महीने की पहली तारीख को मकान मालिक जब हाथ में बिजली का भारी-भरकम बिल थमाता है, तो सिर चकरा जाना लाजमी है। अपना घर न होने की वजह से आप न तो पुरानी वायरिंग बदलवा सकते हैं और न ही सोलर पैनल लगवा सकते हैं। लेकिन यकीन मानिए, बिना किसी बड़े बदलाव के भी किराए के कमरे का बिजली बिल आधा किया जा सकता है।
किराए के घर में बिजली बिल ज्यादा आने की असली वजहें
किराएदार के रूप में जब हम किसी नए मकान में शिफ्ट होते हैं, तो अक्सर कमरे की पुताई और लोकेशन तो देख लेते हैं, लेकिन इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स और मीटर कनेक्शन पर ध्यान देना भूल जाते हैं। ज्यादातर किराए के मकानों में सालों पुरानी वायरिंग लगी होती है। पुरानी या पतली तारों में रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिससे करंट बेकार में गर्मी के रूप में बहता रहता है और मीटर तेजी से घूमता है।

इसके अलावा कई बार मकान मालिक एक ही मेन मीटर से कई सब-मीटर जोड़ देते हैं। अगर सब-मीटर पुराना या घटिया क्वालिटी का है, तो वह सही रीडिंग नहीं दिखाता। लोग सोचते हैं कि वे तो बहुत कम पंखा-लाइट चलाते हैं, फिर भी बिल हजारों में क्यों आ रहा है। असली खराबी आपके इस्तेमाल में नहीं, बल्कि उन छुपे हुए अप्लायंसेज और पुरानी फिटिंग्स में होती है जो लगातार पावर लीक कर रहे होते हैं।
सब-मीटर और मेन मीटर की चेकिंग कैसे करें?
सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपका सब-मीटर सही काम कर रहा है या नहीं। इसके लिए एक आसान सा तरीका अपनाएं। अपने कमरे के सारे स्विच, पंखे, लाइट और फ्रिज का प्लग पूरी तरह बंद कर दें। इसके बाद अपने सब-मीटर की पल्स लाइट पर नजर रखें। अगर सारे उपकरण बंद होने के बाद भी मीटर की लाल लाइट बार-बार झपक रही है या रीडिंग बढ़ रही है, तो समझ जाइए कि कहीं न कहीं करंट लीक हो रहा है।
कई बार मकान मालिक का कोई कॉमन बल्ब या मोटर का कनेक्शन आपके किराए वाले मीटर से जुड़ा होता है। इस बात की तसल्ली कर लें कि आपके मीटर से सिर्फ आपके ही कमरे की लाइन जा रही हो। कमरे की मेन एमसीबी (MCB) गिरकर देखें कि क्या आपके मीटर की गिनती रुकती है या नहीं। यह छोटी सी जांच आपको हर महीने सैकड़ों रुपये के बेवजह नुकसान से बचा सकती है।
फैंटम लोड या घोस्ट एप्लायंस को पहचानें और रोकें
क्या आप भी टीवी को रिमोट से बंद करके छोड़ देते हैं? या मोबाइल चार्जर सॉकेट में ही लगा छोड़ देते हैं भले ही फोन चार्ज न हो रहा हो? अगर हां, तो आप अनजाने में फैंटम लोड यानी घोस्ट पावर का शिकार हो रहे हैं। जब कोई इलेक्ट्रॉनिक्स सामान प्लग में लगा रहता है और स्विच ऑन होता है, तो वह बंद होने के बावजूद बिजली खींचता रहता है।
