संपादकीय चित्रण है, घटना की असली फोटो नहीं। आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के हैं। चुनाव आयोग ने हेराफेरी से इनकार किया है। कानूनी सलाह नहीं। स्थिति 3 अक्टूबर 2026 सुबह की।
ममता बनर्जी का 6 लाख वाला दावा 2 अक्टूबर 2026 को फिर सर्च में आया। उन्होंने कहा कि 2021 में जिन सीटों पर टीएमसी एक लाख वोट से जीती थी, वहां SIR में करीब 6 लाख नाम काट दिए गए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को डाकू कहा। यह आरोप है। आयोग ने वोट चोरी और हेराफेरी से इनकार किया है। एक सीट पर 6 लाख नाम कटने का दावा अपने आप सिद्ध आंकड़ा नहीं बन जाता।
दावा क्या है
ममता का वाक्य विधानसभा क्षेत्र का है, लोकसभा का नहीं। एक विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता अक्सर दो से तीन लाख के आसपास होते हैं। 6 लाख नाम एक सीट से कटें, यह संख्या सीट के आकार से बड़ी पड़ती है। इसलिए या तो उन्होंने कई सीटों का जोड़ कहा, या भाषा में बढ़ाव है, या SIR के किसी चरण की सकल सूची की बात है। खबरों में स्पष्ट तालिका नहीं छपी। जब तक सीट-वार ड्राफ्ट और फाइनल रोल न देखें, 6 लाख को तथ्य न मानें।
उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और बंगाल का नाम लिया और 2024 के लोकसभा चुनाव में हेराफेरी की चिंता जताई। 2026 के बंगाल चुनाव में उनकी पार्टी हारी, यह दावे का संदर्भ है। हार का एक कारण SIR है या नहीं, यह चुनाव याचिका और रोल ऑडिट का विषय है, रैली का वाक्य नहीं।
आयोग का पक्ष
आयोग कहता है SIR मृत, शिफ्ट और डुप्लिकेट नाम हटाने के लिए है। पिछली गहन पुनरीक्षण को करीब 25 साल पुराना बताया गया। ड्राफ्ट सूची पर दावा-आपत्ति की खिड़की थी। 2 अक्टूबर को छूटे पात्र नाम जोड़ने का विशेष अभियान भी आया। यानी संस्था अपना पक्ष सफाई बताती है, साजिश नहीं।
कैसे जांचें
बंगाल की किसी सीट का प्री-SIR रोल और फाइनल रोल CEO पोर्टल पर मिलाएं। अंतर गिनें। मृत और शिफ्ट अलग कॉलम में हों तो सफाई का तर्क मजबूत होता है। एक बूथ पर अचानक सैकड़ों जिंदा नाम गायब हों तो शिकायत मजबूत होती है। ममता का वाक्य हेडलाइन है। सीट का पीडीएफ सबूत है।
राष्ट्रीय आंकड़ा यहां है: 13 करोड़ नाम। शब्द की व्याख्या यहां: वोट चोरी क्या है।
एडवाइस:
6 लाख को कोट करें तो साथ में लिखें कि यह ममता बनर्जी का दावा है, सीट-वार तालिका सार्वजनिक नहीं हुई। एक विधानसभा सीट पर 6 लाख वोटर आमतौर पर होते ही नहीं। संख्या जांचें, विशेषण नहीं।
और पढ़ें: इस्तीफे की मांग।
टाइमलाइन, जो सर्च में बार-बार आएगी
15 मार्च 2024 को ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त बने। 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त। SIR बिहार से निकला और राज्यों में फैला। 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस ने संधू और जोशी की 14 आपत्तियां छापीं। 24 सितंबर को राहुल गांधी ने देशद्रोह और कानून चोरी वाला वाक्य कहा। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में इस्तीफे की मांग हुई। 3 अक्टूबर सुबह तक त्यागपत्र नहीं आया। अगली सड़क वाली तारीख 10 अक्टूबर है।
ममता बनर्जी का 6 लाख दावा: एक सीट से इतने नाम कटे या नहीं पर दोनों पक्ष
दावा विधानसभा सीटों का है, जहां कुल वोटर अक्सर 2 से 3 लाख होते हैं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
6 लाख एक सीट से बड़े पड़ते हैं, तालिका सार्वजनिक नहीं हुई। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
उन्होंने ज्ञानेश कुमार को डाकू कहा, यह विशेषण है आंकड़ा नहीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आयोग सफाई बताता है, साजिश नहीं। विपक्ष और प्रदर्शन इसे साजिश का हिस्सा बताते हैं। चुनाव आयोग इसी बिंदु पर कहता है कि सूची की सफाई, मृत नाम और डुप्लिकेट हटाना उसका काम है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 तक इस एक बिंदु पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए लेख आरोप और इनकार दोनों रखता है।
आगे कौन सा सर्च फूटेगा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भीड़ या हिरासत, 8 अक्टूबर के स्थानीय मार्च का आंकड़ा, फॉर्म 6 में नाम जुड़ा या नहीं, और महाभियोग नोटिस एडमिट हुई या नहीं। इस्तीफा तभी लिखें जब आयोग या राष्ट्रपति सचिवालय का नोट आए। नारे को आदेश न बनाएं।
पुरानी कड़ियां: हिरासत, धारा 163, जुलाई बनाम अक्टूबर।