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सांस बिना जीवन संभव नहीं। ज्यादातर लोग सांस लेने के तरीके पर ध्यान नहीं देते। उथली सांस लेने से शरीर को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती। सही तरीका सीखने से दिन भर की थकान कम हो सकती है। यह आदत बच्चों और बड़ों दोनों के लिए उपयोगी है।
सांस लेते समय गहरी और लंबी सांस लेना बेहतर माना जाता है। नाक से सांस लेना मुंह से ज्यादा अच्छा रहता है। यह आदत आसानी से डाली जा सकती है। रोज थोड़ा ध्यान देने से फर्क दिखने लगता है।
सही सांस लेने का मतलब
सही सांस लेने का मतलब है धीरे और गहरी सांस लेना। पेट थोड़ा फूलना चाहिए जब सांस अंदर लें। ज्यादातर लोग छाती से ही छोटी सांस लेते हैं। पेट से सांस लेने पर फेफड़े ज्यादा खुलते हैं।
जब हम तनाव में होते हैं या जल्दी में होते हैं तो सांस उथली हो जाती है। इससे शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है और थकान बढ़ती है। ध्यान देकर सांस को सामान्य किया जा सकता है।
नाक से सांस लेने से हवा साफ और गर्म होकर शरीर में जाती है। मुंह से सांस लेने पर गला सूख सकता है और धूल सीधे अंदर जा सकती है। नाक के बाल भी कुछ धूल रोकते हैं।
लोग गलत तरीके से सांस क्यों लेते हैं
लोग सही सांस नहीं लेते क्योंकि उन्हें इसकी आदत नहीं होती। बचपन से ही उथली सांस की आदत पड़ जाती है। मोबाइल या कंप्यूटर पर झुककर बैठने से भी सांस प्रभावित होती है। सीधी मुद्रा में बैठने से मदद मिलती है।
तनाव और चिंता सांस को तेज और छोटी कर देते हैं। बहुत से लोग काम के दौरान सांस रोककर रखते हैं बिना जाने। यह आदत थकान बढ़ाती है।
नाक बंद होने या एलर्जी के कारण भी मुंह से सांस लेने की आदत पड़ जाती है। यह लंबे समय तक जारी रह सकता है। अगर समस्या बनी रहे तो डॉक्टर से जांच करवाएं।
सही सांस का आसान अभ्यास
शांत जगह पर बैठें। नाक से धीरे सांस अंदर लें और पेट को फूलने दें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह 5-10 बार दोहराएं। आंखें बंद करके करने से ध्यान बेहतर लगता है।
यह अभ्यास सुबह या शाम 5 मिनट करें। लेटकर या बैठकर, दोनों तरह से कर सकते हैं। अगर चक्कर आए तो रुक जाएं और सामान्य सांस लें।
दिन भर याद रखें कि नाक से सांस लें। जब ध्यान जाए तो मुंह बंद करके नाक से सांस लें। यह छोटी आदत बड़ा फर्क लाती है। ऑफिस में भी याद दिला सकते हैं।
गलतियाँ जो न करें
एक गलती यह है कि बहुत तेजी से या जोर से सांस लेना। इससे चक्कर आ सकता है। धीरे और आराम से करें। अभ्यास के दौरान आरामदायक जगह चुनें।
सांस को बहुत देर तक रोककर रखना। सामान्य अभ्यास में सांस रोकने की जरूरत नहीं। आराम से अंदर-बाहर करें। अगर तकलीफ हो तो तुरंत सामान्य सांस लें।
बीमारी या कमजोरी में जबरदस्ती गहरा अभ्यास करना। शरीर की सीमा पहचानें और रुक जाएं अगर तकलीफ हो। आराम से अभ्यास जारी रखें।
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर सांस लेने में अचानक तकलीफ हो, सीने में दर्द हो या होंठ नीले पड़ जाएं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं या 108/112 पर कॉल करें। इंतजार न करें।
लंबे समय से सांस फूलना, खांसी या सीने में जकड़न हो तो जांच करवाएं। खुद से कोई कठिन व्यायाम न करें। डॉक्टर की सलाह लें।
दमा या अन्य सांस की बीमारी हो तो नया अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। गर्भवती महिलाएं भी सावधानी रखें।
बचाव
अच्छी मुद्रा में बैठें। झुककर न बैठें ताकि फेफड़ों को जगह मिले। समय-समय पर खड़े होकर स्ट्रेच करें। कंधों को ढीला रखें।
साफ हवा वाली जगह पर समय बिताएं। धूल और प्रदूषण से बचें। नाक साफ रखें। भीड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
तनाव कम करें। जब तनाव महसूस हो तो कुछ गहरी सांस लें। यह तुरंत आराम देता है। रोज थोड़ा शांत समय निकालें।
दिनभर के लिए आसान सलाह
सुबह उठकर खिड़की खोलें और कुछ गहरी सांस लें। ताजी हवा से दिन की शुरुआत अच्छी होती है। कुछ मिनट बाहर खड़े रहकर भी कर सकते हैं।
काम के बीच में रुककर 5-6 गहरी सांस लें। इससे ध्यान वापस आता है और थकान कम होती है। लंबी बैठक के बाद यह खासतौर पर अच्छा रहता है।
सोने से पहले लेटकर धीमी सांस लें। इससे नींद अच्छी आती है। मोबाइल दूर रखें। कमरे को शांत और हल्का अंधेरा रखें।
अगर नाक बंद हो तो भाप लें या डॉक्टर से पूछें। मुंह से सांस लेने की आदत न पड़ने दें। लंबे समय तक मुंह से सांस लेने से गला सूख सकता है।
सही सांस लेना एक आदत है जो धीरे-धीरे बनती है। रोज के छोटे अभ्यास से यह अपने आप होने लगती है।
FAQ
सांस लेने का सही तरीका क्या है?
नाक से धीरे और गहरी सांस अंदर लें, पेट को हल्का फूलने दें, फिर धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। छाती और कंधे ज्यादा न उठें।
क्या मुंह से सांस लेना गलत है?
नाक से सांस लेना बेहतर माना जाता है। मुंह से लगातार सांस लेने से गला सूख सकता है। नाक बंद हो तो डॉक्टर से पूछें। लंबे समय तक मुंह से सांस लेने से अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
रोज कितनी देर सांस का अभ्यास करें?
शुरू में 5 मिनट काफी है। धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। आराम से करें। अगर थकान हो तो कम कर दें।
सांस फूलने पर क्या करें?
रुकें और आराम करें। अगर तकलीफ ज्यादा हो तो डॉक्टर को दिखाएं। जबरदस्ती जारी न रखें। पानी पिएं और शांत जगह पर बैठें।
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