शैलपुत्री आरती पहले दिन पढ़ी जाती है, जब कलश बैठा हो और बैल वाले रूप का नाम लिया जा रहा हो। पूरी घरेलू आरती PDF में है। जय अंबे गौरी यहाँ दोहराई नहीं गई, वह अलग पाठ है। नीचे वही पंक्तियाँ हैं जो मोहल्ले की थाली पर चलती हैं। पोथी में फर्क हो तो पोथी मानें।

आरती
शैलपुत्री माँ बैल असवार।
करें देवता जय जयकार॥
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
जय गिरिराज किशोरी अम्बे।
शिव मुख चंद चकोरी अम्बे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त जन के दुख हर दो॥
पार्वती तू उमा कहलाए।
जो तुझे सिमरे सो सुख पाए॥
दूजे दिन ब्रह्मचारिणी।
माला कमंडल तप की निशानी॥
तीजे चंद्रघंटा माँ।
भाल पर चाँद, भय हरो माँ॥
चौथे कूष्मांडा कहलाएँ।
आठ भुजा, जग को चमकाएँ॥
पाँचवें स्कंदमाता जानें।
कार्तिकेय को गोद बिठाएँ॥
छठे कात्यायनी माता।
सिंह सवार, शौर्य की गाथा॥
सातवें कालरात्रि रूप।
अँधेरा काटे, रहे अनूप॥
आठवें महागौरी नाम।
श्वेत वसन, शांत ललाम॥
नवमें सिद्धिदात्री देवी।
नौ दिन पूरे, जय हो भवी॥
थाली कैसे घुमाएँ
दीया घी या तेल का। घंटी बाएँ या दाएँ, जिस हाथ से घर बजाता हो। गेंदा। आरती कलश की परिक्रमा में घड़ी की दिशा में। कपूर हो तो लोहे की कटोरी में, हाथ में न पकड़ें। बच्चे पास हों तो थाली नीचे रखें। आरती के बाद प्रसाद बाँटें। पानी का छींटा रीत है, किसी के कपड़े खराब करने के लिए नहीं।
यह पाठ फल नहीं बाँटता। नौकरी, विवाह या रोग पर वादा नहीं। 11 अक्टूबर 2026 पहला दिन माना जा रहा है। पंचांग हिला दे तो आरती उस सुबह पढ़ें जिस सुबह कलश बैठा हो।
यह जानकारी हिंदू पंचांग, पुराण-कथा और घर-क्षेत्र की रीत से ली गई है। तिथि स्थानीय पंचांग से बदल सकती है। रंग और भोग एक आधिकारिक सूची नहीं। फल, नौकरी या रोग की गारंटी नहीं। वेबसाइट जिम्मेदार नहीं।