Skip to content

जय गणेश देवा आरती: हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व

Faith Vivek Hardaha Updated: नवम्बर 3, 2026

जय गणेश देवा आरती लिरिक्स हिंदी में

नमस्कार दोस्तों! vhoriginal.com पर आपका स्वागत है। इस गाइड में जय गणेश देवा आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल अर्थ और पूजा में महत्व एक जगह मिलेंगे। भारत में किसी भी शुभ कार्य से पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है, और उनकी सबसे लोकप्रिय आरती है ‘जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा’। सुखकर्ता दुखहर्ता आरती और गणेश मंत्र के लिए देखें: गणेश आरती और मंत्र 2026।

यह आरती सिर्फ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भक्तों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। गणेश चतुर्थी पर या रोज़ाना पूजा के बाद गाने से मन को शांति मिलती है और विघ्न दूर होते हैं। नीचे संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ और संक्षिप्त पूजा विधि दी गई है।

जय गणेश देवा आरती: संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में

यहां भगवान गणेश की प्रचलित आरती के बोल हैं, जिन्हें आप अपनी पूजा में शामिल कर सकते हैं:

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

गणेश जी की आरती का महत्व

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। जय गणेश देवा आरती भक्तों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  • विघ्न निवारण: श्रद्धा से पाठ करने पर जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
  • बुद्धि और ज्ञान: आरती से स्मरण शक्ति और सही निर्णय लेने में सहायता मिलती है, ऐसी आस्था है।
  • मनोकामना पूर्ति: निष्ठापूर्वक आरती करने वाले भक्तों की शुभ कामनाएं पूर्ण होती हैं, ऐसा माना जाता है।
  • सकारात्मक वातावरण: मधुर स्वर और भक्तिमय बोल घर में शांति का भाव जगाते हैं।
  • भक्ति का माध्यम: आरती से भक्त गणेश जी से जुड़ते हैं और मन को सुकून मिलता है।

आरती का भावार्थ

जय गणेश देवा आरती के हर शब्द में गणेश जी के स्वरूप और कृपा का वर्णन है:

  • “माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा”: माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण — गणेश जी की दिव्य उत्पत्ति।
  • “एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी”: एकदन्त त्याग और ज्ञान का प्रतीक; चार भुजाएं उनके सर्वशक्तिमान स्वरूप को दर्शाती हैं।
  • “माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी”: तिलक शुभता का चिह्न; मूषक पर सवारी अहंकार पर नियंत्रण का संकेत मानी जाती है।
  • “अन्धन को आँख देत… निर्धन को माया”: असहायों पर करुणा — स्वास्थ्य, संतान और समृद्धि की कामना का भाव।
  • “पान चढ़े, फूल चढ़े… लड्डुअन का भोग”: प्रेम से अर्पित भोग और संतों-भक्तों की सेवा का वर्णन।

गणेश पूजा और आरती की संक्षिप्त विधि

आरती से पहले विधिवत पूजा शुभ मानी जाती है। संक्षेप में:

  1. स्नान और शुद्धि: स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान की तैयारी: चौकी पर लाल/पीला वस्त्र बिछाकर प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. दीप प्रज्ज्वलन: घी का दीपक और धूप-अगरबत्ती जलाएं।
  4. आवाहन: फूल-अक्षत लेकर गणेश जी का ध्यान करें।
  5. पुष्प और दूर्वा: लाल फूल, शमी पत्र और 21 दूर्वा अर्पित करें।
  6. भोग: मोदक, लड्डू या मीठा प्रसाद अर्पित करें।
  7. आरती: अंत में जय गणेश देवा आरती गाएं; घंटी बजाएं।
  8. प्रदक्षिणा: तीन परिक्रमा करें और क्षमा याचना करें।

स्थापना-विधि और सामग्री विस्तार के लिए: गणेश स्थापना पूजा विधि और सामग्री 2026।

गणेश चतुर्थी पर आरती

गणेश चतुर्थी पर घर में प्रतिमा स्थापित कर सुबह-शाम जय गणेश देवा आरती का पाठ आम है। विसर्जन के दिन भी आरती के साथ विदाई की जाती है। डेट और मुहूर्त देखें: गणेश चतुर्थी 2026 डेट, मुहूर्त और विसर्जन।

निष्कर्ष

जय गणेश देवा आरती गणेश जी के प्रति श्रद्धा का सरल और पवित्र माध्यम है। चाहे चतुर्थी हो या रोज़ाना पूजा — इस आरती के लिरिक्स याद रखें, अर्थ समझें और भक्ति से गाएं। विघ्नहर्ता गणेश का आशीर्वाद आपके कार्यों में मंगल लाए।

Faith के फ्री टूल

सभी देखें →

Share Your Opinion

Comments are closed on this post.

More on Site