जय अम्बे गौरी आरती PDF — पढ़ें, देखें और सेव करें
आरती के समय फोन पर साफ बोल चाहिए या घर में प्रिंट रखने हैं? यहाँ जय अम्बे गौरी आरती के पूरे हिंदी बोल, सरल भावार्थ और तीन पन्नों की फ्री PDF एक साथ हैं। डाउनलोड करने से पहले नीचे उसके असली पन्ने देख लें।
जय अम्बे गौरी आरती PDF डाउनलोड
3 पन्ने · A4 · हिंदी पाठ और हिंदी भावार्थ · 711 KB
डाउनलोड के लिए लॉगिन या पैसे नहीं लगते। PDF इमेज आधारित है: फोन पर ज़ूम कर पढ़ें। टेक्स्ट कॉपी करना हो तो नीचे दिए बोल इस्तेमाल करें।
जय अम्बे गौरी आरती के पूरे हिंदी बोल
हर पद के बाद “जय अम्बे गौरी” की टेक दोहराएँ। परिवार या मंदिर में कुछ शब्द अलग गाए जाते हों तो अपने प्रचलित पाठ से मिलान करें।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी॥
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥
शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी॥
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
जय अम्बे गौरी॥
PDF के तीनों पन्ने — असली प्रीव्यू
ये उसी डाउनलोड फाइल के पन्ने हैं। पहले दो पन्नों पर आरती पूरी है; तीसरे पर पदों का सरल भाव है।



आरती का आसान अर्थ
आरती में माता के रूप, उनके अस्त्र, ज्योति और भक्तों की विनती का वर्णन है। नीचे पदों के क्रम में भाव दिया है। यह सरल व्याख्या है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
- माता अम्बे को प्रणाम। हरि, ब्रह्मा और शिव उनका नित्य ध्यान करते हैं।
- सिंदूर, कस्तूरी का टीका, उज्ज्वल नेत्र और चंद्र जैसे मुख का वर्णन है।
- सोने जैसे तेजस्वी स्वरूप, लाल वस्त्र और लाल फूलों की माला की स्तुति है।
- सिंह पर विराजमान, खड्ग और खप्पर धारण करने वाली माता की सेवा देव, मनुष्य और मुनि करते हैं।
- कुण्डल, नासिका के मोती और सूर्य-चंद्र जैसी ज्योति का वर्णन है।
- शुम्भ, निशुम्भ और महिषासुर पर माता की विजय का स्मरण है।
- चण्ड, मुण्ड, रक्तबीज तथा मधु-कैटभ के संहार से देवताओं का भय दूर होने की स्तुति है।
- माता को ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला और शिव की पटरानी कहा गया है।
- योगिनियों के मंगल गायन, भैरव के नृत्य और वाद्यों का वर्णन है।
- माता को जगत की जननी, पालनहार और दुख हरने वाली माना गया है।
- चार भुजाओं और वरदान देने की मुद्रा की स्तुति है। फल की पंक्ति श्रद्धा का कथन है।
- आरती के थाल, अगर, कपूर और दीपों की ज्योति का वर्णन है।
- अंत में शिवानन्द स्वामी का नाम और आरती गाने का भक्तिपूर्ण फल-वर्णन आता है।
घर में पाठ और प्रिंट कैसे इस्तेमाल करें
फोन में PDF सेव कर लें और आरती से पहले खोलकर रख लें। बड़े अक्षर चाहिए तो ज़ूम करें। प्रिंट निकालते समय A4 और “Fit to page” चुनें; प्रीव्यू में किनारे और अंतिम पंक्तियाँ देख लें। पहली बार पूरे बोल शांत गति से पढ़ें, फिर अपनी परिचित लय में गाएँ।
दीपक स्थिर थाली में रखें और बच्चों की पहुँच से दूर रखें। पाठ पढ़ते समय फोन को लौ के पास न रखें। डाउनलोड की फाइल सेव हुई है या नहीं, उसे फोन के Files या Downloads में एक बार खोलकर देख लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PDF में कितने पन्ने हैं?
तीन A4 पन्ने हैं। पहले दो में पूरे हिंदी बोल और तीसरे में सरल हिंदी भावार्थ है।
क्या डाउनलोड से पहले पूरा PDF देख सकते हैं?
हाँ। इस पेज पर तीनों असली पन्नों के प्रीव्यू हैं। PDF खोलें बटन से पूरी फाइल भी देख सकते हैं।
क्या यह बिना इंटरनेट के पढ़ी जा सकती है?
PDF फोन में सेव करने के बाद बिना इंटरनेट के खोल सकते हैं।
आरती के कुछ बोल अलग क्यों मिलते हैं?
गायन और क्षेत्र के अनुसार छोटे पाठभेद मिलते हैं। इस पेज में एक पाठ रखा गया है और जाँच के लिए स्रोत दिया है।
स्रोत और संबंधित आरती
पाठ का मिलान: Drik Panchang — जय अम्बे गौरी.
जय अम्बे गौरी आरती की इमेज वाली पोस्ट
अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती PDF — पूरे बोल और भावार्थ
अस्वीकरण: यह धार्मिक पाठ और सरल भावार्थ है। क्षेत्रीय शब्दभेद संभव हैं। सुख-संपत्ति और फल की पंक्तियाँ आस्था का कथन हैं; किसी निश्चित लाभ की गारंटी नहीं।