डिजिटल अरेस्ट का नोटिस आया है? पहले घबराहट रोकें
फोन पर कोई खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताता है। फिर WhatsApp पर PDF भेजकर कहता है कि आपके नाम वारंट है। डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन उसी समय पैसे भेजना या लगातार वीडियो कॉल पर बने रहना सही कदम नहीं है। पहले कॉल रोकें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ और दावे की अलग से जाँच करें।
डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में गिरफ्तारी की कोई वैध प्रक्रिया नहीं है। वीडियो कॉल पर घर में रोके रखने और खाते की जाँच के नाम पर पैसा माँगने वाला दावा स्कैम का संकेत है। कोई वास्तविक कानूनी नोटिस मिला हो तो उसे भी केवल शक के आधार पर अनदेखा न करें; संबंधित कार्यालय से स्वतंत्र सत्यापन कराएँ।
फर्जी नोटिस की फोटो में किन संकेतों को देखें

नीचे की तस्वीर समझाने के लिए बनाया गया काल्पनिक नमूना है। यह किसी असली FIR, अदालत या CBI के नोटिस की कॉपी नहीं है। इसमें तत्काल भुगतान, बात गुप्त रखने और वीडियो कॉल पर बने रहने जैसी दबाव बनाने वाली माँगें दिखती हैं।
तस्वीर देखते समय केवल spelling की गलती न खोजें। देखें कि क्या व्यक्ति गिरफ्तारी रोकने के लिए personal UPI या “safe account” में रकम माँग रहा है, परिवार से बात करने से रोक रहा है या बहुत छोटी समय सीमा दे रहा है। ये व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण चेतावनी हैं।
लिंक खोलने, APK install करने, screen sharing चालू करने या OTP बताने की माँग मानकर अपनी सुरक्षा कमजोर न करें। संदिग्ध पत्र के QR code को भुगतान के लिए scan न करें।
असली जैसा लोगो और मुहर प्रमाण क्यों नहीं हैं
अच्छी English, सही नाम, वर्दी, सरकारी लोगो और साफ मुहर किसी पत्र को अपने आप असली नहीं बनाते। इनकी नकल या कॉपी संभव है। इसी तरह धुंधला स्कैन या टाइपिंग की गलती अकेले जालसाजी का अंतिम प्रमाण नहीं है।
असली और नकली FIR की फोटो तुलना की भी सीमा है: राज्य, कार्यालय, समय और दस्तावेज़ के प्रकार के अनुसार रूप बदल सकता है। इस पोस्ट की किसी इमेज को सार्वभौमिक “असली नोटिस का format” न मानें।
नोटिस का स्वतंत्र सत्यापन कैसे करें
संदेश भेजने वाले का नंबर दोबारा मिलाकर सत्यापन पूरा नहीं होता। संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट स्वयं खोलें और वहाँ दिए कार्यालय या संपर्क से पूछें। संदिग्ध PDF में छपे नंबर और लिंक को अपनी एकमात्र जानकारी न बनाएँ।
पत्र की तारीख, संदर्भ संख्या, जारी करने वाले कार्यालय और बताए गए मामले को नोट करें। जो जानकारी माँगी जाए, उसे केवल सत्यापित सुरक्षित माध्यम से दें। सार्वजनिक सोशल मीडिया पोस्ट में पूरा आधार, पता, बैंक विवरण या हस्ताक्षर न डालें।
अगर वास्तविक मामले या नोटिस की संभावना हो और दायित्व समझ न आए, स्थानीय वकील या संबंधित कार्यालय से सहायता लें। स्वतंत्र जाँच करने और किसी वास्तविक समय सीमा की अनदेखी करने में फर्क है।
पैसे चले गए हों तो तुरंत क्या करें

बैंक या भुगतान सेवा के आधिकारिक fraud channel से तुरंत संपर्क करें और transaction रोकने/चिह्नित करने के उपलब्ध विकल्प पूछें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के लिए 1930 पर सूचना दें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी रिपोर्ट करना उपयोगी है; पैसे लौटने की गारंटी नहीं है।
भुगतान की तारीख, समय, रकम, UTR या transaction ID, प्राप्तकर्ता की जानकारी, चैट, कॉल नंबर और PDF सुरक्षित रखें। मूल फाइल अपने पास रखें; साझा करने के लिए निजी जानकारी छिपी हुई अलग कॉपी बनाएँ।
संदिग्ध ऐप डाला या स्क्रीन साझा की हो तो बैंक को बताएँ। सुरक्षित दूसरे उपकरण से जरूरी खातों की सुरक्षा जाँचें। “पैसे वापस दिलाने” के बदले पहले फीस माँगने वाले नए व्यक्ति को रकम न दें।
सलाह: परिवार के लिए यह छोटी तैयारी रखें
घर में तय करें कि गिरफ्तारी की धमकी, secret payment या लगातार video call की माँग आए तो पहले एक-दूसरे से बात करेंगे। बुजुर्ग सदस्य के फोन में बैंक का सत्यापित संपर्क और भरोसेमंद परिजन का नंबर रखें। पीड़ित को शर्मिंदा करने से वह मदद माँगने में देर कर सकता है।
जाँच के लिए संदेश ऐसे लिख सकते हैं: “मुझे इस तारीख को आपके कार्यालय के नाम से एक संदेश मिला है। कृपया आधिकारिक माध्यम से संदर्भ संख्या और जारी किए जाने की पुष्टि की प्रक्रिया बताएँ।” यह शिकायत का सरकारी format नहीं, बातचीत शुरू करने का सामान्य उदाहरण है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या CBI की मुहर देखकर नोटिस असली मान सकते हैं? नहीं। मुहर की तस्वीर और संस्था से वास्तविक पुष्टि अलग बातें हैं।
क्या हर WhatsApp या ईमेल से मिला कानूनी दस्तावेज़ नकली है? केवल माध्यम देखकर ऐसा निर्णय न लें। जारीकर्ता और मामले की स्वतंत्र पुष्टि करें।
क्या PDF metadata से फैसला हो जाएगा? नहीं। लेखक का नाम, software या creation date अकेले प्रामाणिकता साबित नहीं करते।
क्या 1930 पर कॉल से पैसा जरूर वापस मिलेगा? नहीं। यह रिपोर्ट करने का माध्यम है; परिणाम उपलब्ध धन, समय और जाँच पर निर्भर करता है।
क्या ये तस्वीरें असली स्कैम के सबूत हैं? नहीं। तीनों AI-generated illustrations हैं; अंदर का पत्र काल्पनिक है।
स्रोत और जरूरी स्पष्टीकरण
यह सामान्य साइबर सुरक्षा जानकारी है, व्यक्तिगत कानूनी राय नहीं। चित्र किसी एजेंसी द्वारा जारी दस्तावेज़ या आधिकारिक वेबसाइट के वास्तविक screenshot नहीं हैं। जानकारी की जाँच: 24 अक्टूबर 2026।
- MHA / PIB: Digital arrest warning, 14 May 2024
- PIB: Fake letters with names, stamps and logos, 4 July 2024
- MHA / PIB: Cybercrime reporting, 25 March 2025
- Union Bank of India: Digital arrest safety guidance