व्रत में चक्कर और कमजोरी? जानें शरीर के अंदर क्या होता है

व्रत में चक्कर और कमजोरी? जानें शरीर के अंदर क्या होता है

दोपहर के 2 बज रहे हैं, पेट खाली है और अचानक उठते ही आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। सिर चकराने लगता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। अगर व्रत के दौरान आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसे सिर्फ श्रद्धा का हिस्सा मानकर अनदेखा न करें। यह आपका शरीर है जो आपको एक बेहद जरूरी इशारा दे रहा है।

विज्ञापन

अचानक चक्कर आने के पीछे का असली वैज्ञानिक खेल

जब आप व्रत रखते हैं और खाना पीना बंद कर देते हैं, तो शरीर की पूरी ऊर्जा प्रणाली बदल जाती है। आम दिनों में आपका शरीर कार्बोहाइड्रेट से ग्लूकोज बनाकर दिमाग और मांसपेशियों को चलाता है। उपवास के दौरान जब ग्लूकोज मिलना बंद होता है, तो सबसे पहला असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। ब्लड शुगर अचानक गिरने से दिमाग तक सही मात्रा में फ्यूल नहीं पहुंच पाता।

हमारा दिमाग शरीर की कुल ऑक्सीजन और ग्लूकोज का एक बड़ा हिस्सा अकेला इस्तेमाल करता है। जैसे ही खून में शर्करा का स्तर कम होता है, दिमाग सुरक्षा मोड में चला जाता है। इसी वजह से आपको सुस्ती, सिर में हल्कापन और चक्कर आने का अहसास होता है। यह कोई आध्यात्मिक परीक्षा नहीं, बल्कि सीधी बायोलॉजिकल प्रतिक्रिया है।

इसके अलावा, जब पेट खाली होता है तो शरीर में इंसुलिन का स्तर बहुत नीचे गिर जाता है। इंसुलिन कम होने से गुर्दे (किडनी) शरीर से पानी और सोडियम को बाहर निकालने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के शुरुआती कुछ घंटों में ही शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ने लगता है और चक्कर आने की नौबत आ जाती है।

डीहाइड्रेशन: बिना पानी या कम पानी के व्रत का खतरा

कई लोग व्रत के दौरान पानी पीने में भी कंजूसी करते हैं या निर्जला व्रत रखते हैं। पानी की कमी यानी डीहाइड्रेशन चक्कर आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जब शरीर में पानी का स्तर गिरता है, तो खून की कुल मात्रा (ब्लड वॉल्यूम) भी कम हो जाती है। कम खून का आयतन मतलब दिल को दिमाग तक सही दबाव के साथ खून पहुंचाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है।

विज्ञापन

जब आप अचानक बैठे या लेटे हुए से खड़े होते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण खून पैरों की तरफ खिंचता है। सामान्य हालत में दिल तुरंत प्रतिक्रिया देता है, लेकिन निर्जला या कम पानी वाले उपवास में ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है। इस स्थिति को डॉक्टरी भाषा में ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन कहते हैं। इसी वजह से आंखों के सामने अचानक काला अंधेरा छा जाता है।

अगर आप व्रत में सिर्फ चाय या कॉफी पीकर काम चला रहे हैं, तो यह और भी खतरनाक है। कैफीन शरीर से पानी को बाहर निकालता है, जिससे डीहाइड्रेशन की समस्या कई गुना बढ़ जाती है। सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि शरीर को तरल पदार्थों की सख्त जरूरत होती है ताकि खून का बहाव सामान्य बना रहे।

इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन और मांसपेशियों की थकान

शरीर को ठीक से चलाने के लिए सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की भी जरूरत होती है। जब आप लंबे समय तक नमक या सामान्य भोजन नहीं खाते, तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ जाता है। इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे नसों और मांसपेशियों के बीच संदेश भेजने का काम करते हैं।

सोडियम की कमी से सिर घूमना और घबराहट होना आम बात है, जबकि पोटैशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और भारी कमजोरी महसूस होती है। जो लोग व्रत में सेंधा नमक का भी बहुत कम इस्तेमाल करते हैं, उनके शरीर में सोडियम का स्तर तेजी से नीचे जाता है। नसों का संचार धीमा पड़ने से हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं और चक्कर की समस्या बढ़ जाती है।

इसलिए उपवास का मतलब शरीर को पूरी तरह न्यूट्रिएंट्स से वंचित करना नहीं है। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को अगर सही समय पर न संभाला जाए, तो चक्कर आने के साथ-साथ बेहोशी या तेज सिरदर्द की नौबत भी आ सकती है।

