शाम के 6 बजते ही क्या आपकी आंखों में रेत जैसी चुभन महसूस होती है? क्या गर्दन को दाएं-बाएं घुमाते ही एक तीखा खिंचाव रीढ़ की हड्डी तक जाता है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। बिना ब्रेक के स्क्रीन घूरने की यह आदत आपके शरीर को चुपचाप नुकसान पहुंचा रही है।
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम: सिर झुकाकर काम करने की भारी कीमत
जब आप सीधी स्थिति में बैठते हैं, तो आपकी गर्दन पर आपके सिर का वजन लगभग 4 से 5 किलो होता है। लेकिन जैसे ही आप वर्क फ्रॉम होम या ऑफिस में काम करते हुए अपने सिर को आगे की तरफ 45 डिग्री झुकाते हैं, गर्दन के जोड़ों और मांसपेशियों पर यह दबाव लगभग 20 से 22 किलो तक बढ़ जाता है। सोचिए, दिन में 8 से 10 घंटे तक आपकी गर्दन इतना भारी बोझ उठा रही है।
शुरुआत में यह सिर्फ एक हल्की सी अकड़न महसूस होती है। लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं कि रात को सोने से दर्द ठीक हो जाएगा। लेकिन कुछ ही महीनों में यह खिंचाव सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस और पुराने सिरदर्द का रूप ले लेता है। रीढ़ की हड्डी का ऊपरी हिस्सा लगातार गलत पोस्चर में रहने के कारण अपनी प्राकृतिक शेप खोने लगता है।
इससे बचने का सबसे पहला नियम है अपने मॉनिटर या लैपटॉप का लेवल सही करना। आपके लैपटॉप की स्क्रीन आपकी आंखों की सीधी सीध (Eye Level) में होनी चाहिए। अगर आप लैपटॉप टेबल पर रखते हैं तो उसके नीचे दो-तीन मोटी किताबें या एक लैपटॉप स्टैंड लगाएं ताकि आपको सिर नीचे न झुकाना पड़े।
डिजिटल आई स्ट्रेन: आंखों की नमी क्यों खत्म हो रही है?
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ इंसान 1 मिनट में लगभग 12 से 15 बार पलकें झपकाता है। पलकें झपकने से आंखों की सतह पर नमी की एक नई परत बनती है जो धूल और सूखेपन से बचाती है। लेकिन जब हम स्क्रीन पर कोई कोडिंग, डॉक्यूमेंट या प्रेजेंटेशन देख रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग इतना फोकस हो जाता है कि पलकें झपकने की रफ्तार घटकर 4 से 5 बार पर आ जाती है।
इसी वजह से काम खत्म होते-होते आंखें लाल होने लगती हैं, उनमें जलन होती है और कभी-कभी धुंधला भी दिखने लगता है। इसे मेडिकल भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है। अगर इसे लंबे समय तक अनदेखा किया जाए, तो आंखों का पावर तेजी से बढ़ सकता है।
अपनी आंखों को बचाने के लिए 20-20-20 का नियम अपनी जिंदगी में शामिल कर लें। हर 20 मिनट के काम के बाद, कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। यह छोटी सी आदत आपकी आंखों की मांसपेशियों को तुरंत रिलेक्स करती है और उनमें दोबारा नमी बनाती है।
गलत कुर्सी और बैठने का तरीका: रीढ़ की हड्डी पर असर
अक्सर लोग सोफे पर लेटकर या बिस्तर पर तकिया लगाकर काम करने लगते हैं। शुरुआत में यह बहुत आरामदायक लगता है, लेकिन 1 घंटे के अंदर ही आपकी पीठ और गर्दन का पोस्चर पूरी तरह बिगड़ जाता है। बिना बैक सपोर्ट के बैठने से लोअर बैक पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है जो ऊपर जाकर गर्दन से जुड़ता है।
