ॐ जय जगदीश हरे आरती: पूरा पाठ और सरल भावार्थ
ॐ जय जगदीश हरे आरती में भक्त भगवान को अपना पालनकर्ता, सहारा और अन्तर्यामी मानकर प्रार्थना करता है। घर की संध्या आरती या विष्णु पूजन में इसे गाते समय केवल धुन याद होना जरूरी नहीं; पंक्तियों का भाव समझना भी उपयोगी है। नीचे पहले पूरा प्रचलित पाठ एक साथ है, उसके बाद अर्थ, महत्व और आरती की सरल विधि दी गई है।
ॐ जय जगदीश हरे: संपूर्ण आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
परिवार और क्षेत्र के अनुसार दोहराव, उच्चारण और अंतिम बंद में छोटे पाठांतर मिलते हैं। हर बंद के बाद ॐ जय जगदीश हरे वाला ध्रुवपद दोहरा सकते हैं।
आरती के बाद कही जाने वाली समर्पण पंक्ति
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा।
स्वामी क्या लागे मेरा॥
यह प्रचलित समर्पण पंक्ति कई घरों में आरती के बाद गाई जाती है। इसका भाव है कि पूजा की सामग्री और जीवन में मिली सामर्थ्य को भी ईश्वर की देन मानकर अर्पित किया जाए।
आरती का सरल हिंदी अर्थ
- भक्त जनों के संकट: भक्त अपनी चिंता और कठिनाइयों में भगवान से सहारा माँगता है। यह विश्वास और प्रार्थना की अभिव्यक्ति है।
- जो ध्यावे फल पावे: ध्यान और भक्ति से मन को सदाचार की ओर लगाने का भाव है; इसे निश्चित धन या किसी उपचार की गारंटी न समझें।
- मात-पिता तुम मेरे: भगवान के प्रति वही भरोसा व्यक्त किया गया है जो बच्चा अपने माता-पिता पर करता है।
- पूरण परमात्मा और अन्तर्यामी: ईश्वर को सर्वव्यापक और अंतर्मन का जानने वाला कहा गया है।
- करुणा के सागर: भक्त अपनी कमियाँ स्वीकार करके दया और सही मार्ग की प्रार्थना करता है।
- अगोचर: जिसे सामान्य इन्द्रियों से पूरी तरह नहीं जाना जा सकता। भक्त उससे जुड़ने का उपाय पूछता है।
- दीनबन्धु: कठिन स्थिति में पड़े व्यक्ति का सहायक। यह बंद विनम्रता और आश्रय का भाव रखता है।
- विषय-विकार मिटाओ: लालच, अहंकार और गलत आचरण से बचने तथा श्रद्धा व सेवा बढ़ाने की प्रार्थना है।
धार्मिक महत्व क्या है?
जगदीश का भाव जगत के स्वामी से है। इस आरती में भगवान के पालन, करुणा और शरण देने वाले स्वरूप का स्मरण होता है। विष्णु और नारायण की उपासना में इसका विशेष स्थान है, जबकि अनेक परिवार इसे दैनिक सामूहिक पूजा के समापन में भी गाते हैं। घर की परंपरा का सम्मान रखते हुए पाठ किया जा सकता है।
आरती की खास बात उसका सहज भाव है। भक्त स्वयं को सबसे बड़ा ज्ञानी बताने के बजाय अपनी सीमाएँ स्वीकार करता है। इसलिए पाठ के साथ घर-परिवार में व्यवहार, जरूरतमंद की मदद और किसी के प्रति कठोरता कम करने का संकल्प जोड़ना उसके भाव के अनुरूप है।
घर पर आरती की सरल विधि
- पूजा का स्थान साफ रखें और अपनी परंपरा के अनुसार भगवान का स्मरण करें।
- दीपक सुरक्षित, स्थिर थाली में रखें। कपड़े और पर्दे लौ से दूर रहें।
- आरती को आराम से पढ़ें या गाएँ। साथ में पढ़ने वालों को स्पष्ट सुनाई दे, इतनी आवाज पर्याप्त है।
- पूरी आरती के बाद प्रणाम करें और अपने शब्दों में प्रार्थना करें।
- यदि घर में प्रसाद की परंपरा हो तो साझा करें। सामग्री कम होने पर भी विनम्र स्मरण किया जा सकता है।
आरती के लाभ: धार्मिक मान्यता और व्यवहार
भक्त इसे श्रद्धा, कृतज्ञता और ईश्वर पर भरोसे से जोड़ते हैं। रोज थोड़ा समय निकालकर एक साथ बैठना परिवार में संवाद का अवसर भी बन सकता है। लाभ को केवल मनचाही वस्तु मिलने तक सीमित करने के बजाय धैर्य, सेवा और बेहतर आचरण के भाव से देखें। पूजा के साथ आवश्यक सांसारिक प्रयास और जिम्मेदारियाँ भी निभाएँ।
पढ़ते समय इन बातों का ध्यान रखें
पहले पाठ को साफ पढ़ें, फिर धुन के अनुसार गाएँ। अपरिचित शब्द का अर्थ पूछना गलत नहीं है। बच्चों को डराकर पाठ याद कराने के बजाय छोटे बंद समझाएँ। मोबाइल पर पढ़ते समय अनावश्यक सूचनाएँ बंद रखने से क्रम बनाए रखना आसान हो सकता है। दीपक के पास फोन या कागज़ बहुत करीब न रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह केवल विष्णु भगवान की आरती है?
यह विष्णु-नारायण की आरती के रूप में प्रसिद्ध है। अनेक घरों में सामान्य दैनिक आरती के समापन में भी गाई जाती है।
क्या पूरा पाठ एक ही धुन में गा सकते हैं?
हाँ। परिवार में प्रचलित धुन और दोहराव के अनुसार पढ़ें; मुख्य बात पंक्तियों का क्रम और भाव है।
क्या हर दिन करना अनिवार्य है?
यहाँ कोई अनिवार्य नियम नहीं दिया गया है। अपनी श्रद्धा, समय और पारिवारिक रीति के अनुसार पूजा करें।
क्या आरती से हर समस्या अपने आप दूर हो जाएगी?
आरती आस्था और प्रार्थना है। जीवन की समस्याओं में जरूरी कदम, संवाद और संबंधित विशेषज्ञ की मदद भी जरूरी हो सकती है।