कन्या पूजन विधि अष्टमी-नवमी की जरूरत हो तो ये PDF डाउनलोड कर लो। इसमें पूजा के कदम साफ लिखे हैं। थाली की पूरी लिस्ट अलग पोस्ट में है। यहाँ आसन, तिलक, भोजन और भेंट का क्रम है।
Drik Panchang (दिल्ली) के अनुसार 2026 में दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर सुबह से 19 अक्टूबर सुबह तक चलती है। कुछ क्षेत्रों (जैसे बंगाल) में नवमी 20 अक्टूबर हो सकती है। अपने शहर का पंचांग जरूर देख लो।

PDF में क्या है
PDF एक पेज की है। इसमें तैयारी और पूजा के 6 कदम हैं:
- कन्याएँ पहले से तय कर लो। उम्र छोटी, स्कूल जाने लायक। संख्या आमतौर पर 7, 9 या 11।
- लाल कपड़े का आसन। थाली संख्या = कन्या + एक अतिरिक्त।
- हलवा, पूरी, काला चना गरम रखो। चुनरी, चूड़ी, बिंदी और बराबर दक्षिणा।
- जहाँ रीत हो वहाँ पैर धोने का पानी और तौलिया।
पूजा के कदम: कन्याओं को आदर से बिठाओ, माथे पर रोली-चावल का तिलक, छोटा मंत्र ॐ दुं दुर्गायै नमः, पहले भोजन परोसो (जबरदस्ती मत खिलाओ), फिर चुनरी-चूड़ी-बिंदी और दक्षिणा बराबर दो, आशीर्वाद लेकर विदा करो।

किसके काम की है और कैसे इस्तेमाल करें
ये उन घरों के लिए है जो नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं। PDF डाउनलोड कर लो। कदम पढ़ लो। कन्याएँ पहले दिन से तय कर लो। एक दिन चुन लो — अष्टमी या नवमी। दोनों दिन करने की मजबूरी नहीं। कुल की रीत देख लो। फोटो के लिए मत रोको। आदर से करो।
थाली की विस्तृत लिस्ट के लिए अलग PDF है। यहाँ सिर्फ विधि के कदम हैं।
कुछ छोटी बातें ध्यान रखो। कन्याओं को बुलाने का समय पहले बता दो, ताकि वे भूखी न बैठी रहें। खाना बहुत तीखा मत बनाओ। भोजन से पहले हाथ धुलवा दो। बहुत छोटी कन्या हो तो माँ को साथ बिठा सकते हो। आखिर में प्रसाद घर में बाँट दो। संधि पूजा अलग विषय है।
FAQ
कन्या पूजन 2026 में किस दिन है?
दिल्ली के पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं। अपने शहर का पंचांग देख लो।
कन्या पूजन में कितनी कन्याएँ बुलानी चाहिए?
परंपरा के अनुसार 7, 9 या 11। उम्र आमतौर पर 2 से 10 साल। कुल की रीत के हिसाब से तय करो।
कन्या पूजन में क्या प्रसाद बनाते हैं?
हलवा, पूरी और काला चना। गरम परोसो। जबरदस्ती मत खिलाओ।
ये भी पढ़ें:
- नवरात्रि में कन्या पूजन कैसे करें
- कन्या पूजन थाली लिस्ट PDF
- दुर्गा अष्टमी पूजा विधि
- दुर्गा चालीसा PDF अर्थ सहित
यह विधि हिंदू लोक-परंपरा पर आधारित है। रीत और तिथि क्षेत्र से बदलती है। आदर से करें, जबरदस्ती नहीं। यह आस्था का पाठ है — चिकित्सा, कानूनी सलाह या फल की गारंटी नहीं। वेबसाइट लाभ-हानि की जिम्मेदारी नहीं लेती।