क्या सचमुच पूरे भारत में नए किराया नियम 2026 लागू हुए हैं?
WhatsApp और सोशल मीडिया पर एक सूची घूम रही है: घर का डिपॉजिट सिर्फ दो महीने, किराया साल में एक बार ही बढ़ेगा, मकान मालिक आने से 24 घंटे पहले बताएगा और हर एग्रीमेंट 60 दिन में डिजिटल रजिस्टर होगा। सूची ऐसे लिखी है जैसे जनवरी 2026 से पूरे देश में एक कानून लागू हो गया हो। उपलब्ध आधिकारिक सामग्री इस दावे की पुष्टि नहीं करती।
केंद्र ने मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए भेजा था। वह अपने आप हर मकान पर लागू केंद्रीय अधिनियम नहीं है। किरायेदारी पर लागू नियम स्थान, संपत्ति के प्रकार, स्थानीय कानून और एग्रीमेंट पर निर्भर करते हैं। इस लेख में “मॉडल में लिखा है” और “आपके राज्य में कानून है” का फर्क समझते हैं।
वायरल दावे की जड़: 2021 का मॉडल टेनेंसी एक्ट
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 जून 2021 को मॉडल एक्ट को मंजूरी दी। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने उसे 7 जून 2021 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास भेजा, ताकि वे नया कानून बनाएं या अपने मौजूदा कानून में बदलाव करें। मंत्रालय के 25 जुलाई 2022 के संसदीय जवाब में यही प्रक्रिया और उस समय की राज्य स्थिति बताई गई थी।
यही सबसे अहम बात है: मंत्रालय का मॉडल किसी पुराने राज्य कानून को अपने आप रद्द नहीं करता। किसी शहर में अपना अधिकार जानने के लिए पहले राज्य का लागू अधिनियम, उसकी अधिसूचना और अपने एग्रीमेंट की शर्तें देखनी होंगी। 2026 लिख देने से 2021 का प्रस्ताव नया राष्ट्रीय नियम नहीं बन जाता।
पाँच वायरल दावों की जाँच
| वायरल दावा | सही स्थिति |
|---|---|
| हर घर का डिपॉजिट अधिकतम दो महीने | मॉडल एक्ट में आवासीय परिसर के लिए दो और गैर आवासीय के लिए छह महीने का प्रस्ताव है। लागू सीमा संबंधित राज्य के कानून से जाँचें। |
| हर एग्रीमेंट 60 दिन में “रजिस्टर्ड” | मॉडल में एग्रीमेंट की सूचना दो महीने में Rent Authority को देने की बात है। यह दस्तावेज़ के पंजीयन की अलग कानूनी प्रक्रिया से एक ही चीज नहीं है। |
| किराया अधिकतम 5% बढ़ेगा | मॉडल एक्ट में ऐसा देशव्यापी प्रतिशत नहीं है। उत्तर प्रदेश की एक विशेष धारा में 5%/7% का नियम खास परिस्थितियों में आता है। |
| मकान मालिक 24 घंटे पहले बताएगा | मॉडल में प्रवेश से पहले सूचना का प्रावधान है, पर उसे पूरे भारत में स्वतः लागू नियम कहना गलत है। |
| तुरंत बेदखली या बिजली काटना वैध है | मॉडल में कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक सेवाओं की सुरक्षा है। स्थानीय कानून और विवाद के तथ्य के अनुसार रास्ता तय होगा। |
दो महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट: किसके लिए?
मॉडल एक्ट की धारा 11 में आवासीय परिसर के लिए अधिकतम दो महीने और गैर आवासीय परिसर के लिए छह महीने का अग्रिम सिक्योरिटी डिपॉजिट लिखा है। यह मॉडल का पाठ है। किरायेदार अपने मकान मालिक से सिर्फ इस केंद्रीय दस्तावेज़ का स्क्रीनशॉट दिखाकर पूरे भारत में उसी सीमा को लागू नहीं करा सकता।
उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश का 2021 का नगरीय परिसर किरायेदारी अधिनियम एक वास्तविक राज्य अधिनियम है। उसका दायरा “नगरीय परिसर” और अधिनियम की अन्य शर्तों से तय होता है। दूसरे राज्यों की सीमा अलग हो सकती है। रकम देने से पहले एग्रीमेंट में जमा राशि, वापसी का समय और वैध कटौतियाँ स्पष्ट लिखवाएँ तथा भुगतान का प्रमाण रखें।
5% किराया वृद्धि: उत्तर प्रदेश की धारा भी अक्सर गलत बताई जाती है
उत्तर प्रदेश अधिनियम, 2021 की धारा 9(1) किराया संशोधन को एग्रीमेंट की शर्तों से जोड़ती है। धारा 9(3) में आवासीय किराए में 5% और गैर आवासीय में 7% सालाना वृद्धि की व्यवस्था उस स्थिति के लिए है जब एग्रीमेंट में वृद्धि की दर तय नहीं है। पुराने किरायों के लिए धारा 9(5) में अलग व्यवस्था है। इसलिए “उत्तर प्रदेश में भी किसी एग्रीमेंट में 5% से अधिक वृद्धि हो ही नहीं सकती” कहना बहुत व्यापक दावा है।
