📅 7 सितंबर

गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January

गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January
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गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January

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गणतंत्र दिवस पर कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January

गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January
गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem 

——–

कोशिश कर हल निकलेगा,

आज नहीं तो कल निकलगा।

कोशिश कर हल निकलेगा,

आज नही तो कल निकलेगा,

अर्जुन सा लक्ष्य रख निशाना लगा,

मरुस्थल से भी फिर जल निकलेगा,

मेहनत कर पौधों को पानी दे,

बंजर में भी फिर फल निकलेगा,

ताक़त जुटा, हिम्मत को आग दे,

फौलाद का भी बल निकलेगा,

सीने में उम्मीदों को ज़िंदा रख,

समन्दर से भी गंगाजल निकलेगा,

कोशिशें जारी रख कुछ कर ग़ुज़रने की,

जो कुछ थमा-थमा है चल निकलेगा,

कोशिश कर हल निकलेगा,

आज नहीं तो कल निकलगा।

*****

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26 January Poem in Hindi

देश हमारा सबसे प्यारा,

बच्चों इसे प्रणाम करो।

देश हमारा सबसे प्यारा,

बच्चों इसे प्रणाम करो,

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,

साथ यहाँ सब रहते हैं,

सुख-दुःख जो भी इनको मिलते,

सारे मिल कर सहते हैं,

सबने मिलकर ठान लिया हैं,

भारत का यशमान मान करो,

बच्चों इसे प्रणाम करो।

होली, दिवाली, क्रिसमस सब त्यौहार हम मनाते हैं,

और ईद के अवसर पर हम सबको गले लगाते हैं,

यह भारत की परंपरा है,

इसका तुम सम्मान करो,

बच्चों इसे प्रणाम करो,

मानवता की रक्षा करते,

मानव धर्म निभाते हैं,

ठुकराया हो जिसको जग ने,

हम उसको अपनाते हैं,

ऐसा भारत अपना भारत,

इसका तुम गुणगान करो,

बच्चों इसे प्रणाम करो,

देश हमारा सबसे प्यारा,

बच्चों इसे प्रणाम करो।

*****

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गणतंत्र दिवस का है अवसर,

हिस्सा लें इसमें बढ़ चढ़ कर,

निकाल के अपने सारे डर,

बढ़ते चले जीवन पथ पर,

इस पावन दिन ये ध्यान करें,

संविधान का सब सम्मान करें,

इतने सारे अधिकार जो दे,

सदा समर्पित उसको प्राण करें,

संविधान ने हर अधिकार दिया,

सबका सपना साकार किया,

शोषित वर्षों से था भारत,

उसको एक नया आकार दिया,

लोगों के मन में ना हो भय,

इसलिए सरकार की सिमा तय,

अधिकारों से जो वंचित हैं,

जा सकता है वो न्यायालय,

पुरखों ने पुख्ता काम किया,

संविधान हमारे नाम किया,

चर्चा हर एक धारा पर,

सुबह से लेकर शाम किया,

देश की ऊँची शान करें,

तिरंगे का गुणगान करें,

राष्ट्र हित में जो अनिवार्य,

बिना कहे योगदान करें।

*****

गणतंत्र दिवस पर कविताएं 

गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 जनवरी के लिए कविता | Republic Day Poem in Hindi for 26 January


एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बंधाए,

कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,

इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,

और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गंवाए!

किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।


जय बोलो उस धीर व्रती की जिसने सोता देश जगाया,

जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया,

जिसने आजादी लेने की एक निराली राह निकाली,

और स्वयं उसपर चलने में जिसने अपना शीश चढ़ाया,

घृणा मिटाने को दुनियाँ से लिखा लहू से जिसने अपने,

‘जो कि तुम्हारे हित विष घोले, तुम उसके हित अमृत घोलो।’

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

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कठिन नहीं होता है बाहर की बाधा को दूर भगाना,

कठिन नहीं होता है बाहर के बंधन को काट हटाना,

गैरों से कहना क्या मुश्किल अपने घर की राह सिधारें,

किंतु नहीं पहचाना जाता अपनों में बैठा बेगाना,

बाहर जब बेड़ी पड़ती है भीतर भी गांठें लग जातीं,

बाहर के सब बंधन टूटे, भीतर के अब बंधन खोलो।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।


कटीं बेड़ियां औ’ हथकड़ियां, हर्ष मनाओ, मंगल गाओ,

किंतु यहां पर लक्ष्य नहीं है, आगे पथ पर पांव बढ़ाओ,

आजादी वह मूर्ति नहीं है जो बैठी रहती मंदिर में,

उसकी पूजा करनी है तो नक्षत्रों से होड़ लगाओ।

हल्का फूल नहीं आजादी, वह है भारी जिम्मेदारी,

उसे उठाने को कंधों के, भुजदंडों के, बल को तोलो।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

