ॐ जय शिव ओंकारा आरती: संपूर्ण हिंदी पाठ
ॐ जय शिव ओंकारा आरती में शिव के साथ ब्रह्मा और विष्णु के स्वरूपों का भी स्मरण आता है। इसी कारण कई शब्द पहली बार पढ़ने वाले को कठिन लगते हैं। यहाँ पहले विस्तृत प्रचलित पाठ एक साफ बॉक्स में दिया है, फिर उसका सरल भावार्थ, पूजा में स्थान और आरती करते समय ध्यान देने वाली बातें हैं।
ॐ जय शिव ओंकारा: पूरा आरती पाठ
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कुछ घरों में इस आरती का संक्षिप्त रूप गाया जाता है और कुछ में ऊपर दिए अतिरिक्त बंद भी शामिल होते हैं। शब्दों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार दोहराव रखें; हर बंद के बाद ॐ जय शिव ओंकारा गाया जा सकता है।
कठिन शब्दों का सरल अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| ओंकार | ॐ के रूप में परम तत्त्व का स्मरण |
| एकानन, चतुरानन, पञ्चानन | एक, चार और पाँच मुखों वाले स्वरूपों का उल्लेख |
| हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन | हंस, गरुड़ और वृषभ से जुड़े देव-स्वरूप |
| अक्षमाला | जप की माला |
| प्रणवाक्षर | ॐ का बोध कराने वाला शब्द |
| अर्द्धांगी | अभिन्न सहचरी का भाव |
| जगपालनकारी | संसार का पालन करने वाला |
आरती का भावार्थ
पहले बंद में भगवान के ओंकार स्वरूप को प्रणाम किया गया है। आगे ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूप, उनके आसन, आयुध और वस्त्रों का वर्णन आता है। यह वर्णन सृष्टि, पालन और संहार की भूमिकाओं को एक ही परम तत्त्व से जोड़ने का धार्मिक भाव प्रस्तुत करता है।
कमण्डलु, चक्र और त्रिशूल वाले बंद में देवताओं के प्रतीकों के माध्यम से संरक्षण, व्यवस्था और परिवर्तन का स्मरण है। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव वाले बंद का आशय केवल बाहरी रूपों में भेद देखने के बजाय मूल एकत्व को समझना है। अंतिम बंद आरती के फल को भक्त की श्रद्धा और उपासना की भाषा में व्यक्त करता है।
कैलास, गंगा, भस्म और नाग का वर्णन शिव के परंपरागत स्वरूप से जुड़ा है। आरती में भांग-धतूरे का उल्लेख सेवन की सलाह नहीं है। पूजा के वर्णन को किसी नशीले पदार्थ का उपयोग करने या किसी स्वास्थ्य समस्या का उपचार करने का निर्देश न समझें।
धार्मिक महत्व और कब गाई जाती है
शिव पूजन, घर की नियमित आरती और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर भक्त इसे गाते हैं। सोमवार को शिव उपासना करने वाले परिवार भी पूजा के समापन में इसका पाठ रख सकते हैं। अनिवार्य संख्या या एक ही समय सभी पर लागू करने के बजाय अपने परिवार और मंदिर की रीति के अनुसार चलें।
घर की पूजा में आरती कैसे करें?
- पूजा स्थान व्यवस्थित करें और शांत भाव से भगवान शिव का स्मरण करें।
- दीपक की लौ से कपड़े, बाल और कागज़ दूर रखें; बच्चे साथ हों तो वयस्क ध्यान दें।
- पूरी आरती एक साथ पढ़ें। अर्थ समझना हो तो आरती समाप्त होने के बाद नीचे के भावार्थ को पढ़ें।
- अंत में प्रणाम और अपने शब्दों में प्रार्थना करें।
- बेलपत्र या अन्य सामग्री की परंपरा हो तो सुरक्षित ढंग से अर्पित करें; अनावश्यक खर्च या प्रतिस्पर्धा जरूरी नहीं।
आरती के लाभ को कैसे समझें?
धार्मिक दृष्टि से भक्त आरती को समर्पण, कृतज्ञता और शिव-स्मरण का माध्यम मानते हैं। नियमित समय पर बैठना मन को एक गतिविधि पर लगाने का अवसर दे सकता है। व्यवहार में धैर्य, संयम और दूसरों की मदद का प्रयास उसके भाव को मजबूत करता है। मनवांछित फल वाली पंक्ति आस्था की अभिव्यक्ति है, निश्चित परिणाम का अनुबंध नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या शिव आरती और शिव चालीसा एक हैं?
नहीं। ॐ जय शिव ओंकारा आरती है; शिव चालीसा जय गिरिजा पति दीन दयाला से शुरू होने वाला अलग पाठ है।
आरती के कितने बंद गाने चाहिए?
संक्षिप्त और विस्तृत दोनों प्रचलित रूप मिलते हैं। यहाँ विस्तृत पाठ दिया है; अपने घर की रीति के अनुसार पढ़ें।
क्या अर्थ आरती के बीच पढ़ना जरूरी है?
नहीं। पूरा पाठ एक साथ गाएँ और अर्थ बाद में समझें।
क्या मोबाइल से पढ़ सकते हैं?
हाँ। अक्षर साफ दिखें और मोबाइल दीपक की लौ से सुरक्षित दूरी पर रहे।
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