इंडक्शन कुकटॉप, माइक्रोवेव, सेट-टॉप बॉक्स और एसी के प्लग स्विच बोर्ड में लगे रहने से महीने भर में कई यूनिट बिजली यूं ही बेकार चली जाती है। अपनी आदत में थोड़ा सा बदलाव लाएं। जब भी किसी उपकरण का काम खत्म हो जाए, मुख्य स्विच बोर्ड से प्लग बंद करने की आदत डालें। यह अकेला कदम आपके बिजली का बिल कैसे कम करें वाली उलझन को काफी हद तक सुलझा देगा।
लाइटिंग और पंखों में स्मार्ट बदलाव बिना बड़ा खर्च किए
अगर आपके किराए के कमरे में पुराने जमाने के 60 वाट वाले पीले बल्ब या 100 वाट वाली रॉड लगी है, तो उन्हें तुरंत उतारकर रख दें। मकान मालिक से बिना बहस किए आप खुद 9 या 12 वाट के अच्छी क्वालिटी के एलईडी बल्ब लगा सकते हैं। जब आप मकान छोड़ें, तो अपने एलईडी बल्ब साथ ले जाएं और मकान मालिक के पुराने बल्ब वापस लगा दें।
पंखों की बात करें तो पुराने इंडक्शन पंखे 75 से 80 वाट बिजली खाते हैं। किराएदार होने के नाते आप नया पंखा नहीं खरीदना चाहते, तो कम से कम इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर जरूर चेक करें। पुराना बड़ा वाला डब्बे जैसा रेगुलेटर बिजली की खपत को कम नहीं करता, बल्कि एक्स्ट्रा बिजली को हीट बनाकर उड़ा देता है। नया छोटा रेगुलेटर लगवाने से पंखा धीमी स्पीड पर चलने पर बिजली भी कम खर्च करेगा।
फ्रिज और गीजर का सही इस्तेमाल बिजली बचाएगा
किराए के मकान में अगर आपको पहले से फ्रिज या गीजर मिला है, तो उनकी सेटिंग जांचना बहुत जरूरी है। फ्रिज को दीवार से बिल्कुल सटाकर कभी न रखें। पीछे कम से कम आधा फीट की जगह छोड़ें ताकि कंप्रेसर की गर्मी बाहर निकल सके। अगर फ्रिज के दरवाजे की रबर (गैस्केट) ढीली है, तो अंदर की ठंडक बाहर निकलती रहेगी और कंप्रेसर दिन-रात चलता रहेगा जिससे बिल दोगुना आएगा।
सर्दियों में गीजर को कभी भी ऑटो-कट के भरोसे घंटों ऑन न छोड़ें। नहाने से सिर्फ 15-20 मिनट पहले गीजर ऑन करें और काम होते ही बंद कर दें। गीजर का तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस पर सेट रखना सबसे समझदारी भरा कदम है। इससे पानी भी सही गर्म होगा और बिजली की खपत भी सीमित रहेगी।
किराए के कमरे में समर कूलिंग बिना भारी बिल के
गर्मी के दिनों में एसी का इस्तेमाल बिजली बिल को आसमान पर पहुंचा देता है। अगर आप विंडो या स्प्लिट एसी चलाते हैं, तो उसे कभी भी 18 या 20 डिग्री पर न चलाएं। एसी को हमेशा 24 से 26 डिग्री के तापमान पर सेट करें और साथ में हल्की स्पीड पर छत का पंखा चलाएं। इससे पूरे कमरे में ठंडक तेजी से फैलती है और एसी का कंप्रेसर जल्दी कट-ऑफ हो जाता है।
कमरे की खिड़कियों पर गहरे रंग के भारी पर्दे लगाएं ताकि दिन के समय धूप सीधे कमरे के अंदर न आ सके। अगर कमरा गरम नहीं होगा, तो उसे ठंडा करने में आपके एसी या कूलर को कम मेहनत करनी पड़ेगी। कूलर इस्तेमाल करते हैं तो उसमें भी पंप और फैन की टाइमिंग का ध्यान रखें, बेवजह पानी का पंप घंटों चालू रखने की जरूरत नहीं होती।
मकान मालिक से बिजली टैरिफ और यूनिट रेट पर बात कैसे करें?
