एकमात्र सही प्रमाण मत मानो। स्वास्थ्य और भीड़ दोनों संभालना यात्री/भक्त का काम है।

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Vivek Hardaha लेखक:

Vivek Hardaha, Madhya Pradesh. M.Sc. (Computer Science) and M.A. (Sociology). Writing since 2014 on science, logic and society in simple words.

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