हरिवंश राय बच्चन

*****


चिश्ती ने जिस जमीं पे पैगामे हक सुनाया

नानक ने जिस चमन में बदहत का गीत गाया

तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया

जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है।


सारे जहां को जिसने इल्मो-हुनर दिया था,

यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था

मिट्टी को जिसकी हक ने जर का असर दिया था

तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है

टूटे थे जो सितारे फारस के आसमां से

फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से

बदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से

मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहां से

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है।

– इकबाल

*****

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,

आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे

हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से

तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे

बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरखे का,

चरखे से जमीं को हम, ता चर्ख गुंजा देंगे

परवाह नहीं कुछ दम की, गम की नहीं, मातम की,


है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे

उफ तक भी जुबां से हम हरगिज न निकालेंगे

तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे

सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका

चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे

दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं

खूं से ही हम शहीदों के, फौज बना देंगे

मुसाफिर जो अंडमान के, तूने बनाए, जालिम

आजाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे

-अशफाकउल्ला खां

*****

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इलाही खैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,

हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फरियाद करते हैं

कभी आजाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैं

मगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैं

असीराने-कफस से काश, यह सैयाद कह देता

रहो आजाद होकर, हम तुम्हें आजाद करते हैं

रहा करता है अहले-गम को क्या-क्या इंतजार इसका

कि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैं

यह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कैदे-उल्फत में

वो अब आजाद करते हैं, वो अब आजाद करते हैं


सितम ऐसा नहीं देखा, जफा ऐसी नहीं देखी,

वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फरियाद करते हैं

यह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करते

हमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?

कोई बिस्मिल बनाता है, जो मकतल में हमें ‘बिस्मिल’

तो हम डरकर दबी आवाज से फरियाद करते हैं।।

– राम प्रसाद बिस्मिल

*****

देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,

जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया।

यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,

इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।

इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,

क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।

आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,

लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं।

गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,

इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।

क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,

नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।

तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,

साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।।

*****

‘आओ तिरंगा फहराये’

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

अपना 73वां गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेंगे,

देश पर कुर्बान हुए शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,

भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंडा फहराया था,

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,

थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,

था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,

पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,

थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाएं।।


होठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में सफाई रहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है

मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है

ज्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुजारा होता है

बच्चों के लिये जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है


कुछ लोग जो ज्यादा जानते हैं, इंसान को कम पहचानते हैं

ये पूरब है पूरबवाले, हर जान की कीमत जानते हैं

मिल जुल के रहो और प्यार करो, एक चीज यही जो रहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है


जो जिससे मिला सिखा हमने, गैरों को भी अपनाया हमने

मतलब के लिये अन्धे होकर, रोटी को नही पूजा हमने

अब हम तो क्या सारी दुनिया, सारी दुनिया से कहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है..

– शैलेन्द्र

*****


मेरे देश की आंखें

नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं

पुते गालों के ऊपर

नकली भवों के नीचे

छाया प्यार के छलावे बिछाती

मुकुर से उठाई हुई

मुस्कान मुस्कुराती

ये आंखें

नहीं, ये मेरे देश की नहीं हैं…

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तनाव से झुर्रियां पड़ी कोरों की दरार से

शरारे छोड़ती घृणा से सिकुड़ी पुतलियां

नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं…

वन डालियों के बीच से

चौंकी अनपहचानी

कभी झांकती हैं

वे आंखें,

मेरे देश की आंखें,

खेतों के पार

मेड़ की लीक धारे

क्षिति-रेखा को खोजती

सूनी कभी ताकती हैं

वे आंखें…


उसने झुकी कमर सीधी की

माथे से पसीना पोछा

डलिया हाथ से छोड़ी

और उड़ी धूल के बादल के

बीच में से झलमलाते

जाड़ों की अमावस में से

मैले चांद-चेहरे सुकचाते

में टंकी थकी पलकें उठाईं

और कितने काल-सागरों के पार तैर आईं

मेरे देश की आंखें…

– अज्ञेय

*****

जब देश को खतरा हो गद्दारों से

तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है

जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का

तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है


जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में

तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है

जब नारी खुद को असहाय पाए

तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है


जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश

तो फिर सुभाष का आना जरूरी है

जब सीधे तरीकों से देश न बदले

तब विद्रोह जरूरी है।।

जय हिंद, जय भारत।।

*****

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अमर वो उनकी बलिदानी याद रहे

सालों तक न हो बात पुरानी

आजाद हिन्द का तिरंगा रहे हमेशा ऊंचा

खुशनसीब है हम जो यहां जन्म लिए

यहां की मीट्टी की खुशबू

यहां की हवाओं का अपनापन

हर दिल में राष्टगान का सम्मान रहे


अगर झुकने लगे जो तिरंगा

तो हम बलिदान कर दे खुद को

सर कटा दे पर सर झुका सकते नहीं


हिन्दुस्तान है सोने की चिड़ियां

ईसाई ,सिख, हिन्दू हो या मुस्लिम हम जो भी हो

हम जहां भी रहे

सिर्फ हिन्दुस्तानी रहें

अमर वो उनकी बलिदानी याद रहे।।

——

ये थी कुछ गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी के लिए कवितायेँ। इन्हे इंटरनेट से चुन कर आपके लिए लाया गया है। यहाँ दी गयी रिपब्लिक डे पर कविताओं का इस्तेमाल आप अपने स्कूल कॉलेज में गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी के दिन कर सकते हैं। हमारी ओर से आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। वंदे मातरम्।