विज्ञापन

व्रत के दौरान की जाने वाली 3 आम गलतियां जो हालत बिगाड़ती हैं

अक्सर लोग व्रत के नाम पर ऐसी गलतियां करते हैं जो उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ती हैं। सबसे पहली galti है एकदम से बहुत ज्यादा तला-भुना फलाहार खाना। दिनभर भूखे रहने के बाद अचानक कुट्टू की पूरी या आलू की चिप्स खाने से पाचन तंत्र पर भारी दबाव पड़ता है और सारा खून पेट की तरफ भागता है, जिससे दिमाग में खून की कमी होती है और चक्कर आते हैं।

दूसरी बड़ी galti है खाली पेट अत्यधिक चाय या कॉफी का सेवन करना। चाय में मौजूद टैनिन और कैफीन पेट में एसिडिटी बनाते हैं। एसिडिटी जब बढ़ती है तो जी मिचलाना और सिर घूमने की शिकायत होने लगती है।

  • लगातार काम करते रहना: बिना खाना खाए शरीर को आराम न देना और भारी शारीरिक मेहनत करना।
  • अचानक खड़े होना: लेटे या बैठे रहने के बाद झटके से उठना।
  • फलों का परहेज: केवल एक तरह का फलाहार खाना और ताजे फलों को डाइट में शामिल न करना।

इन छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से ही उपवास का अनुभव सुखद रहने के बजाय बीमारी और कमजोरी में बदल जाता है।

FACT: जब आप उपवास रखते हैं, तो शरीर में जमा ग्लाइकोजन 12 से 16 घंटे में खत्म हो जाता है। इसके बाद दिमाग को ऊर्जा देने के लिए लिवर फैट को कीटोन में बदलने लगता है, जिससे शुरुआत में चक्कर आते हैं।

अगर अचानक चक्कर आने लगें तो तुरंत क्या करें?

अगर व्रत के दौरान आपको अचानक लगे कि दुनिया घूम रही है, तो सबसे पहले घबराएं नहीं। तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर बैठ जाएं या संभव हो तो लेट जाएं। खड़े रहने की जिद बिल्कुल न करें, क्योंकि चक्कर आने पर गिरने से गंभीर चोट लग सकती है। अगर आप लेट रहे हैं, तो पैरों के नीचे एक तकिया रख लें ताकि दिमाग की तरफ खून का बहाव तेजी से हो सके।

अपनी गर्दन को ढीला करें और गहरी सांसें लें। अगर आपने निर्जला व्रत नहीं रखा है, तो तुरंत सेंधा नमक और नींबू मिला हुआ पानी धीरे-धीरे सिप करके पीएं। नारियल पानी इस स्थिति में संजीवनी की तरह काम करता है क्योंकि इसमें तुरंत अवशोषित होने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं।

अपनी आंखों को कुछ देर के लिए बंद कर लें और ठंडी हवा में रहें। अगर 10-15 मिनट में राहत न मिले या उल्टी जैसा महसूस हो, तो जबरदस्ती व्रत जारी रखने के बजाय तुरंत थोड़ा सा मीठा फल या जूस लें। आपकी जान और सेहत किसी भी नियम से ज्यादा कीमती है।

किन लोगों को व्रत रखने से सख्ती से बचना चाहिए?

धर्म और आस्था अपनी जगह है, लेकिन शरीर की जैविक सीमाओं को नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ मेडिकल स्थितियों में उपवास रखना शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह हो सकता है। टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के लंबा व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए, क्योंकि उनका शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक गिर सकता है।

जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत रहती है, उनके लिए लंबे समय तक भूखा रहना चक्कर और बेहोशी का सीधा न्योता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को भी उपवास से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उन्हें दो शरीरों के पोषण की जिम्मेदारी उठानी होती है।

यदि आप हाल ही में किसी गंभीर बीमारी से उबरे हैं या खून की कमी (एनेमिया) से जूझ रहे हैं, तो शरीर को तनाव में डालना बुद्धिमानी नहीं है। ऐसे मामलों में फलाहार या नियमों में ढील देकर ही उपवास का संकल्प लेना चाहिए।

ये भी पढ़ें:

Vivek Bhai ki Advice

व्रत रखना हमारी संस्कृति का एक सुंदर हिस्सा है, लेकिन इसका मकसद शरीर को प्रताड़ित करना बिल्कुल नहीं है। प्राचीन समय में जब लोग उपवास रखते थे, तो उनकी जीवनशैली, खान-पान और हवा-पानी आज से बहुत अलग थे। आज के तनावपूर्ण जीवन में अगर आप पूरे दिन भूखे रहकर ऑफिस का काम करेंगे या भागदौड़ करेंगे, तो चक्कर आना स्वाभाविक है।

विज्ञान और आस्था कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं रहे हैं। अपने शरीर की सीमाओं को समझना ही असली समझदारी है। अगर आपका शरीर चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि उसे ईंधन की जरूरत है, तो उसकी बात सुनिए। खुद को जबरदस्ती ढकेलना भक्ति नहीं, शरीर के साथ अन्याय है।

💡 उपवास में भक्ति मन की शुद्धता से होती है, शरीर को बीमार करने से नहीं — जरूरत पड़ने पर फलाहार लेने में संकोच न करें।

देख भाई, सीधी सी बात है। अगर व्रत के दौरान सिर घूम रहा है या हाथ-पैर कांप रहे हैं, तो तुरंत नींबू पानी या नारियल पानी पी लो। कोई भगवान तुमसे यह उम्मीद नहीं करता कि तुम अस्पताल पहुंच जाओ। अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए संतुलित तरीके से फलाहार करो और स्वस्थ रहकर आस्था का आनंद लो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

व्रत में चक्कर आए तो क्या व्रत टूट जाता है अगर कुछ खा लें?