ज्यादातर शहरों में मकान मालिक किराएदारों से बिजली का फिक्स रेट वसूलते हैं, जैसे 8 रुपये या 10 रुपये प्रति यूनिट। कई बार वे कमर्शियल रेट लगा देते हैं जो कि पूरी तरह गलत है। अगर आपके कमर्शियल या रेजिडेंशियल कनेक्शन का पता लगाना है, तो मकान मालिक से ओरिजिनल बिजली बिल की कॉपी दिखाने का आग्रह करें।
सरकारी टैरिफ में शुरुआती 100 या 200 यूनिट का रेट काफी कम होता है या कई राज्यों में मुफ्त होता है। लेकिन मकान मालिक फ्लैट रेट मांगते हैं। उनसे शांति से बात करें कि अगर आप अपने सब-मीटर के हिसाब से एक्चुअल स्लैब रेट पर बिल देंगे, तो दोनों के लिए पारदर्शी रहेगा। एग्रीमेंट बनवाते समय ही बिजली के यूनिट रेट की शर्त साफ-साफ लिखवा लेना सबसे बेहतर रणनीति होती है।
Vivek Bhai ki Advice
किराए के मकान में रहते हुए अक्सर लोग सोचते हैं कि जब घर अपना नहीं है, तो इसमें हम क्या ही सुधार कर सकते हैं। लेकिन सच यह है कि आपकी छोटी-छोटी रोजमर्रा की लापरवाही ही आपके महीने का बजट बिगाड़ती है। मकान मालिक को कोसने या हर महीने महंगे बिल पर झल्लाने से बेहतर है कि आप अपनी आदतों पर थोड़ा ध्यान दें।
सबसे पहले अपने कमरे के हाई-पावर एप्लायंसेज की लिस्ट बनाइए। गीजर, हीटर, इंडक्शन और एसी — ये चार ऐसी चीजें हैं जो आपके बिजली के मीटर को रॉकेट की स्पीड से घुमाती हैं। इन्हें सिर्फ जरूरत के वक्त चलाएं और स्विच बोर्ड से तुरंत कट-ऑफ करें। अपने पैसे बचाना आपके खुद के हाथ में है, इसके लिए घर का मालिक होने की जरूरत नहीं है।
अगर आपका सब-मीटर बिना किसी लोड के भी चल रहा है, तो तुरंत मकान मालिक को बुलाकर मीटर चेक करवाएं। हक से बात करें लेकिन कड़वाहट के बिना। किराएदार होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप किसी और के खराब इलेक्ट्रिकल सिस्टम का हर्जाना अपनी जेब से भरते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या किराएदार खुद से बिजली का सब-मीटर बदलवा सकता है?
नहीं, आप मकान मालिक की इजाजत के बिना सब-मीटर नहीं बदल सकते। अगर आपको लगता है कि सब-मीटर तेज चल रहा है, तो मकान मालिक से बात करके उनके सामने किसी इलेक्ट्रिशियन से उसकी जांच करवाएं और नया डिजिटल मीटर लगवाएं।
एसी को कितने डिग्री पर चलाने से बिजली बिल सबसे कम आता है?
एसी को 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच चलाने से सबसे ज्यादा बिजली की बचत होती है। इस तापमान पर कंप्रेसर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और कमरा भी आरामदायक बना रहता है।
क्या सारे प्लग सॉकेट में लगे रहने से भी बिजली खर्च होती है?
हाँ, अगर सॉकेट का स्विच ऑन है तो चार्जर, टीवी सेट-टॉप बॉक्स और माइक्रोवेव जैसे उपकरण बंद होने के बाद भी बिजली सोखते रहते हैं। इसे फैंटम लोड कहते हैं।
मकान मालिक प्रति यूनिट कितना बिजली बिल ले सकता है?
मकान मालिक को राज्य बिजली बोर्ड द्वारा तय रेजिडेंशियल स्लैब रेट के हिसाब से ही बिल लेना चाहिए। हालांकि, कई जगह आपसी सहमति से 7 से 9 रुपये प्रति यूनिट का फिक्स रेट तय किया जाता है।
Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।