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🗓️ आज का इतिहास — 7 सितंबर

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  • 1998। गूगल की आधिकारिक स्थापना हुई, जिसने इंटरनेट पर सूचना खोजने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया और आज यह दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है।
  • 1977। प्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि, जिन्हें हिंदी साहित्य में प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है।
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घनी हरी पत्तियों के बीच प्राकृतिक रूप से खिले तिवरैया के फूल तिवरैया के नाजुक गुलाबी पंखुड़ियों का सुंदर क्लोज-अप दृश्य बारिश के बाद खेतों के किनारे फैली तिवरैया की हरियाली घास और झाड़ियों के बीच खिली तिवरैया की मनमोहक छटा तना और पत्तियों के बीच खिलते तिवरैया फूल का बारीक दृश्य प्राकृतिक जंगल में चारों तरफ फैली तिवरैया की सुंदर क्यारियां लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर, भारत का नाम होगा सबकी ज़ुबान पर। ना पूछो ज़माने से, क्या हमारी कहानी है, हमारी पहचान तो बस ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं। दे सलामी इस तिरंगे को, जिससे तेरी शान है, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका, जब तक दिल में जान है। लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर, भारत का नाम होगा सबकी ज़ुबान पर। क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, क्या सिख और क्या ईसाई, आओ मिलकर आज़ादी का पर्व मनाएँ, क्योंकि हम सब हैं भाई-भाई। हमारी पहचान तो बस ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं। दे सलामी इस तिरंगे को, जिससे तेरी शान है, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका, जब तक दिल में जान है।
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स्ट्रीट स्टाइल स्वैग में तिरंगा लहराता भारतीय युवा। मॉडर्न और बोल्ड अंदाज में तिरंगे के साथ भारतीय लड़की। एस्थेटिक और सिंपल लुक में तिरंगा आर्ट। कंधे पर तिरंगा और चेहरे पर आत्मविश्वास। नया सोच, नया इंडिया - वाइब्रेंट तिरंगा पोस्टर। सपने देखो और पूरा करो - ऐनिमे तिरंगा वॉलपेपर। मेरी पहचान, मेरा भारत - खूबसूरत तिरंगा इलस्ट्रेशन। लहलहाते खेतों के बीच तिरंगा थामे किसान की कॉमिक स्टाइल इमेज संध्या समय खेत में गर्व से तिरंगा फहराता बुजुर्ग किसान हरे-भरे ग्रामीण परिवेश में तिरंगे के साथ भारतीय किसान सूर्योदय के समय मुस्कुराता हुआ किसान और फहराता तिरंगा जोश और संघर्ष की भावना को दर्शाती किसान और तिरंगे की पेंटिंग वाटरकलर आर्ट में ढला किसान और राष्ट्रध्वज तिरंगा आधुनिक एनीमे स्टाइल में हरा-भरा खेत और तिरंगा लिए युवा किसान स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान प्रभु श्री राम और माता सीता का दिव्य स्वरूप। नदी में कमल के फूलों के बीच नाव पर विराजित श्री राम और सीता जी का 3D रूप। पर्वत की ओट में विशाल हनुमान जी के कंधे पर विराजे प्रभु श्री राम का मनमोहक रूप। अधर्म का नाश करने के लिए हाथ में दिव्य धनुष लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम। लंका युद्ध में रावण का सामना करते हुए प्रभु राम का ओजस्वी और शक्तिशाली रूप। आकाश में रावण की छाया और युद्ध भूमि पर खड़े वीर श्री राम का भव्य चित्रण। जंगली मशरूम का एक सुंदर साइड प्रोफाइल व्यू मशरूम की छतरी का विस्तृत ऊपरी हिस्सा मशरूम के नीचे की बारीक धारियां हरी घास के बीच मशरूम का प्राकृतिक दृश्य प्राकृतिक वातावरण में मशरूम का वाइड एंगल दृश्य मशरूम के तने की स्पष्ट बनावट

🕉️ अध्यात्म और आस्था

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साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय — कबीर दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय — सब्र और समय का महत्व सिखाता कबीर का दोहा ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय — प्रेम का सच्चा ज्ञान देता कबीर का दोहा माटी कहे कुम्हार से तू क्या रोंदे मोय — जीवन की नश्वरता बताता कबीर का प्रसिद्ध दोहा कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे बन माहि — घट-घट में ईश्वर का वास समझाता कबीर दोहा जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय — आत्म-अवलोकन सिखाता संत कबीर का दोहा कबीरा खड़ा बाज़ार में लिए लुकाठी हाथ — मोह-माया त्यागने का संदेश देता कबीर का दोहा हनुमान चालीसा डर शुभ अशुभ मुहूर्त शुभ और अशुभ मुहूर्त: जानिए हिंदू कैलेंडर बनने का पूरा साइंस कावड़ यात्रा का इतिहास कावड़ यात्रा 2026 पेड़ के नीचे शक्कर बरगद और पीपल के नीचे शक्कर क्यों डालते हैं? जानें सच बरगद और पीपल के नीचे शक्कर क्यों डालते हैं? जानें सच

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