अक्टूबर की सुबह गला खराब हो जाता है। दोपहर में धूप, रात में हल्की ठंड। पंखा पूरी रात चला, सुबह आवाज बैठी हुई। यह बड़ी बीमारी का नाम नहीं। घर का नुस्खा यहीं तक है। बुखार, साँस की दिक्कत या तीन दिन से ज्यादा खराश हो, तो डॉक्टर।
इंदौर में इन दिनों सुबह धुंध और शाम को ठंडी हवा। गला सूखता है, फिर खराश। छींक अलग बात है। दोनों एक दवा नहीं मानो।
खराश कहाँ से आती है
रात को पंखा सीधे मुँह पर। सुबह खिड़की खोलकर ठंडी हवा। पानी कम पिया। धूल वाली सड़क से लौटे। इतना काफी है गला बैठने के लिए। वायरल का नाम बाद में आता है, जब बदन टूटे और बुखार चढ़े।
सुबह की छींक अक्टूबर में आम है। नाक ठंडी हवा से चिढ़ती है। छींक अपने आप खराश नहीं बनाती। नाक बंद हो और मुँह से साँस चले, तब गला सूखता है। रूमाल रखो। हाथ मुँह पर धोओ।
गरारा
एक गिलास गुनगुना पानी। आधा छोटा चम्मच नमक। गरारा करो, निगलो मत। दिन में दो या तीन बार। पानी उबलता हुआ मत लो। गला जल जाएगा। बच्चे गरारा ठीक से नहीं करते। उन्हें सिर्फ गुनगुना पानी पिलाओ, नमक वाला घूँट नहीं।
शहद एक चम्मच, गुनगुने पानी में। एक साल से छोटे बच्चे को शहद मत दो। अदरक का पतला टुकड़ा चबाया जाता है। ज्यादा कच्चा अदरक पेट बिगाड़ सकता है। तुलसी के पत्ते धोकर चबाए जाते हैं। यह घर का चलन है, जाँच की दवा नहीं।
पंखा और ओढ़ना
रात को पंखा बंद करना जरूरी नहीं। गति कम करो। सीधा मुँह पर मत आने दो। गला और छाती ढाँक लो। अक्टूबर की गुलाबी ठंड रजाई नहीं माँगती। एक पतली चादर काफी होती है। बच्चे को मोटा स्वेटर सुबह ही मत पहना दो। दोपहर की धूप में पसीना, शाम को फिर ठंड। वही चक्र छींक लाता है।
स्कूल बस में खिड़की बंद रखो, अगर हवा तेज हो। रूमाल साथ दो। पानी की बोतल गुनगुनी नहीं रहेगी, फिर भी खाली मत जाने दो।
प्लेटलेट वाला नुस्खा
वायरल में प्लेटलेट बढ़ाने के देसी नुस्खे सर्च होते हैं। पपीता पत्ता, गिलोय, कीवी। ये घर की बातें हैं। प्लेटलेट की गिनती लैब बताती है, चटनी नहीं। बुखार के साथ शरीर पर लाल दाग हों, या कमजोरी ज्यादा हो, तो अस्पताल। देसी काढ़ा डॉक्टर की जगह नहीं।
खराश वाले को काढ़ा पिलाकर प्लेटलेट मत गिनो। दोनों सवाल अलग हैं। खराश तीन दिन में हल्की न पड़े, तो जाँच।
कब घर का नुस्खा बंद करना
बुखार 100 के ऊपर। निगलने में तेज दर्द। आवाज दो दिन से गई हुई। बच्चे सुस्त, पानी नहीं पी रहे। साँस में सीटी। इनमें गरारा काफी नहीं। नजदीकी डॉक्टर या 104 और 108 का नंबर काम का है। यह पेज दवा नहीं लिखता।
दवाई की पुरानी स्ट्रिप मत चलाओ। एंटीबायोटिक बिना पर्ची के गले की खराश नहीं काटती। जुकाम ज्यादातर अपने आप हल्का पड़ता है, आराम और पानी से।
चाय बहुत गर्म मत पीना। गला और सूखता है। दूध ठंडा रात को छोड़ दो। दिन में दो गिलास पानी अलग से, चाय के ऊपर नहीं। भाप का कटोरा मुँह से दूर रखो। बच्चा भाप के पास मत बिठाओ। जलने का खतरा ज्यादा है, आराम से।
ऑफिस में पूरी रात वाला एसी सुबह गला बिठा देता है। दुपट्टा या मफलर गले पर रखो, शक्ल के लिए नहीं। धूल वाली बाइक यात्रा के बाद गरारा। इतना घर कर सकता है। बाकी डॉक्टर का काम है।
एडवाइस:
आज सुबह गुनगुना पानी और नमक का गरारा। शहद बड़े लोगों के लिए। बच्चे को सिर्फ गुनगुना पानी। पंखा कम करो, गला ढाँको। छींक अक्टूबर की ठंडी सुबह से आती है। बुखार या तीन दिन से ज्यादा खराश हो, तो डॉक्टर। प्लेटलेट वाला नुस्खा लैब की जगह नहीं।
यह घर का चलन है, इलाज नहीं। बुखार, साँस की दिक्कत या बच्चे की सुस्ती हो तो डॉक्टर से मिलाओ। साइट नुस्खे की गारंटी नहीं देती।