मॉडल एक्ट स्वयं 5% की राष्ट्रीय सीमा नहीं बनाता। यदि कोई किराया बढ़ाने की मांग करे, पहले एग्रीमेंट की अवधि और संशोधन की शर्त पढ़ें; फिर अपने राज्य की लागू धारा देखें। मौखिक बहस की जगह प्रस्तावित वृद्धि और उसकी तारीख लिखित में माँगना उपयोगी है।
दो महीने में सूचना और एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन एक चीज नहीं
मॉडल की धारा 4 लिखित एग्रीमेंट और Rent Authority को तय समय में उसकी जानकारी देने की व्यवस्था रखती है। कई पोस्ट इसे “हर 11 महीने का एग्रीमेंट 60 दिन में सरकारी रजिस्ट्री” लिख देती हैं। Rent Authority को सूचना, स्टाम्प ड्यूटी और Registration Act, 1908 के तहत दस्तावेज़ का पंजीकरण अलग प्रश्न हैं। पंजीयन की आवश्यकता एग्रीमेंट की अवधि और लागू कानून देखकर तय होती है; “11 महीने” कोई जादुई सर्वदेशीय छूट नहीं है।
जहाँ राज्य कानून Rent Authority की व्यवस्था लागू करता है, वहाँ उसका पोर्टल और समय सीमा देखें। उत्तर प्रदेश का सरकारी किरायेदारी पंजीकरण पोर्टल इसका उदाहरण है। किसी दूसरे राज्य में उसी पोर्टल या उसी प्रक्रिया की कल्पना न करें।
मकान मालिक का प्रवेश, मरम्मत और बेदखली
मॉडल एक्ट में किराए के परिसर में मकान मालिक के प्रवेश के कारण, पहले से सूचना, आवश्यक सेवाएँ और विवाद समाधान का ढाँचा दिया गया है। यह किरायेदार को निजी जगह का सम्मान और मकान मालिक को आवश्यक निरीक्षण या मरम्मत का रास्ता देता है। लेकिन किसी विशेष शहर में कितने घंटे की सूचना लागू है, इसका जवाब स्थानीय अधिनियम और एग्रीमेंट से आएगा। आपात स्थिति भी सामान्य निरीक्षण से अलग होती है।
किराया बकाया, अवधि समाप्त होने या नुकसान जैसे विवादों में न तो एक वायरल पोस्ट अपने आप बेदखली कराती है, न वह किरायेदार को हमेशा रहने का अधिकार देती है। ताला बदलने, पानी-बिजली रोकने या धमकी की स्थिति में बातचीत और प्रमाण सुरक्षित रखें तथा स्थानीय कानूनी सहायता लें। लागू कानून में Rent Authority, Rent Court, Rent Controller या अदालत का रास्ता अलग-अलग हो सकता है।
कौन-से राज्य? 2022 की सूची को 2026 की सूची मत समझिए
मंत्रालय ने 25 जुलाई 2022 के जवाब में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और असम को मॉडल की तर्ज पर किरायेदारी कानून संशोधित करने वाले राज्यों के रूप में गिनाया था। यह उस तारीख की जानकारी है, सितंबर 2026 तक सभी राज्यों का अंतिम सत्यापित लेखा नहीं।
“मॉडल अपनाया” भी एक जैसे शब्दों वाला एक जैसा कानून नहीं होता। तमिलनाडु या असम के किरायेदार को उत्तर प्रदेश की धारा 9 सीधे लागू नहीं होगी। किसी राज्य में 2022 के बाद क्या बदला, यह उसके नवीनतम गजट और विभागीय पोर्टल से जाँचें। इस लेख में अप्रमाणित 2026 राज्य सूची देना भ्रम बढ़ाएगा।

किरायेदार और मकान मालिक अभी क्या जाँचें?
पहला, संपत्ति किस राज्य और किस शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में है, यह लिखें। दूसरा, लागू राज्य अधिनियम का नाम और संशोधन देखें। तीसरा, एग्रीमेंट में किराया, बढ़ोतरी, जमा रकम, नोटिस, मरम्मत और प्रवेश की शर्तें पढ़ें। चौथा, भुगतान और बातचीत का रिकॉर्ड रखें। पाँचवाँ, विवाद होने पर उसी राज्य का अधिकृत समाधान मंच ढूँढें।
किसी WhatsApp संदेश में अधिनियम का नाम, राज्य, धारा और सरकारी गजट का लिंक नहीं है तो उसे कानूनी सलाह न मानें। 2021 का मॉडल उपयोगी संदर्भ है; आपका वास्तविक अधिकार लागू स्थानीय कानून और तथ्य तय करते हैं।
आधिकारिक स्रोत
PIB: मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंत्रिमंडल की मंजूरी, 2 जून 2021; PIB/MoHUA: राज्यों की स्थिति पर संसदीय जवाब, 25 जुलाई 2022; मॉडल टेनेंसी एक्ट का पाठ; India Code: उत्तर प्रदेश अधिनियम, 2021; उत्तर प्रदेश सरकारी किरायेदारी पोर्टल। स्रोतों की तारीखें ऊपर दी हैं; राज्य की नई अधिसूचना जाँचकर ही व्यक्तिगत मामले में कदम लें।