काम करते वक्त आपकी पीठ बिल्कुल सीधी होनी चाहिए और आपके पैरों के तलवे जमीन पर सपाट टिके होने चाहिए। आपकी कोहनियां मेज पर 90 डिग्री के कोण पर टिकी होनी चाहिए। अगर आपकी कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो पीठ के निचले हिस्से में एक छोटा रोल किया हुआ तौलिया या कुशन जरूर लगाएं।
काम के बीच में हर एक घंटे पर 2 मिनट के लिए अपनी सीट से उठना बेहद जरूरी है। सिर्फ उठकर पानी पीने जाना या थोड़ा टहलना ही आपके शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को दोबारा चालू कर देता है और मांसपेशियों को सुन्न होने से बचाता है।
स्क्रीन की ब्राइटनेस और कमरे की लाइटिंग का संतुलन
क्या आप अंधेरे कमरे में बैठकर सिर्फ लैपटॉप की तेज रोशनी में काम करते हैं? अगर हां, तो आप अपनी आंखों पर सबसे ज्यादा अत्याचार कर रहे हैं। जब कमरे में अंधेरा होता है और स्क्रीन बहुत चमकदार होती है, तो हमारी पुतलियों को बार-बार फैलना और सिकुड़ना पड़ता है। इससे आंखों की नसों पर भयानक दबाव बनता है।
हमेशा ध्यान रखें कि आपके कमरे की रोशनी और आपकी स्क्रीन की ब्राइटनेस एक जैसी होनी चाहिए। अगर कमरे में तेज धूप या ट्यूबलाइट की सीधी रोशनी आपकी स्क्रीन पर पड़ रही है, तो उससे ग्लेयर (चमक) बनता है जो आंखों को बहुत तेजी से थकाता है।
शाम के समय अपने लैपटॉप और मोबाइल में ब्लू लाइट फ़िल्टर या नाइट मोड चालू करना न भूलें। ब्लू लाइट हमारे दिमाग में बनने वाले नींद के हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ को रोकती है, जिससे देर रात तक काम करने के बाद नींद न आने की समस्या पैदा होती है।
गर्दन की अकड़न दूर करने के लिए 3 आसान माइक्रो-एक्सरसाइज
अगर आप अपनी डेस्क से बिना उठे अपनी गर्दन को तुरंत आराम देना चाहते हैं, तो कुछ सिंपल स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बहुत असरदार साबित होती हैं। इन्हें करने में सिर्फ 2 मिनट का समय लगता है, लेकिन ये मांसपेशियों के खिंचाव को तुरंत दूर कर देती हैं।
1. नेक रोटेशन और स्ट्रेच
अपनी गर्दन को धीरे-धीरे दाएं कंधे की तरफ झुकाएं, 5 सेकंड रोकें और फिर बाएं तरफ झुकाएं। इसके बाद अपने सिर को पीछे की तरफ ले जाएं और छत को देखें। ध्यान रखें कि सिर को गोल-गोल तेजी से न घुमाएं, इससे चक्कर आ सकते हैं।
2. शोल्डर श्रग्स (कंधे उचकाना)
अपने दोनों कंधों को ऊपर कानों की तरफ उठाएं, 3 सेकंड रोककर रखें और फिर झटके के बिना नीचे छोड़ दें। ऐसा 5 से 10 बार करने से कंधे और गर्दन के ऊपरी हिस्से में जमा तनाव तुरंत पिघल जाता है।
आंखों के सूखेपन से राहत पाने के घरेलू और वैज्ञानिक उपाय
अगर आपकी आंखों में सूखापन बहुत ज्यादा बढ़ गया है, तो सिर्फ पानी से आंखें धोना काफी नहीं है। बल्कि बार-बार आंखों पर ठंडा पानी मारना कभी-कभी नुकसानदायक भी हो सकता है क्योंकि इससे आंखों का प्राकृतिक तेल धुल जाता है। इसके बजाय सही तरीका अपनाना जरूरी है।
दिन में एक या दो बार अपनी हथेलियों को आपस में रगड़कर गरम करें और बंद आंखों के ऊपर हल्के से रखें। इसे पामिंग (Palming) कहते हैं। हथेलियों की हल्की गर्माहट आंखों की नसों को तुरंत राहत देती है और आंखों के आंसू बनाने वाले ग्लैंड्स को एक्टिव करती है।
डॉक्टर की सलाह से आप एक अच्छा लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप (Lubricating Eye Drops) भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड और पर्याप्त पानी शामिल करें, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन का सीधा असर आंखों की नमी पर पड़ता है।