सेहत पहली प्राथमिकता है। अगर आपकी तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है और आप फल, नारियल पानी या सेंधा नमक का पानी लेते हैं, तो इसे आपातकालीन स्थिति माना जाता है। शास्त्रों और व्यावहारिक जीवन दोनों में ही अस्वस्थ शरीर से व्रत जारी रखने की सलाह नहीं दी जाती।

व्रत के दौरान ब्लड शुगर कम होने से कैसे बचाएं?

व्रत की शुरुआत यानी सरगी या फलाहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें जो धीरे-धीरे पचते हैं, जैसे मखाना, भुना हुआ समा का चावल, या दूध। एकदम से बहुत ज्यादा चीनी वाली चीजें खाने से बचें, क्योंकि वे शुगर को तेजी से बढ़ाकर फिर अचानक गिरा देती हैं।

क्या निर्जला व्रत में चक्कर आना सामान्य बात है?

चक्कर आना यह संकेत है कि आपके शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है। भले ही निर्जला व्रत का रिवाज हो, लेकिन चक्कर आने की स्थिति में तुरंत जल ग्रहण करना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।

व्रत में कौन सा पेय पदार्थ तुरंत ताकत देता है?

ताजा नारियल पानी, सेंधा नमक और मिश्री मिला हुआ नींबू पानी, या फिर खीरे का जूस तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स और ग्लूकोज का संतुलन बहाल करते हैं और चक्कर से तुरंत राहत दिलाते हैं।

Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।

विज्ञापन

Faith के फ्री टूल

सभी देखें →

🆕 मिलती-जुलती पोस्ट

इंसान की ‘सबसे बड़ी कमजोरी’ क्या है? | insan ki sabse badi kamzori kya hai इंसान की ‘सबसे बड़ी कमजोरी’ क्या है? | insan ki sabse badi kamzori kya hai Faith नवरात्रि में दाढ़ी बना सकते हैं या नहीं? बाल कटवाने की परंपरा और व्रत के नियम नवरात्रि में दाढ़ी बना सकते हैं या नहीं? बाल कटवाने की परंपरा और व्रत के नियम Faith ऋषि पंचमी 2026 कब है? 15 सितंबर तारीख, व्रत विधि, कथा ऋषि पंचमी 2026 कब है? 15 सितंबर तारीख, व्रत विधि, कथा Faith हरतालिका तीज 2026: मध्यप्रदेश में तीजा व्रत कब है? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण से जुड़ी जरूरी जानकारी Faith
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा 2025: गुरु महिमा, व्रत और सम्मान देने का सही तरीका गुरु पूर्णिमा 2025: गुरु महिमा, व्रत और सम्मान देने का सही तरीका Faith पुत्रदा एकादशी व्रत: संतान सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का पावन पर्व – संपूर्ण पूजा विधि, कथा और महत्व पुत्रदा एकादशी व्रत: संतान सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का पावन पर्व – संपूर्ण पूजा विधि, कथा और महत्व Faith एकादशी व्रत का महत्व: आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और शारीरिक लाभ | Ekadashi Vrat Ka Mahatva In Hindi एकादशी व्रत का महत्व: आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और शारीरिक लाभ | Ekadashi Vrat Ka Mahatva In Hindi Faith पापमोचनी एकादशी व्रत: महत्व, कथा, पूजा विधि और पारणा का शुभ मुहूर्त | Papmochani Ekadashi Vrat Ka Mahatva पापमोचनी एकादशी व्रत: महत्व, कथा, पूजा विधि और पारणा का शुभ मुहूर्त | Papmochani Ekadashi Vrat Ka Mahatva Faith
विज्ञापन
Vivek Hardaha Written by: Writer, YouTuber and tool builder · Madhya Pradesh

Vivek has been online since 2012 and has worked since 2014 across YouTube, blogs and news platforms. He holds an M.Sc. in Computer Science and an M.A. in Sociology. On Vista Hub he writes practical, plain-language guides on tech, money, health, farming and festivals.

Vista Hub अब WhatsApp पर नई पोस्ट और फ्री टूल्स की अपडेट सीधे WhatsApp पर पाएं। Join करें →

🆕 नई पोस्ट

सब देखें →