नाइट शिफ्ट और ओवरटाइम करने वालों के लिए विशेष केयर रूटीन
जो लोग नाइट शिफ्ट में काम करते हैं या जिन्हें 12-12 घंटे स्क्रीन के सामने बिताने पड़ते हैं, उनके लिए खतरा दोगुना होता है। जैविक रूप से हमारा शरीर रात में सोने के लिए बना है, इसलिए रात में स्क्रीन की रोशनी आंखों और दिमाग पर ज्यादा बुरा असर डालती है।
अगर आपकी नाइट शिफ्ट है, तो हर 2 घंटे में अपनी आंखों को 5 मिनट का विश्राम दें। अपनी आंखों पर कॉटन पैड को ठंडे दूध या गुलाब जल में भिगोकर रखें। इससे आंखों की सूजन और काले घेरे (डार्क सर्कल्स) कम होते हैं।
काम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या नारियल पानी पीते रहें। कैफीन यानी चाय और कॉफी का ज्यादा सेवन करने से बचें, क्योंकि यह शरीर को डिहाइड्रेट करता है, जिससे आंखों का सूखापन और गर्दन में क्रैम्प्स बढ़ने का खतरा रहता है।
Vivek Bhai ki Advice
लैपटॉप और स्क्रीन आज के दौर में हमारी रोजी-रोटी का हिस्सा बन चुके हैं, इन्हें पूरी तरह छोड़ना तो मुमकिन नहीं है। लेकिन अपने शरीर को दांव पर लगाकर काम करना कौन सी समझदारी है? आपकी सेहत से बड़ा कोई प्रोजेक्ट या डेडलाइन नहीं होती।
गर्दन दर्द और आंखों की जलन कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो अचानक एक दिन में आती है। यह महीनों तक गलत पोस्चर में बैठने और ब्रेक न लेने की आपकी लापरवाही का नतीजा होती है। अगर आप आज अपनी इन छोटी-छोटी आदतों को नहीं सुधारेंगे, तो कल डॉक्टर के पास भारी फीस चुकाने के लिए तैयार रहिए।
इसलिए आज ही अपनी वर्क-टेबल पर एक लैपटॉप स्टैंड लगाएं, स्क्रीन का लेवल सुधारें और फोन में हर घंटे का एक रिमाइंडर सेट करें। जब आप शारीरिक रूप से ठीक महसूस करेंगे, तभी आपका काम भी बेहतर होगा और लाइफ भी आसान रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कंप्यूटर पर काम करते समय चश्मा पहनना जरूरी है?
अगर आपको नंबर का चश्मा नहीं है, तो भी एंटी-ग्लेयर या ब्लू-कट चश्मा पहनना फायदेमंद होता है। यह स्क्रीन की हानिकारक नीली रोशनी को रोकता है और आंखों में होने वाली थकान और दर्द को कम करता है।
गर्दन के दर्द से तुरंत आराम पाने के लिए क्या करें?
गर्दन में तेज अकड़न होने पर गर्म पानी की थैली या हीटिंग पैड से 10 मिनट की सेकाई करें। इसके साथ ही गर्दन को पीछे की तरफ हल्के से स्ट्रेच करें और कोई भी भारी सामान उठाने से बचें।
दिन में कितनी बार आंखों में लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप डालनी चाहिए?
सामान्य तौर पर डॉक्टर दिन में 2 से 3 बार प्रिजर्वेटिव-फ्री लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, अपनी मर्जी से कोई भी दवा डालने के बजाय एक बार आई स्पेशलिस्ट से परामर्श जरूर लें।
लैपटॉप पर काम करते समय सही बैठने का पोस्चर क्या है?
पीठ सीधी होनी चाहिए, कंधे रिलेक्स रहें, कोहनी मेज पर 90 डिग्री के कोण पर टिकी हो और पैरों के तलवे जमीन पर पूरी तरह सपाट हों। लैपटॉप की स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आपकी आंखों की सीध में होना चाहिए।
Disclaimer: इस article में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है।